
अंगूठियों को पहनने से भाग्य बदल सकता है? प्रेमानंद महाराज की बात सुनकर लगेगा झटका
Premanand Maharaj Latest Pravachan: वृंदावन के जाने-माने संत प्रेमानंद महाराज ने अपने हाल की प्रवचन में अंगूठियों को लेकर बात की है। एक शख्स ने उनसे सवाल पूछा कि क्या अंगूठियों को पहनने से भाग्य बदल जाता है? नीचे जानें प्रेमानंद महाराज का जवाब…
रत्नशास्त्र के अनुसार रत्न अंगूठी पहनकर ग्रहों के बुरे असर को कम किया जा सकता है। वहीं कई ज्योतिष भी कुंडली के अनुसार रत्न पहनने की सलाह देते हैं। बहुत लोग इसे काफी मानते भी हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो भाग्य और कर्म जैसी बातों को नहीं मानते हैं। अब सवाल ये है कि क्या वाकई में अंगूठी पहनने से भाग्य बदल जाता है? इस सवाल पर लोगों को अलग-अलग तरह की राय हो सकती है। वहीं अब इस सवाल पर प्रेमानंद महाराज का जवाब आया है। दरअसल हाल ही में एक प्रवचन के दौरान किसी ने प्रेमानंद महाराज से ये सवाल पूछा।

प्रेमानंद महाराज ने दिया ये जवाब
इस सवाल के जवाब पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि अंगूठियों से कुछ होता है क्या? अंगूठी तो ऐसे ही पहनी जाती है। कर्म जो है वो बहुत ही प्रबल होता है। अगर अंगूठी से ऐसा होता तो अंगूठी बनाने वाला सुखी हो जाता कि नहीं हो जाता क्योंकि उसके पास तो सैकड़ों प्रकार की अंगूठियां हैं। एक आदमी आया और उसने हमको बताया कि हमारा साढ़े साती शनिचर चलता है। घोड़े के नाल की अंगूठी पहने था। बोला हमको पहना दिया है पंडित जी ने। इससे साढ़े साती नहीं आएगा। हमने कहा कि घोड़े के ऊपर साढ़े साती चढ़ा हुआ है वो बेचारा दिन भर रोड पर दौड़ता है उसका तो उतरा नहीं। उसकी नाल से तुम्हारा क्या उतर जाएगा। अरे घोड़े की तो खुद दुर्गति हो रही है। वो बेचारा लाद-लादकर परेशान है।
नाम जप से होगा कल्याण
खुला मार्ग है। भगवान की शरण में हो जाओ। भगवान का नाम जप करो। अच्छे कर्म करो। किसी से आशीर्वाद मांगने की जरूरत नहीं है। अंगूठी की जगह अब वो पहनो जिससे नाम जप किया जाता है। क्या कहते है उसे? काउंटर...। काउंटर करो और एनकाउंटर कर दो जो भी तुम्हारे दुख है उनको। जितने भी दुख है, जितनी भी विप्पतियां हैं उनका एनकाउंटर कर दो। राधा राधा राधा राधा।
दुख दूर करने का सामर्थ्य नहीं
शोभा के लिए अगर आप बड़े धनी हो बढ़िया हीरा का नग लगाकर सोने की अंगूठी पहनो। शोभा के लिए पहनो। किसी प्रकार की अंगूठी से आपका दुख नष्ट हो जाएगा ये सही नहीं है। किसी भी धातु में तुम्हारे दुख को दूर करने की सामर्थ्य नहीं है। ये बात पक्की है समझ लो। प्रारब्ध भोग भोगना ही होता है। अगर कुछ कट सकता है तो वो सिर्फ भगवान काट सकते हैं।





