पूरी तरह से जल जाए दीए की बाती तो क्या है इसका मतलब? जान लें कौन सा संकेत होता है सबसे अशुभ

Feb 13, 2026 03:00 pm ISTGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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क्या आपको पता है कि घर के मंदिर में जलने वाला दीया कई तरह के संकेत देता है। नीचे विस्तार से जानें कि इनके क्या-क्या मतलब है। साथ ही जानें कि कौन सा संकेत सबसे शुभ होता है।

पूरी तरह से जल जाए दीए की बाती तो क्या है इसका मतलब? जान लें कौन सा संकेत होता है सबसे अशुभ

हिंदू धर्म में पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है। लोग नियमित रूप से घर के मंदिर में सुबह और शाम दीया जरूर जलाते हैं। वहीं कुछ लोग घर की चौखट और तुलसी के पास भी रोज दीया जलाते हैं। मान्यता के अनुसार जिस घर में नियमित रूप से दीया जलाया जाता है तो वहां पर नेगेटिव एनर्जी कभी नहीं आती है। क्या आपने कभी ध्यान से देखा है कि दीए की स्थिति जलने के बाद कैसी है। बता दें कि घर के मंदिर में रखा हुआ दीया भी आपकी जिंदगी में आने वाले बदलाव का संकेत देता है। आम तौर पर ऐसा देखा जाता है कि कई बार दीए में तेल रहते हुए भी वो बीच में ही बुझ जाता है। तो कई बार दीए की बाती पूरी तरह से जल जाती है। इन चीजों से हमें कोई ना कोई संकेत जरूर मिलता है। आज बात करेंगे कि अगर बाती पूरी तरह से जल जाए तो इसके क्या मायने होते हैं?

जानें बाती और दिए से जुड़े कुछ संकेत

1. अगर दीए की बाती पूरी तरह से जल जाती है तो कई लोग इसे शुभ नहीं मानते हैं। लोग ये भ्रम पाल लेते हैं कि अगर बाती पूरी जल गई है तो ये अच्छा संकेत नहीं है। हालांकि ऐसा नहीं है। अगर आपने कोई दीया जलाया है और उसकी बाती पूरी तरह से जलकर राख बन गई है तो इसे शुभ माना जाता है। मान्यता के हिसाब से ऐसा दीया और बाती संकेत देता है कि भगवान ने आपकी पूजा को दिल से स्वीकार किया है और वो आप पर अपनी कृपा जरूर बरसाएंगे। इससे ये भी संकेत मिलता है कि भगवान का हाथ आपके सिर पर हमेशा है और आपके रास्ते में अब कोई भी बाधा नहीं आने वाली है।

2. अगर आपके दीए की बाती जलने के बाद फूल जैसी बन गई है तो क्या कभी आपने सोचा है कि इसका मतलब क्या है? बता दें कि ऐसी बाती संकेत देती है कि आपकी पूजा सफल हुई है और आपकी श्रद्धा और आराधना से भगवान प्रसन्न हुए हैं। तो अगली बार अगर आपके दीए की बाती में ऐसा निशान बनता है तो खुद को लकी मानिए।

3. अगर आप घर में रोजाना दीया जलाते हैं तो आपको कुछ चीजों पर जरूर गौर करना चाहिए। सबसे पहले तो आपको दीए को हमेशा सही दिशा की ओर ही रखने की कोशिश करनी चाहिए। नियम के अनुसार दिए का मुख हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण की ओर होना चाहिए।

4. अगर पूजा के दौरान दीया बीच में ही बुझ जाए तो इसे अशुभ संकेत के तौर पर देखा जाता है। अगर दीया हवा या फिर किसी वस्तु के चलते बुझा है तो कोई दिक्कत नहीं है। अगर ये बिना वजह ही बुझ जाए तो तब इसे अशुभ माना जाएगा। हालांकि आपको ऐसी स्थिति में भी घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। अगर आपके साथ ऐसा होता है तो पूजा घर में एक बार गंगाजल छिड़क कर पूजा को दोबारा शुरू कर लें।

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो


गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।


परिचय और अनुभव

गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पिछले 8 महीनों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।


करियर

गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।


एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच

गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।


व्यक्तिगत रुचियां

काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।


विशेषज्ञता

वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई, डेली और वीकली राशिफल

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