Hindi Newsधर्म न्यूज़प्रवचनThe one who overcomes anger and hatred is a true hero

क्रोध और घृणा को जीतने वाला ही सच्चा नायक है

Anger and hero: कष्टकारी या नकारात्मक भाव अनेक तरह के होते हैं, जैसे अहंकार, घमंड, ईर्ष्या, इच्छा, वासना, संकुचित विचारधारा आदि। परंतु इनमें क्रोध और घृणा को सबसे बुरा माना गया है

Anuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीTue, 30 Jan 2024 06:47 AM
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Anger: कष्टकारी या नकारात्मक भाव अनेक तरह के होते हैं, जैसे अहंकार, घमंड, ईर्ष्या, इच्छा, वासना, संकुचित विचारधारा आदि। परंतु इनमें क्रोध और घृणा को सबसे बुरा माना गया है क्योंकि करुणा एवं परोपकार के विकास में ये सबसे बड़ी बाधाएं हैं और ये व्यक्ति के समस्त गुणों और उसकी मानसिक शांति को नष्ट कर देते हैं।

क्रोध की बात करें तो यह दो तरह का होता है। एक प्रकार का क्रोध सकारात्मक होता है। यह मुख्य रूप से व्यक्ति की प्रेरणावश उत्पन्न होता है। करुणा या उत्तरदायित्व के भाव से प्रेरित होकर क्रोध पैदा हो सकता है। करुणा से प्रेरित होकर उत्पन्न हुआ क्रोध किसी सकारात्मक कार्य के लिए संवेग या उत्प्रेरक बन सकता है। ऐसे में, क्रोध जैसा भाव त्वरित कार्य को बल देता है। इससे ऐसी ऊर्जा पैदा होती है, जो व्यक्ति को जल्दी और निर्णायक ढंग से कार्य करने में मदद करती है। यह प्रेरणा का शक्तिशाली स्रोत बन सकता है। इसलिए, कभी-कभी क्रोध सकारात्मक होता है। हालांकि, अधिकतर मामलों में इस तरह का क्रोध संरक्षक बनकर अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करता है। यह ऊर्जा दिशाहीन होती है, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि वह ऊर्जा अंत में रचनात्मक होगी अथवा विनाशकारी।

कुछ परिस्थितियों में क्रोध सकारात्मक हो सकता है, किंतु आमतौर पर क्रोध से दुर्भावना और घृणा ही पैदा होती है। जहां तक घृणा का प्रश्न है, यह कभी सकारात्मक नहीं हो सकती। इसका कोई लाभ नहीं होता। यह हमेशा पूरी तरह नकारात्मक होती है।

हम क्रोध और घृणा को सिर्फ दबा देने से समाप्त नहीं कर सकते। हमें घृणा के प्रतिकार— धैर्य एवं सहनशीलता को सक्रिय रूप से विकसित करना पड़ेगा। पहले हमने जिस मॉडल की चर्चा की थी, उसके अंतर्गत धैर्य तथा सहनशीलता को सफलतापूर्वक विकसित करने के लिए उत्साह एवं उसे पाने की तीव्र इच्छा की आवश्यकता होती है। आप में उत्साह जितना अधिक होगा, इस दौरान आने वाली परेशानियों को सहने की क्षमता उतनी ही अधिक होगी। जब आप धैर्य व सहनशीलता का अभ्यास करते हैं, तो असल में आप क्रोध एवं घृणा के विरुद्ध लड़ रहे होते हैं। चूंकि यह लड़ाई है, इसलिए आप जीतना चाहते हैं, लेकिन आपको इसमें पराजय के लिए भी तैयार रहना चाहिए। इस लड़ाई के दौरान अपको यह नहीं भूलना चाहिए कि आपको इस बीच अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आपके अंदर इन परेशानियों को झेलने की क्षमता होनी चाहिए। इस कठिन प्रक्रिया के दौरान जो व्यक्ति क्रोध और घृणा पर विजय पा लेता है, वही सच्चा नायक है।

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