
देवउठनी एकादशी पर इस बार सूर्य के कारण नहीं होगीं शादियां, जानें क्या है तुला संक्राति विवाह दोष
Devuthani ekadashi Vivah: देवउठनी एकादशी के बाद भी इस बार बैंड बाजा बारात के लिए इंतजार करना पड़ेगा। दरअसल शादी विवाह के लिए एकादशी पर कोई मुहूर्त नहीं है। इसके बाद 16 नवंबर से शादी के मुहूर्त होंगे।
देवउठनी एकादशी के बाद भी इस बार बैंड बाजा बारात के लिए इंतजार करना पड़ेगा। दरअसल शादी विवाह के लिए तुला राशि का सूर्य होना अनिवार्य है। अभी सूर्य कन्या राशि में हैं। 16 नवंबर को सूर्य तुला राशि में आएंगे, जिसके कारण 16 नवंबर से विवाह के मुहूर्त बन रहे हैं। ज्योतिष अनुसार सूर्य के तुला में पहुंचने से पहले अगर विवाह किया जाता है, तो यह ठीक नहीं है। इसे तुला संक्राति दोष कहते हैं। जब सूर्य तुला में आएंगे तो यह दोष मुक्त हो जाएगा और विवाह शुरू हो जाएंगे। के चलते बीस नवम्बर तक विवाह के लिए शुभ मुहुर्त नहीं है। शुक्र अस्त के चलते शादियों के लिए शुभ मुहुर्त नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में 21 नवम्बर से शादियों की शुरुआत होगी। शुभ मुहुर्त छह दिसंबर तक रहेंगे। आचार्य सुरेंद्रनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवोत्थ्नी एकादशी और प्रबोधनि एकादशीभी कहते हैं।कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि एक नवम्बर को सुबह नौ बजकर 11 मिनट से शुरू होगी।
दो नवम्बर को सुबह सात बजकर 31 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार इस वर्ष देवउठनी एकादशी का व्रत एक नवम्बर को रखा जाएगा। इस दिन चर्तुमास समाप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु मां लक्ष्मी, और तुलसी की विशेष पूजा व व्रत किया जाता है। दो नवम्बर को तुलसी जी का विवाह शालिग्राम से होगा। देव उठनी एकादशी पर व्रती स्त्रियां सुबह स्नानदि से निवृत होकर आंगन में भगवान विष्णु के चरणों को कलात्मक रूप से अंकित करती हैं। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता ळै।देवउठनी एकादशी के दिन दान पुण्य करने से व्यक्ति के घर में शुभता का आगमन होता है। उन्होने बताया कि आठ जून के बाद विवाह मुंडन जनेऊ धारण और गृह प्रवेश आदि के मांगलिक कार्य रुके हुए थे। जो प्राय: देवउठनी एकादशीके बाद प्रारंभ होते हैं। देवउठनी एकादशी एक नवम्बर को है।
कब है विवाह मुहूर्त
16 नवम्बर तक तुला संक्राति दोष के चलते विवाह के मुहुर्त 21 नवम्बर से शुरू होंगे। - इस वर्ष विवाह के लिए ये रहेंगे मुहुर्त नवम्बर माह में 21, 22, 23,24, 25, 26, दिसंबर में एक, चार, पांच, छह रहेंगै। इसके बाद फरवरी में पांच, छह, आठ, दस, 12 व अप्रैल 15,20, 21,25, 26, 27, 28, 29 अप्रैल रहेंगे। मई में एक, तीन, पांच, छह, सात, आठ, 13, 14, जून माह में 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27,28, 29 शुभ लग्न रहेगा। जुलाई में एक, छह, सात, 11, व 12 नवम्बर में 21, 24, 25, 26, दिसंबर माह में दो, तीन, चार, पांच, छह दिसंबर में विवाह के शुभ लग्न होंगे।





