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दे‌वउठनी एकादशी: इस विधि से जगाएं देवों को, जानें मंत्र और गाएं उठो देव, जागो देव

दे‌वउठनी एकादशी: इस विधि से जगाएं देवों को, जानें मंत्र और गाएं उठो देव, जागो देव

संक्षेप:

Utho Dev Jao Dev lokgeet: कार्तिक मास की एकादशी को दे‌वउठनी या प्रबोधिनी एकादशी कहते है, इस दिन देवों यानी श्रीहरि को जगाया जाता है। देवों को जगाने के लिए फल, सिंघाड़े, गन्ना, आलू, मूली, तिल, आदि चीजें भगवान को अर्पित की जाती है।

Sat, 1 Nov 2025 07:38 AMAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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कार्तिक मास की एकादशी को दे‌वउठनी या प्रबोधिनी एकादशी कहते है, इस दिन देवों यानी श्रीहरि को जगाया जाता है। देवों को जगाने के लिए फल, सिंघाड़े, गन्ना, आलू, मूली, तिल, आदि चीजें भगवान को अर्पित की जाती है। जिससे देव जागें और संसार में मंगल करें। वैसे तो कार्तिक मास में हर दिन ओम नमो नारायणाय मंत्र का जाप करना चाहिए। लेकिन अगर आप पूरे महीने इस मंत्र को ना पढ़ पाएं तो कम से कम देवउठनी एकादशी के दिन इस मंत्र से श्रीहरि की आराधना करें। इस दिन श्रीहरि की पूजा से व्यक्ति सभी प्रकार के दुखों से छूट जाता है औ रोग-शोक से रहित वेकुण्ठ धाम को जाता है। कार्तिक मास में विष्णुसहस्रनाम का पाठ भी करना चाहिए। एकादशी के दिन से भगवान क्षीर सागर में क्षयन करते हैं और सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं। इसके बाद कार्तिक शुक्ला देवउठनी एकादशी पर श्रीहरि को जगाते हैं।

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दे‌वउठनी एकादशी पर देवों को कैसे जगाएं और क्या गाएं
इस दिन मंत्रों के साथ भगवान विष्णु को जगाना चाहिए। प्रार्थना करनी चाहिए- हे गोविन्द । उठिए, उठिए हे कमलाकान्त! निद्रा का त्याग कर तीनों लोगों का मंगल करें। ऐसा कहकर सुबह के समय शंख ओर नगाड़े आदि बजाकर मधुर ध्वनि के साथ श्री विष्णु को उठाकर उनकी पूजा करें। देवों को जगाने के लिए फल, सिंघाड़े, गन्ना, आलू, मूली, तिल, आदि चीजें अर्पित करें। इसके बाद दीपक जलाकर थाली बजाकर देवों को जगाया जाता है। देवों को जगाने की परंपरा हर जगह अलग-अलग है, इसके लिए आंगन में गन्ने का मंडप बनाया जाता है और सुंदर अल्पना से रंगोली बनाते हैं। इस दौरान कई तरह के पारंपरिक गीत भी गाते हैं।-जैसे

उठो देव, बैठो देव,पाटकली चटकाओ देव।

सबके काज संवारों देव

आषाढ़ में सोए देव,कार्तिक में जागो देव।

कोरा कलशा मीठा पानी, उठो देव पियो पानी।

हाथ पैर फटकारो देव,अंगुलिया चटकाओ देव।

क्वारों के व्याह कराओ देव,व्याहों के गौने कराओ देव।

तुम पर फूल चढ़ाए देव,घी का दिया जलाएं देव।

आओ देव पधारो देव,तुमको हम मनाएं देव।

जागो इस दुनिया के देव,गन्ने का भोग लगाओ देव।जागो उस दुनियां के देव,सिंघाड़े का भोग लगाओ देव।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey
अनुराधा पांडे लाइव हिन्दुस्तान में एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन लीड कर रही हैं। इन्हें पत्रकारिता जगत में करीब डेढ़ दशक का अनुभव है। ज्योतिष और धर्म-अध्यात्म से जुड़े विषयों पर पिछले 10 सालों से लिख रही हैं। इन्होंने हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा भारतीय जनसंचार संस्थान, दिल्ली और ग्रैजुएशन दिल्ली विश्वविद्यालय से किया है। लाइव हिन्दुस्तान में करियर का लंबा हिस्सा बीता और काम करते-करते 9 साल हो गए हैं। एस्ट्रोलॉजी और करियर से जुड़ी खबरों के अलावा हेल्थ पर लिखने शौक है। इससे पहले तीन साल तक आज तक वेबसाइट में एजुकेशन सेक्शन में भी काम किया है। और पढ़ें
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