
देवउठनी एकादशी 1 नवंबर को, शाम से पहले देवों को उठाएं, गन्ना पूजन करें और करें तुलसी विवाह
संक्षेप: Devuthani ekadashi date and time: पौराणिक ग्रंथो में कार्तिक मास का महत्व अनंत बताया गया है। कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी को वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशी माना गया है क्योंकि इस दिन ही श्री हरि विष्णु को पूर्ण विधि विधान के साथ योग्य निद्रा से जगाया जाता है।
पौराणिक ग्रंथो में कार्तिक मास का महत्व अनंत बताया गया है। कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी को वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एवं परम पुण्य दायक एकादशी माना गया है क्योंकि इस दिन ही जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु को पूर्ण विधि विधान के साथ योग्य निद्रा से जगाया जाता है। नारद पुराण में कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी का महत्व बहुत ही पुण्यकारी एवं सुंदर बताया गया है । कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी को प्रबोधनी एकादशी एवं देवोत्थानी एकादशी भी कहते हैं । इस दिन उपवास करके चीर निद्रा में सोए हुए भगवान श्री हरि विष्णु को गीत, भजन, मधुर संगीत आदि मांगलिक उत्सव द्वारा जगाये जाने की परंपरा है । उस दिन ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद के विविध मंत्रों के पाठ तथा नाना प्रकार की विधियों के द्वारा भगवान श्री हरि विष्णु को जगाना परम पुण्य दायक माना जाता है । द्राक्षा, ईख, अनार, केला, सिंघाड़ा आदि वस्तुएं भगवान को अर्पित करनी चाहिए। तत्पश्चात रात बीतने पर दूसरे दिन सवेरे स्नान और नित्य कर्म से निवृत्त होकर पुरुष सूक्त के मंत्रों द्वारा भगवान गदा दामोदर की षोडशोपचार पूजा करनी चाहिए। फिर ब्राह्मणों को भोजन करा कर उन्हें दक्षिणा से संतुष्ट करके विदा करें । इसके बाद आचार्य से आशीर्वाद ग्रहण करना चाहिए । इस प्रकार जो भक्ति और आदर पूर्वक प्रबोधिनी एकादशी का व्रत करता है। उसे परम पुण्य एवं अक्षय वैभव की प्राप्ति होती है तथा वह इस लोक में श्रेष्ठ भोगों का उपभोग करते हुए अंत में वैष्णो पद को प्राप्त करता है।

देवउठनी एकादशी के बाद कब से मिलेंगे शुभ मुहूर्त
प्रत्येक वर्ष सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्णु जी आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि जिसे हरिशयनी एकादशी भी कहा जाता है, श्री हरि विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। परिणाम स्वरूप विवाह आदि के लिए शुभ योगों एवं मुहूर्तो का अभाव हो जाता है। तब से लेकर के प्रबोधिनी एकादशी अर्थात कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 1 दिन शनिवार तक विवाह आदि के लिए शुभ मुहूर्त समाप्त हो गए थे। अब प्रबोधिनी एकादशी के बाद से विवाह आदि के लिए शुभ मुहूर्त मिलने आरंभ हो जाएंगे।
देवउठनी एकादशी कब मनाई जाएगी
प्रबोधिनी एकादशी व्रत का मन सबके लिए 1 नवंबर दिन शनिवार को होगा। 1 नवंबर एकादशी के दिन संपूर्ण विश्व के पालन करता श्री हरि विष्णु जी काव्य दिवस पूजन अर्चन करके योग्य निद्रा से जगाया जाएगा। काशी महावीर पंचांग के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि का आरंभ 31 अक्टूबर दिन शुक्रवार को रात में 4:02 बजे से आरंभ होगा जो 1 नवंबर दिन शनिवार को रात में 2:57 बजे तक व्याप्त रहेगा। इस कारण से उदयकालिक स्थिति में एकादशी तिथि 1 नवंबर दिन शनिवार को प्राप्त हो रही है। इस कारण से 1 नवंबर को ही प्रबोधिनी एकादशी का व्रत किया जाएगा।
कब देवों को उठाएं और तुलसी विवाह कब करें
भद्रा दिन में 3:30 बजे से पहले गन्ने का पूजन करके उसका सेवन कर लिया जाएगा। इस वर्ष देवोत्थानी एकादशी अर्थात श्री हरि प्रबोधिनी को दिन में 3:30 बजे के बाद से लेकर रात में 2:57 तक मृत्यु लोक की भद्रा रहेगी। इस कारण से भद्रा आरंभ होने के पूर्व ही सभी प्रकार के विधि विधान पूर्ण किया कर लिए जाएंगे क्योंकि मृत्य लोक की भद्रा अशुभ फल प्रदायक होती है। अतः भद्रा आरम्भ होने के पूर्व एवं समाप्ति के बाद ही कोई भी विधि विधान अथवा तुलसी शालिग्राम विवाह उत्सव मनाया जाएगा। परंपरागत रूप से तुलसी शालिग्राम का विवाह उत्सव भी इसी दिन मनाया जाएगा तथा इसका क्रम पूर्णिमा तक चलता रहेगा । इस दिन तुलसी शालिग्राम का विवाह करने की अनंत काल से परंपरा है और इस विवाह का शास्त्रों में बहुत ही बड़ा महत्व बताया गया है। कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि के आरंभ होते ही चातुर्मास का व्रत समाप्त हो जाएगा। एकादशी तिथि में अयोध्या नगरी की अंतरगृही परिक्रमा भी की जाएगी।





