
देवउठनी एकादशी से 5 दिन तक भीष्म पंचक, स्नान, दीपदान और व्रत से मिलेगा पूरे कार्तिक का फल
कार्तिक माह के आखिर के पांच दिन बहुत पुण्यदायक माने जाते हैं, जो लोग पूरे महीने कार्तिक स्नान नहीं कर सकते हैं, वो इन पांच दिनों में व्रत और स्नान कर कार्तिक स्नान का फल पा लेते हैं। इस साल भीष्म पंचक देवउठनी एकादशी पर शनिवार से शुरू हो रहे हैं।
कार्तिक माह के आखिर के पांच दिन बहुत पुण्यदायक माने जाते हैं, जो लोग पूरे महीने कार्तिक स्नान नहीं कर सकते हैं, वो इन पांच दिनों में व्रत और स्नान कर कार्तिक स्नान का फल पा लेते हैं। इस साल भीष्म पंचक देवउठनी एकादशी पर शनिवार से शुरू हो रहे हैं। इस दिन से देव दीपावली तक महिलाएं पांच दिन तक व्रत रखेंगी। मान्यता है कि इन पांच दिनों में तारों की छांव में स्नान करने और व्रत रखने से पूरे कार्तिक स्नान का पुण्य मिलता है। इन पांच दिनों में स्नान करना इसलिए उत्तम मानते हैं कि भगवान का स्नान करके उनकी पूजा करें और फिर दीपदान करें। इन पांच दिनों में मानसिक और शारीरिक शुद्धता के साथ भगवान का ध्यान करना चाहिए। ब्रह्यचर्य का पालन करें। ऐसा कहा जाता है कि जो इन व्रतों को करता है, उसके सभी पापों का नाश होता है। अतः मनुष्यों को इन पांच दिनों में जरूर व्रत करना चाहिए।

इस व्रत में भीष्मजी के लिए भी जलदान ओर दीपदान किया जाता है। इस दिन श्रीहरि का पंचगव्य, चन्दन के जल, चन्दन, और कुमकुम से पूजन करें। भगवान को धूप, फल फूल अर्पत करें। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान के आगे 5 दिन तक दीप जलाएं। शाम के समय को रोज कार्तिकशुक्ल एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक भीष्म पंचक के दिन भगवान का कीर्तन करें। कार्तिक शुक्ल एकादशी को जहां देव उठेंगे वहीं शाम को मंदिरों में तुलसी और शालिगराम जी का विवाह होगा। तुलसी-शालिगरामजी के विवाह के बाद वैकुंठ चतुर्दशी और फिर देव दिवाली मनाई जाएगी। पूर्णिमा को कार्तिक स्नान पूर्ण होगा। इसके बाद किसी ब्राह्मण को भोजन कराकर कपड़े दान करें और दक्षिणा दें।
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