Devshayani Ekadashi Vrat Katha: देवशयनी एकादशी की व्रत कथा पढ़ें, फिर करें ये 5 काम, बरसेगी भगवान विष्णु की कृपा
देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने और चातुर्मास की शुरुआत की मान्यता है। इस दिन व्रत, पूजा और व्रत कथा का विशेष महत्व माना जाता है। कथा के अनुसार, राजा मान्धाता ने देवशयनी एकादशी का व्रत रखकर भगवान विष्णु की कृपा से अपने राज्य को अकाल से मुक्ति दिलाई थी।

Devshayani Ekadashi Vrat Katha: आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और यहीं से चातुर्मास की शुरुआत होती है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं तथा व्रत कथा का पाठ करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और नियम के साथ किया गया यह व्रत सुख-समृद्धि और पुण्य प्रदान करता है। आइए जानते हैं देवशयनी एकादशी की व्रत कथा और कथा पढ़ने के बाद कौन से पांच काम करना शुभ माना जाता है।
देवशयनी एकादशी व्रत कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन समय में सूर्यवंश के राजा मान्धाता अपने न्यायप्रिय स्वभाव और धर्म पालन के लिए प्रसिद्ध थे। उनके राज्य में सभी लोग सुखी और संपन्न थे। एक समय ऐसा आया जब लगातार कई वर्षों तक वर्षा नहीं हुई। खेत सूख गए, नदियां और तालाब खाली होने लगे। अकाल के कारण पूरी प्रजा परेशान हो गई।
राजा मान्धाता अपनी प्रजा का दुख देखकर चिंतित हुए। समाधान की तलाश में वे महर्षि अंगिरा के आश्रम पहुंचे और उनसे इस संकट को दूर करने का उपाय पूछा। महर्षि अंगिरा ने राजा से कहा कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी का विधि-विधान से व्रत करें और भगवान विष्णु की आराधना करें। उन्होंने बताया कि इस व्रत के प्रभाव से भगवान विष्णु प्रसन्न होंगे और राज्य का संकट समाप्त हो जाएगा।
राजा मान्धाता ने ऋषि के बताए अनुसार पूरी श्रद्धा से देवशयनी एकादशी का व्रत रखा। प्रजा ने भी उनके साथ भगवान विष्णु की पूजा और भक्ति की। व्रत के प्रभाव से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए। कुछ ही समय बाद अच्छी वर्षा हुई, अकाल समाप्त हो गया और राज्य में फिर से सुख-समृद्धि लौट आई। तभी से यह मान्यता प्रचलित है कि देवशयनी एकादशी का व्रत, पूजा और कथा का श्रवण करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की परेशानियां दूर होने लगती हैं।
व्रत कथा पढ़ने के बाद जरूर करें ये 5 काम
1. भगवान विष्णु की आरती करें
व्रत कथा समाप्त होने के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। इसके बाद प्रसाद परिवार के सभी लोगों में बांटें। इससे पूजा पूर्ण मानी जाती है।
2. तुलसी माता की पूजा करें
भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। कथा के बाद तुलसी को जल अर्पित करें, घी का दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है।
3. दान-पुण्य करें
देवशयनी एकादशी पर अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, फल या जरूरतमंद लोगों को दान दें। शास्त्रों में इस दिन किए गए दान का विशेष महत्व बताया गया है।
4. भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें
कथा के बाद कुछ समय तक 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'ॐ नमो नारायणाय' मंत्र का जाप करें। मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और मन को शांति मिलती है।
5. सात्विक भोजन और संयम रखें
यदि आपने व्रत रखा है तो पारण के समय सात्विक भोजन करें। इस दिन क्रोध, विवाद और तामसिक भोजन से बचना शुभ माना जाता है। संयम और श्रद्धा के साथ किया गया व्रत अधिक फलदायी माना जाता है।
धार्मिक मान्यता
मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। इन चार महीनों में पूजा, जप, तप, दान और भक्ति का विशेष महत्व माना गया है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित कथाओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में पूजा-विधि तथा कथा के विवरण में कुछ अंतर हो सकता है।


