देवशयनी एकादशी से गुरु पूर्णिमा, इस वीक 22 जुलाई से 29 जुलाई 2026 तक के व्रत और पर्व
weekly panchang: इस वीक देवशयनी एकादशी से गुरु पूर्णिमा से तक आने वाले एक वीक में कौन से व्रत और त्योहार,

weekly panchang: इस वीक देवशयनी एकादशी से गुरु पूर्णिमा तक यह वीक कई व्रत और त्योहार लेकर आ रहा है। साथ ही 25 जुलाई से चार महीना का व्रत और नियम का महीना भी शुरू हो जाएगा। इस महीने में तप, जप और दान किया जाता है। इस वीक एकादशी, प्रदोष व्रत और गुरु पूर्णिमा पर पर्व मनाया जाएगा। आइए पढ़ें इस वीक कौन से व्रत रखे जाएंगे और कौन सा पर्व मनाया जाएगा।
22 जुलाई (बुधवार) : आषाढ़ शुक्ल नवमी तिथि (दिन-रात)। भढली नवमी, भढ़ली नवमी ऐसा दिन है जो अनसूझा मुहूर्त है, इस दिन विवाह आदि बिना महूर्त के हो जाते हैं। इसके साथ ही गुप्त नवरात्र की नवमी भी इस दिन है। इस दिन से गुप्त नवरात्रि खत्म हो जाएंगे।
23 जुलाई (गुरुवार) : आषाढ़ शुक्ल नवमी तिथि प्रातः 07.04 मिनट तक रहेगी। शक श्रावण प्रारंभ।
24 जुलाई (शुक्रवार) : आषाढ़ शुक्ल दशमी तिथि प्रातः 09.13 मिनट तक। भद्रा रात्रि 10.24 मिनट से। गंडमूल रात्रि 04.37 मिनट से तक रहेगा।
25 जुलाई (शनिवार) : आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि प्रातः 11.35 मिनट तक। भद्रा प्रातः 11.35 मिनट तक। हरिशयनी एकादशी व्रत। श्री विष्णु शयनोत्सव। इस दिन हरिशयनी एकादशी है, इस दिन से देव सो जाते हैं और श्रीहरि क्षीर सागर में निद्रा में जाते हैं। इस दिन विवाह आदि के मुहूर्त भी बंद हो जाते हैं। इस दिन चातुर्मास्य व्रत नियमादि प्रारंभ हो जाते हैं। आने वाले चारमहीने के लिए सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव के हाथों में होगा। 30 जुलाई से सावन का महीना शुरू होगा। इसके बाद सावन की पूर्णिमा में रक्षा बंधन का पर्व भी मनाया जाएगा। 25 जुलाई को गंडमूल विचार भी किया जाना चाहिए।
26 जुलाई (रविवार) : आषाढ़ शुक्ल द्वादशी तिथि दोपहर 01.58 मिनट तक पश्चात त्रयोदशी तिथि। प्रदोष व्रत है, इस दिन सुबह एकादशीव्रत का पारण किया जाएगा। जो लोग प्रदोष व्रत रखते हैं वो शाम के समय प्रदोष व्रत करेंगे । इस दिन गंडमूल विचार भी है।
27 जुलाई (सोमवार) : आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी तिथि सायं 04.15 मिनट तक पश्चात चतुर्दशी तिथि है। गंडमूल प्रातः 10.29 मिनट तक।
28 जुलाई को उदयातिथि में चतुर्दशी तिथि है, इस दिन पूर्णिमा भी शाम को लग जाएगी। सत्यनारायण व्रत 28जुलाई को किया जा सकता है।
29 जुलाई को आषाढ़ मास की पूर्णिमा है। आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा भी कहते हैं क्योंकि इस दिन वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। इस दिन गुरु को सम्मान देने का दिन है।


