Devshayani Ekadashi Bhog: भगवान विष्णु को जरूर लगाएं इन 4 चीजों का भोग, पूरी होगी हर मनोकामना

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देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु उनकी ये 4 सबसे ज्यादा प्रिय चीजों का भोग लगाना शुभ माना जाता है। जानें श्रीहरि को प्रसन्न करने वाले खास भोग और तुलसी से जुड़े जरूरी नियम जिससे आपकी सारी मनोकामना पूरी हो सकती है।

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देवशयनी एकादशी भोग

25 जुलाई को देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। मान्यता है कि इसी दिन से भगवान विष्णु अगले चार महीने के लिए योगनिद्रा में जाते हैं और तभी से चातुर्मास भी लगता है। इसी वजह से देवशयनी एकादशी को साल की सबसे बड़ी एकादशी में से एक माना जाता है। अगर आप इसका व्रत रखने वाले हैं और विष्णु पूजा करने वाले हैं तो उनकी प्रिय चीजों का भोग जरूर लगाएं। माना जाता है कि अगर सच्चे मन से ये भोग लगाए जाए तो भगवान प्रसन्न होकर सारी मनोकामनाएं पूरी करते हैं और अपना आशीर्वाद देते हैं।

देवशयनी एकादशी पर लगाएं इन चार चीजों का भोग-

1. केसर का हलवा

भगवान विष्णु को पीला रंग बहुत ही प्रिय है। ऐसे में माना जाता है कि केसर का हलवा उनके भोग में शामिल करना शुभ होता है। आप चाहे तो बेसन का हलवा भी बना सकते हैं। इस भोग को शुद्ध देसी घी में ही बनाएं। मान्यता है कि इस भोग को अर्पित करने से करियर और बिजनेस में आने वाली बाधाएं धीरे-धीरे खत्म होने लगती हैं। साथ ही तरक्की के नए-नए रास्ते भी खुलते हैं।

2. पंचामृत तुलसी के साथ

भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी को शामिल करना जरूरी है। तुलसी उन्हें सबसे प्रिय है। इसी वजह से पंचामृत बनाते समय तुलसी का पत्ता जरूर डालें। पंचामृत के लिए दूध-दही, शहद, घी और मिश्री का इस्तेमाल करें। इसमें तुलसी मिलाएं और भगवान को अर्पित करें। धार्मिक मान्यता है कि विष्णु भगवान को पंचामृत चढ़ाने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और घर के सभी सदस्यों पर भगवान की कृपा रहती है।

3. विष्णु जी को अर्पित करें पीले फल

देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु को पीले फल जरूर अर्पित करें। आप केले और आम के अलावा बाकी कोई भी पीला फल अर्पित कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान को फल अर्पित करने से आर्थिक स्थिति सुधरती है और जो भी दिक्कत होती है वो धीरे-धीरे दूर होती जाती है। इन फलों को पूजा के बाद परिवार के सभी सदस्यों में बांट दें क्योंकि ये शुभ माना जाता है।

4. मखाने की खीर

भगवान विष्णु के भोग में मखाने की खीर को रखना बहुत ही शुभ माना जाता है। हरी इलायची और मेवे के साथ इस खीर को बना सकते हैं। जब भी इस खीर का भोग लगाएं तो इसके साथ तुलसी दल रखना ना भूलें क्योंकि इसके बिना विष्णु पूजा अधूरी मानी जाती है। माना जाता है कि इस भोग से घर में बरकत आती है क्योंकि इसे मां लक्ष्मी का भी प्रिय माना जाता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

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