देवशयनी एकादशी पर कैसी रहेगी ग्रहों की स्थिति, गुरु उच्च के और सूर्य कर्क में

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kab hai Devshayani ekadashi: कब से सो जाएंगे देव, देवशयनी एकादशी पर कैसी रहेगी ग्रहों की स्थिति। यहां पढ़ें तारीख और महत्व

Lord Vishnu, देवशयनी एकादशी
देवशयनी एकादशी

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं। इस दिन से देव सो जाते हैं और अगले चार महीने के लिए विष्णुजी क्षीर सागर में निंद्रा के लिए जाते हैं। कार्तिक मास तक श्रीहरि पाताल लोक में रहेंगे। इस समय भगवान शिव के हाथों में सृष्टि की कमान रहेगी। इस साल देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को रहेगी। इसके बाद से चतुर्मास लग जाएंगे। इस समय में भगवान के लिए जप तप और साधना की जाती है। इस एकादशी पर शंख, चक्र ओर गदा धारण करनेवाठे भगवान्‌ विष्णुकी भक्तिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। यहां पढ़ें कि इस एकादशी पर ग्रहों का क्या योग है, इस एकादशी का क्या महत्व है और इस एकादशी पर सोए देव कब जागेंगे।

कैसा बन रहा है ग्रहों का योग

इस साल देवशयनी एकादशी पर ग्रहों का नक्षत्रों का बहुत उत्तम योग बन रहा है। गुरु इस समय कर्क राशि में उच्च के हैं, वहीं सूर्य भी इस समय चंद्रमा की राशि कर्क में हैं। ग्रहों में राहु कुंभ राशि में हैं और शनि मीन राशि में। शुक्र सिंह राशि में और केतु भी सिंह राशि में हैं। बुध अपनी स्वराशि मिथुन में रहेंगे। इस प्रकार ग्रहों का उत्तम योग है। गुरु अभी अस्त है, इसलिए विवाह आदि के शुभ मुहूर्त अभी नहीं हैं। अब सभी शुभ मुहूर्त कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी से आएंगे। इस एकादशी से ग्रह प्रवेश और किसी भी शुभ कार्य अब नहीं कर पाएंगे। इसके लिए अब चार महीने का इंतजार करना होगा। कार्तिक मास से ही शुभ कार्य खोले जाएंगे।

देवशयनी एकादशी का महत्व

ऐसा कहा जाता है कि जो वह जातका इस एकादशी के व्रत को रखता है।, दीपदान, पलाश के पत्तेपर भोजन ओर व्रत करते हुए दिन बिताते हैं और रात को जमीन पर सोते हैं, वे श्रीहरि के धाम को जाते हैं। सावन में साग, भादो में दही खाते हैं और जो ब्रह्यचर्य का पालन करता है वह परम गति को प्राप्त करते हैं।

देवशयनी एकादशी पर सोए देव कब जागेंगे?

यह एकादशी स्वर्गं एवं मोक्ष प्रदान करने वाली, सब पापों को हरनेवाली एकादशी व्रत है । इसे हरिशयनी एकादशी भी कहते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस एकादशी पर श्रीहरि का एक स्वरूप राजा बलिक यहां रहता है ओर दूसरा क्षीरसागर में शेषनाग की शैय्या पर तबतक शयन करता है, जबतक कार्तिक की एकादशी नहीं आ जाती। इस तरह चार महीने का समय श्रीहरि की भक्ति में निकाले और एक समय भोजन करें। इससे भी श्रीहरि की कृपा मिलती हैं।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey

शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।


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