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Dev Uthani ekadashi Vrat katha: देवउठनी एकादशी पर पढ़ा जाता है प्रबोधिनी एकादशी का महात्मय और कथा

Dev Uthani ekadashi Vrat katha: देवउठनी एकादशी पर पढ़ा जाता है प्रबोधिनी एकादशी का महात्मय और कथा

संक्षेप:

Dev uthani ekadashi Katha kahani: नारदजी ने ब्रह्माजी से कहा कि कार्तिक शुक्ल पक्ष में कौन सी एकादशी आती है, जिसमें भगवान गोविन्द को जागते हैं। ब्रह्माजी बोले-मुनिश्रेष्ठ, उसे प्रबोधिनी एकादशी कहते हैं

Sat, 1 Nov 2025 07:41 AMAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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नारदजी ने ब्रह्माजी से कहा कि कार्तिक शुक्ल पक्ष में कौन सी एकादशी आतीहै, जिसमें भगवान गोविन्द को जागते हैं। ब्रह्माजी बोले-मुनिश्रेष्ठ, उसे प्रबोधिनी एकादशी कहते हैं। प्रबोधिनी एकादशी के दिन प्रबोधिनी एकादशी का महात्मय व्रत में जरूर पढ़ना चाहिए। इससे पापों का नाश होता है और पुण्य की वुद्धि होती है और व्यक्ति को मोक्ष मिलता है। इसे देवउठनी एकादशी भी कहते हैं, इस दिन अगर जो उपवास रखते हैं, उन्हें हजार अश्वमेध और100 यज्ञों का फल मिलता है। ब्राह्माजी कहते हैं- जो भी मनुष्य भक्तिपूर्वक उपवास करता है-एकादशी की कृपा से उसे सम्पत्ति, बुद्धि सब मिलता है।स्कंदपुराण में कहा गया है कि सम्पूर्ण तीर्थो में नहाकर और पृथ्वी दान करके जो फल पाते हैं, वो सिर्फ एकादशी के दिन श्रीहरि के जागरण करने से मिल जाता है। कार्तिक की हरिबोधिनी एकादशी पुत्र और पौत्र तो देती है, साथ ही ज्ञान है, वही योग, तपस्या और मोक्ष पाता है।

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इस एकादशी से मनुष्य को आत्मा का बोध होता है। जो इस दिन कथा सुनते हैं, उन्हें सात दीपों के दान का फल मिलता है। जो कथा वाचक की पूजा करते है, उन्हें भी उत्तम लोक मिलता है। कार्तिक मास में जो तुलसी से भगवान की पूजा करता है, वो दस हजार जन्मों के पाप क्षमा करा लेता है।जो कार्तिक में वृंदा का दर्शन करते हैं, वो एक हजार युग तक बैकुंठ में निवास करते हैं। जो तुलसी की जड़ में जल डालते हैं, वो निंसंतान नहीं रहते, उनका वंश फलता -फूलता है। जिस घर में तुलसी होती है, वहां सर्प नहीं आते है। जो तुलसी के पास श्रद्धा से दीप जलाते हैं, वो उनके ह्रदय में दिव्य चक्षु का प्रकाश होता है। जो शालिग्राम को चरणोदिक में तुलसी मिलाकर पीचे हैं, वो अकाल मृत्यु को नहीं पाते। उनकी व्याधियां नष्ट हो जाती हैं। उनका पुनर्जन्म नहीं होता। जो चतुर्मास में मौन धारण करते हैं, उन्हें सोने और तिल का दान करना चाहिए । जो कार्तिक मास में नमक का त्याग करते हैं, उन्हें शक्कर का दान करना चाहिए।एकादशी से पूर्णिमा तक दीपक जलाने से महापुण्य मिलता है। इस दिन नदी के तट पर दीप जलाने चाहिए। इस एकादशी पर का यह महात्मय सुनने से अनेक गौ दान के बराबर फल मिलता है।

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कथा-एक राजा के राज्य में सभी लोग एकादशी का व्रत रखते थे। एक दिन किसी दूसरे राज्य का एक व्यक्ति राजा के पास आकर बोला महाराज! कृपा करके मुझे नौकरी पर रख लें। तब राजा ने शर्त रखी कि ठीक है रख लेते हैं। लेकिन एकादशी पर तुम्हें अन्न नहीं मिलेगा। एकादशी के दिन जब उसे फलाहार का सामान दिया गया तो वह राजा के सामने गिड़गिड़ाने लगा। मैं भूखा ही मर जाऊंगा। मुझे अन्न दे दो। राजा ने उसे शर्त की बात याद दिलाई, पर वह अन्न छोड़ने को राजी नहीं हुआ, तब राजा ने उसे आटा-दाल-चावल आदि दिए। वह नित्य की तरह नदी पर पहुंचा और स्नान कर भोजन पकाने लगा। जब भोजन बन गया तो वह भगवान को बुलाने लगा, बोला भोजन तैयार है। उसके बुलाने पर पीतांबर धारण किए भगवान चतुर्भुज रूप में आ पहुंचे और प्रेम से उसके साथ भोजन करने लगे। भोजन करके भगवान अंतर्धान हो गए और वह अपने काम पर चला गया।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey
अनुराधा पांडे लाइव हिन्दुस्तान में एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन लीड कर रही हैं। इन्हें पत्रकारिता जगत में करीब डेढ़ दशक का अनुभव है। ज्योतिष और धर्म-अध्यात्म से जुड़े विषयों पर पिछले 10 सालों से लिख रही हैं। इन्होंने हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा भारतीय जनसंचार संस्थान, दिल्ली और ग्रैजुएशन दिल्ली विश्वविद्यालय से किया है। लाइव हिन्दुस्तान में करियर का लंबा हिस्सा बीता और काम करते-करते 9 साल हो गए हैं। एस्ट्रोलॉजी और करियर से जुड़ी खबरों के अलावा हेल्थ पर लिखने शौक है। इससे पहले तीन साल तक आज तक वेबसाइट में एजुकेशन सेक्शन में भी काम किया है। और पढ़ें
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