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देवउठनी एकादशी व्रत का पारण कब और कैसे किया जाएगा? जान लें मुहूर्त समेत 5 खास बातें

देवउठनी एकादशी व्रत का पारण कब और कैसे किया जाएगा? जान लें मुहूर्त समेत 5 खास बातें

संक्षेप:

Dev Uthani Ekadashi Vrat Paran Time: चार महीने बाद देवउठनी एकादशी को भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं। इस दिन से ही चातुर्मास समाप्त होता है और शुभ व मांगलिक कार्य प्रारंभ होते हैं। जानें इस बार देवउठनी एकादशी किस दिन है और कब किया जाएगा व्रत पारण।

Fri, 31 Oct 2025 09:48 AMSaumya Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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Dev uthani ekadashi Vrat Paran Timing: कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी व्रत किया जाता है। इसे देवोत्थान एकादशी या देव प्रबोधिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। देवउठनी एकादशी को भगवान विष्णु चार महीने बाद योग निद्रा से जागते हैं और सृष्टि का संचालन करते हैं। इस दिन ही विवाह, मुंडन व सगाई जैसे मांगलिक कार्य प्रारंभ होते हैं। देवउठनी एकादशी के दिन ही तुलसी विवाह कराया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के रूप भगवान शालिग्राम और माता तुलसी का विवाह कराने से कन्यादान के समान फल प्राप्त होता है। जानें इस बार देवउठनी एकादशी व्रत कब है और कब व्रत का पारण किया जाएगा।

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1. देवउठनी एकादशी कब है 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 01 नवंबर को सुबह 09:11 बजे प्रारंभ होगी और समापन 02 नवंबर को सुबह 07:31 मिनट पर होगा। उदया तिथि में देवउठनी एकादशी 1 नवंबर 2025 को मनाई जाएगी।

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2. देवउठनी एकादशी व्रत का पारण कब किया जाएगा: देवउठनी एकादशी व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद करने का विधान है। एकादशी व्रत समाप्त करने को व्रत पारण कहते हैं। देवउठनी एकादशी व्रत का पारण 2 नवंबर को किया जाएगा।

3. देवउठनी एकादशी व्रत पारण मुहूर्त 2025: 2 नवंबर को एकादशी व्रत पारण का शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 11 मिनट से दोपहर 03 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। पारण के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय दोपहर 12 बजकर 55 मिनट है।

4. हरि वासर के समय न करें एकादशी व्रत पारण: शास्त्रों के अनुसार, अगर द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाए, तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही होता है। द्वादशी तिथि के भीतर एकादशी व्रत का पारण न करना पाप करने के समान माना जाता है। कहते है कि एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिये। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि है।

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5. एकादशी व्रत पारण में क्या खाना चाहिए: एकादशी व्रत का पारण तुलसी दल या जल का सेवन करके करना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु को भोग लगाकर स्वयं भोजन करना चाहिए।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Saumya Tiwari

लेखक के बारे में

Saumya Tiwari
सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। यहां वह ज्योतिष और धर्म-अध्यात्म से जुड़ी खबरें देखती हैं। उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर की रहने वालीं सौम्या ने जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जर्नलिज्म में पीजी किया है। अपने करियर की शुरुआत हैदराबाद स्थित एक लोकल न्यूज पोर्टल से की और उसके बाद जनसत्ता, क्विंट हिंदी और जी न्यूज होते हुए पिछले चार सालों से लाइव हिन्दुस्तान में हैं। सौम्या पत्रकारिता जगत में पिछले सात सालों से कार्यरत हैं। नई जगहों पर घूमना, भजन सुनना और नए लोगों से जुड़ना बहुत पसंद है। बाकी वक्त बेटी के साथ सपने देखने में बीतता है। और पढ़ें
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