Dasha Mata Vrat 2026: 13 मार्च को रखा जाएगा दशा माता व्रत, जानें पूजा विधि, मुहूर्त और महत्व
सनातन परंपरा में चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को खास महत्व दिया गया है। इस दिन दशा माता व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत और पूजा से जीवन के कष्ट कम होते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है। इस साल दशा माता का व्रत 13 मार्च 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा।

सनातन परंपरा में चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को खास महत्व दिया गया है। इस दिन दशा माता व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत और पूजा से जीवन के कष्ट कम होते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है। खासतौर पर सुहागिन महिलाएं परिवार की खुशहाली और आर्थिक स्थिरता की कामना से यह व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार दशा माता की पूजा से व्यक्ति की खराब दशा में सुधार होता है और जीवन में आ रही परेशानियां धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।
दशा माता व्रत 13 मार्च 2026 को - पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि 13 मार्च 2026 को सुबह 6 बजकर 28 मिनट से शुरू होगी। यह तिथि पूरे दिन और रात तक रहेगी।उदयातिथि के आधार पर दशा माता का व्रत 13 मार्च 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा।
इस दिन कुछ शुभ मुहूर्त भी बन रहे हैं-
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:07 से 12:55 तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:30 से 3:18 तक
इन समयों में पूजा या शुभ कार्य करना अच्छा माना जाता है।
दशा माता पूजा विधि- दशा माता व्रत के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और पूजा का संकल्प लेती हैं। इसके बाद पूजा की तैयारी की जाती है। सबसे पहले कच्चे सूत का धागा लें और उसे हल्दी से रंग लें। इस धागे में 10 गांठें लगाई जाती हैं, जो दशा माता का प्रतीक मानी जाती हैं। इसके बाद पीपल के पेड़ के पास जाकर कच्चा सूत 10 बार लपेटते हुए परिक्रमा की जाती है।पूजा के बाद यह पवित्र धागा गले में धारण किया जाता है। व्रत के दौरान दशा माता की कथा सुनना या पढ़ना भी शुभ माना जाता है। कुछ लोग इस धागे को अगले दिन उतार देते हैं, जबकि कई लोग इसे पूरे साल पहनकर बाद में किसी पवित्र नदी में प्रवाहित करते हैं।
घर के द्वार पर लगाई जाती है हल्दी-रोली- पूजा पूरी होने के बाद महिलाएं अपने घर के मुख्य द्वार पर हल्दी और रोली से छापे लगाती हैं। इसे सुख-सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
दशा माता व्रत का धार्मिक महत्व- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दशा माता का व्रत जीवन की कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने का मार्ग दिखाता है। माना जाता है कि इस व्रत से-
- घर में सुख-शांति बनी रहती है।
- आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
- परिवार में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है।
- रुके हुए काम पूरे होने लगते हैं।
इसी वजह से कई जगहों पर महिलाएं हर साल श्रद्धा के साथ यह व्रत करती हैं और दशा माता से अपने परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Yogesh Joshiयोगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।
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