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Chhath Puja 2025 Date : छठ पूजा कब है? जानें नहाय-खाय, खरना, अर्घ्य की सही तिथि

Chhath Puja 2025 Date : छठ पूजा कब है? जानें नहाय-खाय, खरना, अर्घ्य की सही तिथि

संक्षेप: Chhath Puja 2025: हिन्दू पंचांग के अनुसार, छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से होती है और इसका समापन सप्तमी तिथि पर होता है। इस दौरान श्रद्धालु छठी मैय्या और सूर्य देव की पूजा करते हैं। इस साल छठ पूजा का पर्व 25 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 28 अक्टूबर 2025 को समाप्त होगा।

Fri, 24 Oct 2025 12:32 PMYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Chhath Puja 2025 Date: हिन्दू पंचांग के अनुसार, छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से होती है और इसका समापन सप्तमी तिथि पर होता है। इस दौरान श्रद्धालु छठी मैय्या और सूर्य देव की पूजा करते हैं। इस साल छठ पूजा का पर्व 25 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 28 अक्टूबर 2025 को समाप्त होगा। यह त्योहार दिवाली के बाद मनाया जाता है और मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। छठ पूजा का व्रत संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाता है। छठ पर्व की शुरुआत नहाय-खाय के साथ होती है। दूसरे दिन को खरना कहा जाता है, इस दिन पूरे दिन निर्जला उपवास रखा जाता है। तीसरे दिन संध्या अर्घ्य होता है। इस दिन डूबते हुए सूर्य देव को दूध और जल से अर्घ्य दिया जाता है। यह दिन छठ पर्व का सबसे भावनात्मक और भक्तिमय पल होता है, जब महिलाएं घाट पर परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी आयु की कामना करती हैं। चौथे दिन सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है, जिसे उषा अर्घ्य कहा जाता है। इस तरह चार दिन चलने वाला यह पर्व श्रद्धा, संयम और सूर्य भक्ति का प्रतीक है।

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छठ पूजा के चार दिन

पहला दिन – नहाय-खाय-25 अक्टूबर 2025

छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। नहाय खाय के दिन पूरे घर की साफ-सफाई की जाती है और स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इस दिन चना दाल, कद्दू की सब्जी और चावल का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। अगले दिन खरना से व्रत की शुरुआत होती है।

दूसरा दिन – खरना- 26 अक्टूबर

दूसरे दिन को लोहंडा या खरना कहा जाता है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ वाली खीर का प्रसाद बनाती हैं और फिर सूर्य देव की पूजा करने के बाद यह प्रसाद ग्रहण किया जाता है। इसके बाद व्रत का पारण छठ के समापन के बाद ही किया जाता है।

तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य- 27 अक्टूबर

तीसरे दिन सूर्य देव की पूजा होती है। डूबते हुए सूर्य को जल और दूध से अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन ठेकुआ, मौसमी फल और अन्य प्रसाद सूर्य देव को चढ़ाए जाते हैं। यह दिन बहुत ही विशेष माना जाता है और श्रद्धालु पूरी निष्ठा के साथ उपवास रखते हैं।

चौथा दिन – उषा अर्घ्य- 28 अक्टूबर

अंतिम दिन सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद कच्चा दूध और प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण किया जाता है। इस साल उषा अर्घ्य सूर्योदय के समय 6:30 बजे होगा।

छठ पूजा का महत्व और लाभ

संतान सुख: जिन परिवारों में संतान नहीं है या संतान संबंधी कोई समस्या है, उनके लिए यह व्रत बहुत फायदेमंद माना जाता है।

स्वास्थ्य लाभ: अगर किसी को कुष्ठ रोग या पाचन संबंधी समस्या है, तो यह व्रत रखने से लाभ होता है।

कुंडली में सूर्य दोष: यदि कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर है, तो छठ पूजा का व्रत रखने से सूर्य की स्थिति मजबूत होतू है।

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Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi
योगेश जोशी हिंदुस्तान डिजिटल में सीनियर कंटेंट प्रड्यूसर हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के मेहला गांव के रहने वाले हैं। पिछले छह सालों से पत्रकरिता कर रहे हैं। एनआरएआई स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेश से जर्नलिज्म में स्नातक किया और उसके बाद 'अमर उजाला डिजिटल' से अपने करियर की शुरुआत की, जहां धर्म और अध्यात्म सेक्शन में काम किया।लाइव हिंदुस्तान में ज्योतिष और धर्म- अध्यात्म से जुड़ी हुई खबरें कवर करते हैं। पिछले तीन सालों से हिंदुस्तान डिजिटल में कार्यरत हैं। अध्यात्म के साथ ही प्रकृति में गहरी रुचि है जिस कारण भारत के विभिन्न मंदिरों का भ्रमण करते रहते हैं। और पढ़ें
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