हर ढाई दिन में चंद्रमा बदलता है राशि, क्या आपकी जिंदगी पर पड़ता है इसका सबसे ज्यादा असर?

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं और दैनिक जीवन का कारक माना जाता है। यही कारण है कि दैनिक राशिफल तैयार करते समय चंद्रमा के गोचर को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है। हालांकि जीवन के बड़े फैसलों और भविष्य के आकलन के लिए पूरी जन्म कुंडली, दशा और अन्य ग्रहों की स्थिति भी देखी जाती है।

Chandrama ka rashi parivartan

वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन का ग्रह माना जाता है। यही वजह है कि रोज का राशिफल लिखते समय चंद्रमा के गोचर को सबसे ज्यादा देखा जाता है। लेकिन क्या सच में सबसे ज्यादा असर भी चंद्रमा का ही होता है? आइए जानते हैं।

अगर आप रोज राशिफल पढ़ते हैं तो आपने देखा होगा कि उसमें चंद्रमा के गोचर का जिक्र जरूर होता है। इसकी वजह यह है कि चंद्रमा करीब हर ढाई दिन में राशि बदलता है। दूसरे ग्रहों के मुकाबले इसकी चाल सबसे तेज मानी जाती है। इसलिए रोज के राशिफल में भी इसकी अहम भूमिका रहती है।

रोज के राशिफल में चंद्रमा को क्यों दिया जाता है इतना महत्व?

ज्योतिष में चंद्रमा को मन, सोच और भावनाओं का कारक माना जाता है। मान्यता है कि चंद्रमा की चाल बदलने पर व्यक्ति के मूड, फैसले और दिनभर के अनुभवों में भी बदलाव महसूस हो सकता है। किसी दिन काम आसानी से बन जाते हैं, तो किसी दिन छोटी-सी बात भी मन को परेशान कर सकती है।

इसी वजह से ज्योतिषी दैनिक राशिफल बनाते समय सबसे पहले चंद्रमा की स्थिति देखते हैं। माना जाता है कि चंद्रमा रोजमर्रा की जिंदगी पर जल्दी असर दिखाने वाला ग्रह है।

पंडित नरेंद्र उपाध्याय क्या कहते हैं?

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र उपाध्याय के मुताबिक, चंद्रमा सिर्फ मन का ग्रह नहीं है। यह जिस भाव से गुजरता है, उसे सक्रिय करने का भी काम करता है। उनका कहना है कि चंद्रमा करीब सवा दो दिन में राशि बदलता है और इस दौरान तीन नक्षत्रों से होकर गुजरता है। इसलिए इसका असर भी जल्दी-जल्दी बदलता रहता है।

पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, अगर किसी ग्रह का गोचर अच्छा चल रहा है, तब भी उसका असर तब ज्यादा महसूस हो सकता है, जब चंद्रमा उस भाव या उस ग्रह से जुड़ता है। आसान शब्दों में कहें तो चंद्रमा उस भाव को “जगाने” का काम करता है। इसलिए कई ज्योतिषी इसे रोज के फल का सबसे अहम ग्रह मानते हैं।

क्या हर व्यक्ति पर एक जैसा असर पड़ता है?

इसका जवाब नहीं है। हर व्यक्ति की जन्म कुंडली अलग होती है। इसलिए एक ही दिन और एक ही गोचर का असर दो लोगों पर अलग-अलग हो सकता है। किसी के लिए दिन अच्छा रह सकता है, तो किसी को थोड़ा संभलकर चलने की जरूरत पड़ सकती है।

यही वजह है कि सिर्फ राशि देखकर किसी के पूरे भविष्य का अंदाजा नहीं लगाया जाता। जन्म कुंडली में चंद्रमा और दूसरे ग्रहों की स्थिति भी देखी जाती है।

क्या सिर्फ चंद्रमा से तय हो जाता है भविष्य?

ज्योतिष के जानकारों का कहना है कि रोजमर्रा के जीवन में चंद्रमा का असर अहम माना जाता है, लेकिन नौकरी, कारोबार, शादी, धन या जीवन के बड़े फैसले सिर्फ चंद्रमा के आधार पर नहीं देखे जाते। इसके लिए शनि, गुरु, राहु, केतु, जन्म कुंडली और चल रही दशा को भी देखा जाता है।

यही वजह है कि दैनिक राशिफल में चंद्रमा की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है, जबकि किसी व्यक्ति के पूरे भविष्य को समझने के लिए पूरी कुंडली का अध्ययन जरूरी माना जाता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

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योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


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योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
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एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य


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काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।


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