Chandra Grahan 2026: चंद्र ग्रहण पर नहीं बंद होगा महाकाल का मंदिर, पूजा-आरती का बदलेगा समय, यहां जानें

Feb 27, 2026 12:54 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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Chandra Grahan march 2026: चंद्र ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं। लेकिन देश में कई ऐसे प्राचीन और बड़े मंदिर हैं, जिनके कपाट ग्रहण के दौरान भी खुले रहते हैं। इन्हीं में से एक है उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर, जिसे महाकाल का मंदिर भी कहा जाता है।

Chandra Grahan 2026: चंद्र ग्रहण पर नहीं बंद होगा महाकाल का मंदिर, पूजा-आरती का बदलेगा समय, यहां जानें

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक चंद्र ग्रहण का खास महत्व होता है। इस अशुभ समय माना जाता है। मान्यता है कि ग्रहण के दौरान नकारात्मक शक्तियां काफी हावी होती हैं, जिसकी वजह से कई मांगलिक शुभ कार्य नहीं होते हैं। चंद्र ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं। लेकिन देश में कई ऐसे प्राचीन और बड़े मंदिर हैं, जिनके कपाट ग्रहण के दौरान भी खुले रहते हैं। इन्हीं में से एक है उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर, जिसे महाकाल का मंदिर भी कहा जाता है। ग्रहण के दिन कई जगहों पर धुलेंडी पर्व भी मनाने को लेकर कंफ्यूजन है, लेकिन महाकाल मंदिर धुलेंडी पर्व भी न तो मंदिर के कपाट बंद होंगे और ना ही पूजा-आरती रुकेगी। हालांकि इसकी पूजा पद्धति में जरूर बदलाव किए जाएंगे। चलिए जानते हैं कि चंद्र ग्रहण के दिन महाकाल मंदिर में कैसे पूजा की जाएगी।

महाकाल में दर्शन कर सकेंगे
साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लग रहा है।चंद्र ग्रहण के करीब 9 घंटे पहले सूतक काल लग रहा है। इस दौरान शुभ कार्य करना वर्जित होता है। लेकिन महाकाल मंदिर में चंद्र ग्रहण का कोई असर नहीं होगा। ग्रहण के दौरान भी श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे।

भोग की टाइमिंग में बदलाव
उज्जैन के महाकाल मंदिर बाबा की पूजा और आरती पूरे विधि-विधान से होती है। पूजा के दौरान महाकाल को भोग भी लगाया जाता है। लेकिन 3 मार्च को लगने वाले चंद्र ग्रहण के दौरान सुबह महाकाल को भोग नहीं लगाया जाएगा। शाम को ग्रहण खत्म होने के बाद मंदिर का शुद्धिकरण होगा और इसके बाद ही भगवान महाकाल को भोग लगेगा।

पूजा पद्धति में बदलाव
3 मार्च को लगने वाला चंद्र ग्रहण शाम 6:32 से 6:46 तक लगेगा। वहीं, वेद काल सुबह सूर्योदय से ही प्रारंभ हो जाएगा। वेद काल के कारण सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया जाएगा। जब ग्रहण खत्म हो जाएगा, तब मंदिर का शुद्धिकरण होगा। फिर भगवान का स्नान पूजन होगा। इसके बाद भोग अर्पित कर संध्या आरती संपन्न की जाएगी।

पूजा-आरती का समय
3 मार्च को धुलेंडी का पर्व है। हालांकि चंद्र ग्रहण के चलते इसे मनाने को लेकर कंफ्यूजन है। लेकिन इस दि महाकाल मंदिर में सुबह 4 बजे भस्म आरती कि जाएगी। इसमें पुजारी-पुरोहित महाकाल को गुलाल लगाते हैं। इसी तरह महाकाल मंदिर में साल में दो बार भगवान की दिनचर्या में बदलाव होता है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से ठंड के अनुसार आरती का समय होता है। वहीं चैत्र कृष्ण प्रतिपदा गर्मी के अनुसार आरती का समय तय हो जाता है। इस बार चैत्र कृष्ण प्रतिपदा 4 मार्च शुरू हो रहा है। इसी दिन से गर्मी की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन से महाकाल को ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा। इस दौरान प्रतिदिन होने वाली पांच में से तीन आरती का समय भी बदल जाएगा।

मंदिर परिसर में होलिका दहन
2 मार्च की शाम को भगवान महाकाल की संध्या आरती के बाद महाकाल मंदिर परिसर में ही होलिका दहन किया जाएगा। होलिका दहन के बाद मंदिर परिसर में ही कई भक्त होली मनाने की शुरुआत एक दूसरे पर रंग लगाकर करते हैं।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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