Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को लगेगा चंद्र ग्रहण, होली पर पड़ेगा असर? जानें सूतक में क्या करें और क्या नहीं

Yogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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इस बार होली पर चंद्र ग्रहण का साया है। ज्योतिष दृष्टिकोण के मुताबिक ग्रहण का खास महत्व होता है। 3 मार्च 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा यानी होलिका दहन पर पड़ रहा है। यह भारत में दिखाई देगा, जिसकी वजह से सूतक काल मान्य होगा। चलिए जानते हैं कि सूतक में क्या करना चाहिए और नहीं।

Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को लगेगा चंद्र ग्रहण, होली पर पड़ेगा असर? जानें सूतक में क्या करें और क्या नहीं

Chandra Grahan 2026: ज्योतिष दृष्टिकोण से मार्च 2026 का पहला हफ्ता खगोलीय और धार्मिक नजरिए से खास माना जा रहा है। एक ओर देशभर में होली का उत्साह रहेगा, तो दूसरी ओर साल का पहला चंद्र ग्रहण भी इसी दौरान लगने जा रहा है। 3 मार्च 2026 को लगने वाला यह चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा यानी होलिका दहन की तिथि पर पड़ रहा है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इस बार होली पर ग्रहण का साया पड़ेगा और धार्मिक परंपराओं पर इसका क्या असर होगा। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, जब कोई ग्रहण पर्व या त्योहार के आसपास पड़ता है, तो उसका धार्मिक महत्व और प्रभाव दोनों बढ़ जाते हैं। इसी वजह से इस बार का चंद्र ग्रहण खास माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि ग्रहण के दौरान मानसिक बेचैनी, निर्णयों में भ्रम और भावनात्मक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वहीं वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो चंद्र ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जो तब घटती है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है।

चंद्र ग्रहण 2026 का समय और सूतक काल- खगोलीय गणनाओं के अनुसार, 3 मार्च 2026 को लगने वाला यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में होगा। भारत में यह ग्रहण सूर्यास्त के आसपास दिखाई देगा।

ग्रहण प्रारंभ: 3 मार्च 2026, दोपहर 03:20 बजे

ग्रहण समाप्त: 3 मार्च 2026, शाम 06:46 बजे

सूतक काल: शास्त्रों के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले लग जाता है। इस आधार पर सूतक काल 3 मार्च की सुबह लगभग 06:20 बजे से मान्य होगा। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और किसी भी तरह के शुभ कार्य जैसे पूजा-पाठ, हवन, विवाह या नामकरण आदि वर्जित माने जाते हैं। हालांकि यह नियम उन स्थानों पर लागू होते हैं, जहां ग्रहण दिखाई देता है।

क्या भारत में दिखाई देगा यह चंद्र ग्रहण?- इस बार चंद्र ग्रहण भारत के अधिकांश हिस्सों में दिखाई देगा। यही वजह है कि भारत में इसका सूतक काल भी मान्य रहेगा। खगोलविदों के अनुसार, यह ग्रहण एशिया, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी देखा जा सकेगा। भारत में सूर्यास्त के समय चंद्र ग्रहण दिखाई देने के कारण लोग इसे अपनी आंखों से देख सकेंगे। चूंकि चंद्र ग्रहण को देखना आंखों के लिए हानिकारक नहीं माना जाता, इसलिए इसे बिना किसी विशेष उपकरण के भी देखा जा सकता है।

राशियों पर प्रभाव: किन लोगों को रहना होगा सतर्क?

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सिंह राशि में ग्रहण लगने के कारण कुछ राशियों पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है। विशेष रूप से तीन राशियों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है:

सिंह राशि: चंद्र ग्रहण सिंह राशि में लग रहा है, इसलिए इस राशि के जातकों को गुस्से और भावनाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए। सेहत को लेकर भी थोड़ी सावधानी जरूरी है। अनावश्यक तनाव से बचें और किसी बड़े फैसले को टालना बेहतर रहेगा।

कर्क राशि: चंद्रमा कर्क राशि का स्वामी होता है। ऐसे में ग्रहण के समय कर्क राशि के लोगों को मानसिक बेचैनी, उलझन या निर्णय लेने में दिक्कत हो सकती है। परिवार से जुड़े मामलों में गलतफहमी बढ़ सकती है, इसलिए बातचीत में संयम रखें।

कुंभ राशि: कुंभ राशि वालों के लिए बनते कामों में अड़चन आने के योग बन रहे हैं। निवेश या बड़े आर्थिक फैसलों से फिलहाल दूरी बनाए रखना बेहतर रहेगा। किसी भी तरह का जोखिम उठाने से बचें।

अन्य राशियों के लिए यह ग्रहण सामान्य प्रभाव वाला माना जा रहा है, लेकिन फिर भी सभी को मानसिक संतुलन बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

सूतक काल में क्या करें और क्या न करें?- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल के दौरान कुछ नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है।

क्या न करें : गर्भवती महिलाओं को इस दौरान चाकू, कैंची या सुई जैसी नुकीली चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

सूतक काल और ग्रहण के दौरान भोजन पकाने और खाने से बचना चाहिए। हालांकि बुजुर्गों और बीमार लोगों को छूट दी जाती है।

ग्रहण काल में नए काम की शुरुआत या शुभ कार्य नहीं करने चाहिए।

क्या करें:

ग्रहण के समय “ॐ नमः शिवाय” या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से मानसिक शांति मिलती है।

सूतक काल लगते ही खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डाल देना परंपरा मानी जाती है।

ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें और घर में गंगाजल छिड़कें।

इस दिन सफेद वस्तुओं जैसे चावल, दूध, चीनी या सफेद कपड़े का दान करना पुण्यदायी माना जाता है।

होली और ग्रहण: क्या रखें ध्यान?

चूंकि 3 मार्च 2026 को होलिका दहन भी है और उसी दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है, इसलिए धार्मिक दृष्टि से होलिका दहन और उससे जुड़े अनुष्ठान सूतक लगने से पहले या ग्रहण समाप्त होने के बाद ही करने की सलाह दी जाती है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि ग्रहण काल में किसी भी तरह के मांगलिक कार्य से बचना चाहिए।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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लेखक के बारे में

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योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


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