साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण शुरू, शाम 6:48 बजे मोक्ष, भारत में 20-25 मिनट दिखेगा ‘ब्लड मून’
3 मार्च 2026, मंगलवार (फाल्गुन पूर्णिमा) को साल का पहला चंद्र ग्रहण शुरू हो चुका है। दोपहर 3:20 बजे ग्रहण का स्पर्श काल प्रारंभ हुआ। यह खंडग्रास यानी आंशिक चंद्र ग्रहण है। खगोलीय दृष्टि से यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है।

Chandra Grahan 3 March 2026: 3 मार्च 2026, मंगलवार (फाल्गुन पूर्णिमा) को साल का पहला चंद्र ग्रहण शुरू हो चुका है। दोपहर 3:20 बजे ग्रहण का स्पर्श काल प्रारंभ हुआ और इसी के साथ यह खगोलीय घटना आधिकारिक रूप से शुरू मानी गई। यह खंडग्रास यानी आंशिक चंद्र ग्रहण है, जिसमें पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आकर अपनी छाया चंद्रमा के एक हिस्से पर डालती है। इसी कारण चंद्रमा का कुछ भाग ढका हुआ दिखाई देता है। खगोलीय दृष्टि से यह पूरी तरह प्राकृतिक और वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के कारण समय-समय पर होती रहती है। लेकिन धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं में चंद्र ग्रहण को विशेष महत्व दिया जाता है। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लगने के कारण इस ग्रहण को और भी अहम माना जा रहा है। यह भारत में ‘ग्रस्तोदय’ रूप में दिखाई देगा- यानी चंद्रोदय के समय ग्रहण का अंतिम चरण नजर आएगा।
कब से कब तक रहेगा ग्रहण?
भारतीय समयानुसार ग्रहण की प्रमुख टाइमिंग इस प्रकार है:
ग्रहण प्रारंभ (स्पर्श): दोपहर 3:20 बजे
ग्रहण मध्य: शाम 5:05 बजे
ग्रहण समाप्ति (मोक्ष): शाम 6:48 बजे
उपच्छाया समाप्ति: रात 7:55 बजे
हालांकि यह पूरा समय भारत में दिखाई नहीं देगा। वजह यह है कि ग्रहण शुरू होने के समय देश में दिन रहेगा और चंद्रमा क्षितिज के नीचे होगा। भारत में यह ग्रहण ‘ग्रस्तोदय’ रूप में दिखाई देगा। यानी जब यहां चंद्रमा उदय होगा, तब तक ग्रहण अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका होगा।
क्यों कहा जा रहा है ‘ब्लड मून’?- ग्रहण के दौरान जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा को ढकती है, तो सूर्य की किरणें पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरते हुए चंद्रमा तक पहुंचती हैं। इस प्रक्रिया में लाल रंग की किरणें ज्यादा परावर्तित होती हैं। इसी वजह से चंद्रमा तांबे या लालिमा लिए दिखाई देता है। इसी कारण इसे आम भाषा में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।
चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना सुरक्षित- वैज्ञानिकों के अनुसार यह पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित घटना है। चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना सुरक्षित है और इसके लिए किसी विशेष चश्मे की आवश्यकता नहीं होती।
भारत में कितनी देर दिखेगा ग्रहण?- भारत में चंद्रमा शाम को उदय होगा, इसलिए लोग ग्रहण का केवल अंतिम हिस्सा ही देख पाएंगे। अधिकांश शहरों में यह दृश्य लगभग 20 से 25 मिनट तक ही दिखाई देगा। भारत में यह ग्रहण ‘ग्रस्तोदय’ रूप में दिखाई देगा, इसलिए चंद्रोदय के बाद यानी लगभग 6:20–6:30 बजे के बीच (शहर अनुसार अलग-अलग) से लेकर 6:48 बजे तक ही इसका अंतिम हिस्सा नजर आएगा।
उत्तर-पूर्वी राज्यों- जैसे अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और मणिपुर - में चंद्रमा सबसे पहले उदय होता है, इसलिए वहां दृश्यता का समय अपेक्षाकृत अधिक रहेगा। इसके बाद पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में ग्रहण नजर आएगा।
दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और मध्य भारत में ग्रहण लगभग 6:22 बजे के बाद दिखाई देगा और 6:48 बजे मोक्ष तक ही सीमित रहेगा। पश्चिमी भारत- मुंबई, गुजरात और राजस्थान- में यह अवधि और भी कम हो सकती है।
सूतक काल का महत्व- ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। इस बार सूतक सुबह लगभग 6:20 बजे से प्रभावी है और ग्रहण समाप्ति यानी 6:48 बजे तक रहेगा। सूतक के दौरान परंपरागत रूप से मंदिरों के कपाट बंद रखे जाते हैं, शुभ कार्यों को टाला जाता है और कई लोग भोजन बनाने या ग्रहण करने से परहेज करते हैं। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण का दैनिक जीवन पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं माना जाता।
2026 में कितने चंद्र ग्रहण?- साल 2026 में कुल दो चंद्र ग्रहण होंगे। हालांकि भारत में केवल 3 मार्च का ग्रहण ही दिखाई देगा। वर्ष का दूसरा ग्रहण भारत से दृश्य नहीं होगा।
लेखक के बारे में
Yogesh Joshiसंक्षिप्त विवरण
योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।
विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव
योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।
न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।
करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर
योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।
एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य
योगेश के लिए ज्योतिष केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं है। वह इसे आत्मचिंतन और सही फैसलों में मदद करने वाले एक मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। इसी सोच के साथ वह राशिफल और अन्य ज्योतिषीय विषयों को संतुलित, व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को डराना नहीं, बल्कि जानकारी के जरिए उन्हें सोचने और समझने की दिशा देना है।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
राशिफल (डेली एवं वीकली)
ग्रह-गोचर
दशा-महादशा
अंकज्योतिष
सामुद्रिक शास्त्र
वास्तु शास्त्र
फेंगशुई
रत्न-उपाय
व्रत-त्योहार एवं पूजा-विधि



