चंद्र ग्रहण के दौरान किसी की मृत्यु हो जाए, तो क्या करें? जानिए अंतिम संस्कार से जुड़े नियम
चंद्र ग्रहण की अवधि धार्मिक कार्य के लिए शुभ नहीं मानी जाती है। इस दौरान कई ऐसे कार्य होते हैं, जिन्हें नहीं करना चाहिए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चंद्र ग्रहण के दौरान किसी की मृत्यु हो जाती है, तो क्या करना चाहिए। खासकर अंतिम संस्कार करना चाहिए या नहीं।

हिंदू धर्म और ज्योतिष की दृष्टि में ग्रहण को बेहद अशुभ माना जाता है। इस साल सूर्य ग्रहण लग चुका है और अब कुछ ही दिन में चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण होगा, जो 3 मार्च को लगने जा रहा है। चंद्र ग्रहण की अवधि धार्मिक कार्य के लिए शुभ नहीं मानी जाती है। इस दौरान कई ऐसे कार्य होते हैं, जिन्हें नहीं करना चाहिए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चंद्र ग्रहण के दौरान किसी की मृत्यु हो जाती है, तो क्या करना चाहिए। खासकर अंतिम संस्कार करना चाहिए या नहीं। चलिए जानते हैं कि इससे जुड़े धार्मिक मान्यताएं क्या होती है। साथ ही ये भी जानेंगे कि भारत में यह चंद्र ग्रहण दृश्यमान होगा या नहीं।
कब लग रहा है साल का पहला चंद्र ग्रहण
साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 18 बजकर 16 मिनट से शुरू होगा और यह 18 बजकर 46 पर समाप्त होगा। स्थानिय चंद्र ग्रहण की अवधि 30 मिनट 09 सेकेंड तक रहेगा। ज्योतिष आचार्यों की मानें तो ग्रहण के दौरान शास्त्रों में वर्णित नियमों का पालन करना जरूरी होता है। इसकी अनदेखी जीवन पर भारी पड़ सकता है। खासकर अगर ग्रहण के दौरान किसी की मृत्यु हो जाती है, तो इस दौरान विशेष नियमों का पालन करना चाहिए। इस समय मृत्यु होना आत्मा के कर्म और पूर्व जन्म के फलों से जुड़ा होता है।
कब करें अंतिम संस्कार?
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक ग्रहण के दौरान पूजन सामग्रियों को स्पर्श करने की तक मनाही होती है। वहीं, अंतिम संस्कार की रस्मों को किए बिना अंत्येष्टि की जाए तो आत्मा को मोक्ष प्राप्ति में बाधा आ सकती है। ऐसे में मान्यता अनुसार चंद्र ग्रहण के समय किसी की मृत्यु होती है, तो अंतिम संस्कार की प्रक्रिया ग्रहण समाप्ति के बाद ही करना उचित है।
गुरुड़ पुराण क्या कहता है?
वहीं, गरुड़ पुराण के मुताबिक किसी के मृत्यु के बाद शव का शीघ्र संस्कार करना चाहिए। केवल ग्रहण होने के कारण अंतिम संस्कार को बहुत देर तक टालना शास्त्रसम्मत नहीं माना जाता है। परिस्थितियों के अनुसार अंतिम संस्कार किया जा सकता है। ऐसे में गरुड़ पुराण के मुताबिक मृत्यु के बाद शव का जल्दी से जल्दी दाहसंस्कार कर देना चाहिए।
किसी की मृत्यु हो जाए, तो क्या करें?
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, ग्रहण काल में अगर किसी की मौत हो जाए तो मृत शरीर को साफ कपड़े से ढककर सुरक्षित स्थान पर रखें। घर के सदस्य और रिश्तेदार मृत शरीर के पास बैठकर मंत्र जाप या भगवान का नाम ले सकते हैं। साथ ही मृतक के सिरहाने पर एक तिल के तेल का दीपक जलाना चाहिए। इसके अलावा गंगाजल का छींटा मृतक के शरीर पर छिड़कना चाहिए। फिर तुलसी का पत्ता मृतक के मुंह में रखना। अंतिम संस्कार में अग्नि प्रज्जवलित करें। हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो ग्रहण एक खगोलीय घटना है और इसका मृत्यु या अंतिम संस्कार पर कोई प्रभाव नहीं है। लेकिन, परंपराओं और सामाजिक मान्यताओं के कारण लोग ग्रहण समाप्त होने तक इंतजार करते हैं।
भारत में होगा सूतक काल मान्य
3 मार्च को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, जिसकी वजह से सूतक काल मान्य होगा। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले लग जाता है। यानी 3 मार्च 2026 को सुबह से ही सूतक का प्रभाव माना जाएगा। सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श और भोजन पकाना व खाना वर्जित माना जाता है। हालांकि बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को शास्त्रों में कुछ छूट दी गई है। इनके लिए सूतक दोपहर 03:35 बजे से प्रभावी माना जाएगा।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
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