किन लोगों को पहनना चाहिए चांदी का छल्ला? जानें विधि, नियम और फायदे

Apr 09, 2026 03:16 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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ज्योतिष शास्त्र में चांदी का खास महत्व बताया गया है। ज्योतिष में इसका संबंध चंद्रमा और शुक्र ग्रह से माना जाता है। इसलिए चांदी की अंगूठी, चेन या अन्य आभूषण पहनने से जीवन में कई सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे सकते हैं

किन लोगों को पहनना चाहिए चांदी का छल्ला? जानें विधि, नियम और फायदे

ज्योतिष शास्त्र में चांदी का खास महत्व बताया गया है। ज्योतिष में इसका संबंध चंद्रमा और शुक्र ग्रह से माना जाता है। इसलिए चांदी की अंगूठी, चेन या अन्य आभूषण पहनने से जीवन में कई सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे सकते हैं। चंद्रमा ग्रह को मन, मानसिक स्थिति, भावनाओं और कल्पना शक्ति का कारक माना गया है। ऐसे में चांदी का छल्ला पहनने से मानसिक शांति, स्थिरता और एकाग्रता बढ़ती है। हालांकि चांदी हर किसी पर सूट करें, ये जरूरी नहीं है। किसी पर इसका शुभ प्रभाव पड़ता है और किसी पर अशुभ। इसलिए किसी भी धातु या रत्न को पहनने से पहले अच्छे ज्योतिषाचार्य की मदद लेनी चाहिए। ऐसे में आज हम जानेंगे कि चांदी का छल्ला किन राशियों के लिए शुभ होता है और इसे पहनने के नियम और फायदे भी जानेंगे।

किन राशियों के लिए होता है शुभ

कर्क, वृश्चिक और मीन राशि के लोग यदि चांदी का छल्ला पहनते हैं, तो उनकी कई परेशानियां अपने आप हल होने लगती हैं। इन राशियों के लिए इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा, वृषभ और तुला राशि के लोग भी चांदी पहनकर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। चांदी पहनने से इन जातकों के जीवन में धन की वृद्धि, मन की शांति और रिश्तों में मिठास आती है। कई बार तो लंबे समय से रुके हुए कार्य भी अचानक पूरे होने लगते हैं।

इन राशियों के लिए है नहीं है शुभ

मेष, सिंह और धनु राशि के लोगों को चांदी का छल्ला पहनने से बचना चाहिए, क्योंकि यह उनके लिए अनुकूल नहीं माना जाता। गलती से इसे पहनने पर उनके किए गए कामों में रुकावट आ सकती है और स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

किस दिन पहनें चांदी का छल्ला

चांदी को चंद्रमा से जुड़ा माना जाता है। इसे विशेष दिन ही धारण करना शुभ माना जाता है। पूर्णिमा के दिन छल्ला पहनना लाभकारी होता है। इसके अलावा, सोमवार और शुक्रवार को भी चांदी से संबंधित आभूषण पहनना शुभ माना जाता है, क्योंकि ये दिन भी चंद्रमा से जुड़े होते हैं। इन खास दिनों पर चांदी का छल्ला पहनने से व्यक्ति के जीवन में इसके सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते हैं।

किस हाथ की अंगुली में पहनें

चांदी का छल्ला दाएं हाथ में पहनना सबसे शुभ होता है। यदि दाएं हाथ में पहनना संभव न हो, तो बाएं हाथ के अंगूठे में भी इसे धारण किया जा सकता है। साथ ही, यदि हाथ में कोई अन्य अंगूठी नहीं पहनी हुई है, तो इसे रिंग फिंगर पर पहनने की भी परंपरा है। ज्योतिष के अनुसार, हथेली में अंगूठे की ओर शुक्र पर्वत स्थित होता है, इसीलिए चांदी का छल्ला अंगूठे में पहनना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

पहनने के फायदे

- चांदी का संबंध मुख्य रूप से चंद्रमा और शुक्र ग्रह से होता है। नियमों के अनुसार चांदी का छल्ला पहनने से कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति मजबूत होती है।

- इससे जातक के जीवन में सुख-संपन्नता और आत्मविश्वास बढ़ता है।

- चंद्रमा से जुड़ाव के कारण यह मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन प्रदान करता है।

- नियमित धारण करने से ध्यान और एकाग्रता में सुधार होता है।

- यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखता है और घर व जीवन में सकारात्मकता बनाए रखता है।

- चांदी का छल्ला पहनने से सुख, समृद्धि और सफलता आने की मान्यता है।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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