चाणक्य नीति: कभी नहीं टिकता है इस तरह से कमाया धन, पूरे जीवन पहुंचाता है नुकसान

Feb 19, 2026 08:30 pm ISTNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
share

अन्याय से कमाया गया धन अधिकतम दस वर्ष तक टिकता है। ग्यारहवें वर्ष में वह जड़ से नष्ट हो जाता है। चाणक्य नीति के मुताबिक, जो धन छल, कपट, धोखा, रिश्वत, चोरी, अन्याय या अनैतिक तरीके से कमाया जाता है, वह कभी स्थायी नहीं रहता है।

चाणक्य नीति: कभी नहीं टिकता है इस तरह से कमाया धन, पूरे जीवन पहुंचाता है नुकसान

चाणक्य नीति में अर्थ और धन के संचय को लेकर बहुत स्पष्ट और कठोर नियम बताए गए हैं। एक प्रसिद्ध श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं:

अन्यायोपार्जितं द्रव्यं दश वर्षाणि तिष्ठति।

प्राप्ते एकादशे वर्षे समूलं च विनश्यति।।

अर्थात् – अन्याय से कमाया गया धन अधिकतम दस वर्ष तक टिकता है। ग्यारहवें वर्ष में वह जड़ से नष्ट हो जाता है।

यह श्लोक सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि जीवन का एक कठोर सत्य है। चाणक्य जी ने स्पष्ट रूप से बताया है कि जो धन छल, कपट, धोखा, रिश्वत, चोरी, अन्याय या अनैतिक तरीके से कमाया जाता है, वह कभी स्थायी नहीं रहता है। आइए इस श्लोक के गहरे अर्थ और उसके जीवन में प्रभाव को समझते हैं।

अन्याय से कमाया धन का स्वभाव

चाणक्य के अनुसार, अन्याय से कमाया धन कभी स्थिर नहीं रहता। इसमें रिश्वत, चोरी, धोखाधड़ी, गलत व्यापार, दूसरों का हक मारना या अनैतिक तरीके से लाभ उठाना शामिल है। ऐसा धन शुरू में बहुत तेजी से बढ़ता दिखता है, लेकिन उसमें स्थायित्व की कमी होती है। गरुड़ पुराण और अन्य शास्त्रों में भी कहा गया है कि अनैतिक धन 'विष के समान' होता है - पीने में मीठा लगता है, लेकिन बाद में घातक साबित होता है।

दस वर्ष तक टिकने का रहस्य

श्लोक में 'दश वर्षाणि तिष्ठति' का अर्थ है कि अन्याय का धन अधिकतम दस वर्ष तक रह सकता है। इस दौरान व्यक्ति को लगता है कि उसकी चालाकी काम कर गई है। वह ऐशो-आराम करता है, दिखावा करता है, लेकिन अंदर से वह धन 'जहर' की तरह काम करता है। परिवार में कलह, स्वास्थ्य हानि, कानूनी परेशानियां या विश्वासघात शुरू हो जाता है। चाणक्य कहते हैं कि यह धन व्यक्ति को अहंकार में डाल देता है, जिससे वह और गलतियां करता है।

ग्यारहवें वर्ष में समूल नाश

'प्राप्ते एकादशे वर्षे समूलं च विनश्यति' का अर्थ है कि ग्यारहवें वर्ष में वह धन जड़ से उखड़ जाता है। यह नाश अचानक नहीं होता, बल्कि धीरे-धीरे होता है और अंत में सब कुछ खत्म हो जाता है। कारण हो सकता है – कानूनी कार्रवाई, धोखा, परिवार का बंटवारा, बीमारी या अचानक आर्थिक संकट। चाणक्य का मत है कि अन्याय का धन कभी सुख नहीं देता, बल्कि पूरे जीवन परेशानी और अपमान का कारण बनता है।

न्यायपूर्ण धन से मिलने वाला सुख

चाणक्य नीति का मूल संदेश है - न्याय से कमाया धन ही स्थायी होता है। मेहनत, ईमानदारी और नैतिकता से अर्जित धन न केवल टिकता है, बल्कि पीढ़ियों तक सुख देता है। अन्याय का धन व्यक्ति को अंदर से खोखला कर देता है और अंत में उसे सब कुछ खोना पड़ता है। इसलिए चाणक्य कहते हैं कि धन कमाने का रास्ता हमेशा शुद्ध और न्यायपूर्ण होना चाहिए।

चाणक्य का यह श्लोक आज भी प्रासंगिक है। आज के समय में भी रिश्वत, धोखे या अनैतिक कमाई से धन बढ़ाने वाले लोग अंत में सब कुछ खो देते हैं। इसलिए ईमानदारी और मेहनत से कमाया धन ही सच्चा सुख देता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

लेखक के बारे में

Navaneet Rathaur

संक्षिप्त विवरण

नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


विस्तृत बायो परिचय और अनुभव

डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


विशेषज्ञता (Areas of Expertise)

अंक ज्योतिष
हस्तरेखा विज्ञान
वास्तु शास्त्र
वैदिक ज्योतिष

और पढ़ें
जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!