Durga Ashtami 2026: कन्फ्यूज कर रही है चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी की डेट? नोट करें कन्या पूजन के 2 शुभ मुहूर्त

Garima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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Chaitra Navratri 2026: हर बार की तरह इस बार भी नवरात्रि की अष्टमी तिथि को लेकर कन्फ्यूनज है। आइए जानते हैं कि पंचांग के हिसाब से सही तारीख क्या है और साथ में जानेंगे कि कन्या पूजन के लिए शुभ मुहूर्त क्या-क्या है?

Durga Ashtami 2026: कन्फ्यूज कर रही है चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी की डेट? नोट करें कन्या पूजन के 2 शुभ मुहूर्त

Durga Ashtami 2026: इस समय चैत्र नवरात्रि चल रही है। साल भर में कुल 4 नवरात्रि आती है जिसमें से 2 ही गृहस्थों के लिए खास होती है। पहली शारदीय और दूसरी चैत्र नवरात्रि है। चैत्र नवरात्रि में भी दिन के हिसाब से मां दुर्गा के सभी स्वरूपों की पूजा की जाती है। हर नवरात्रि में आठवा दिन बहुत ही खास माना जाता है। कई लोग इसे अष्टमी कहते हैं तो कई लोग इसे दुर्गा अष्टमी के नाम से भी जानते हैं तो वहीं कुछ इसे महाष्टमी भी कहते हैं। बात की जाए नवरात्रि के आठवें दिन की तो इस दिन मां दुर्गा के सबसे खूबसूरत अवतार महागौरी की पूजा की जाती है।

महाअष्टमी की तिथि को लेकर कन्फ्यूजन

महाअष्टमी की तिथि को लेकर हर बार कन्फ्यूजन बनता है और इस बार ठीक ऐसा ही हो रहा है। कई लोगों को लग रहा है कि अष्टमी 25 मार्च को है तो कई 26 मार्च कह रहे हैं। वहीं कुछ को तो इस बात का भी कन्फ्यूजन है कि दुर्गा अष्टमी और रामनवमी एक ही दिन पड़ रहा है। तो आइए जानते हैं कि आखिर दुर्गा अष्टमी वाकई में किस दिन है और इस दिन की पूजा के शुभ मुहूर्त क्या है? साथ ही जानेंगे कि रामनवमी यानी आखिरी दिन कन्या पूजन किस शुभ मुहूर्त में किया जाए?

किस तारीख को है चैत्र नवरात्रि की अष्टमी?

कई लोगों में चैत्र नवरात्रि अष्टमी तिथि का कन्फ्यूजन कल और परसों यानी 25 और 26 मार्च को लेकर बना हुआ है। दरअसल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत कल यानी 25 मार्च से हो रही है। ज्योतिषीय गणना के आधार पर तिथि के शुरुआत का समय दोपहर 1:50 बजे से हो रहा है। अष्टमी तिथि का समापन अगले दिन यानी 26 मार्च की सुबह होगा। समापन की टाइमिंग सुबह 11:48 बजे है। उदयातिथि को ध्यान में रखते हुए ही दुर्गा अष्टमी की तारीख 26 मार्च होगी। उदयातिथि का फैसला सूर्योदय के समय वाली तिथि के आधार पर किया जाता है।

महाअष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त

हिंदू धर्म में महाअष्टमी की पूजा का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इस दिन की पूजा अगर विधि विधान से कर ली जाए तो मां दुर्गा की कृपा बरसती है। महाअष्टमी 26 मार्च को है तो पूजा के लिए सही समय सुबह 6:20 से लेकर 7:52 बजे तक है।

कन्या पूजन किस दिन?

चैत्र हो या फिर शारदीय नवरात्रि दोनों में ही अष्टमी और नवमी के दौरान कन्या पूजन किया जाता है। कुछ लोग अष्टमी वाले दिन कन्या पूजन रखते हैं तो कई लोग नवमी वाली तिथि पर कन्याओं को भोजन कराते हैं। इस दौरान कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूप के रूप में पूजा जाता है और उन्हें भोजन करवाकर उनकी पसंद की चीजें दी जाती हैं। हालांकि साल 2026 में कन्या पूजन की तिथि को लेकर भी कन्फ्यूनज है। इस साल कन्या पूजन की तिथि 26 मार्च रहेगी। अष्टमी और नवमी वाले दोनों लोग इसी दिन कन्या पूजन करेंगे। वैसे जो लोग 27 को नवमी कर रहे हैं, वो लोग इसी दिन कन्या पूजन करें।

दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन का मुहूर्त

धर्म शास्त्रों के अनुसार कन्या पूजन के लिए दुर्गा अष्टमी का दिन ही सबसे सही माना जाता है। इस साल चैत्र नवरात्रि की अष्टमी की कन्या पूजन से लिए दो शुभ मुहूर्त हैं। कन्या पूजन के लिए पहला मुहूर्त सुबह 6:18 बजे से लेकर सुबह 7:50 तक रहेगा। वहीं दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 10:55 बजे से दोपहर 3:31 मिनट तक रहेगा।

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

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लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

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