Chaitra Navratri 2026 date: चैत्र नवरात्रि कब से हैं,इस बार शुभ संयोग, जानें क्या है कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

Mar 10, 2026 08:50 am ISTAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान, ज्योतिर्विद डॉ पं दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली
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Chaitra Navratri 2026:चैत्र अर्थात वासंतिक नवरात्र में माता भगवती का घरों में आगमन इस वर्ष डोला अर्थात पालकी पर सवार होकर होगा तथा गज अर्थात हाथी पर सवार होकर जाएंगी ।

Chaitra Navratri 2026 date: चैत्र नवरात्रि कब से हैं,इस बार शुभ संयोग, जानें क्या है कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

चैत्र अर्थात वासंतिक नवरात्र में माता भगवती का घरों में आगमन इस वर्ष डोला अर्थात पालकी पर सवार होकर होगा तथा गज अर्थात हाथी पर सवार होकर जाएंगी । उत्थान ज्योतिष एवं आध्यत्म संस्थान के निदेशक ज्योतिर्विद डॉ पं दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली ने बताया कि चैत्र अर्थात वासंतिक नवरात्र के साथ ही साथ नवसंवत्सर 2083 अर्थात हिंदू नव वर्ष का आरंभ भी होता है। वासंतिक नवरात्र के साथ रौद्र नामक नव संवत्सर का भी आरंभ 19 मार्च दिन गुरुवार से होगा। रौद्र नामक इस नव संवत्सर के राजा गुरु एवं मंत्री मंगल होंगे।

नौ दिन के हैं नवरात्रि

वासंतिक नवरात्र का शुभारंभ 19 मार्च 2026 दिन गुरुवार को तथा समापन 27 मार्च दिन शुक्रवार को होगा। चैत्र माह में पड़ने के कारण इस नवरात्र को चैत्र कहा जाता है। चैत्र नवरात्र के अतिरिक्त इसे वासंतिक नवरात्र भी कहा जाता हैं। यद्यपि कि इस बार प्रतिपदा तिथि का क्षय हो रहा है फिर भी 9 दिनों तक आदिशक्ति मां दुर्गा नौ रूपो की पूजा-अर्चना अलग अलग दिनों पर की जाएगी।चंद्रमा मीन राशि में सम्पूर्ण दिन रात संचरण करेगा । फलत: पंचक लगा रहेगा । जो कि शुभ कार्यों के लिए शुभ कारक होता है।

कलश स्थापना शुभ मुहूर्त क्या है

वैसे तो कलश स्थापना 19 मार्च 2026 दिन गुरुवार को सूर्योदय से लेकर रात तक किया जा सकता है । परंतु निम्न शुभ चौघड़िया में कलश स्थापना अति शुभ होगा।

◆सुबह 6:48 बजे से लेकर सुबह 7:30 बजे तक।

◆सुबह 10:30 बजे से लेकर दोपहर 03:00 बजे तक। एवं

◆सायं 4:30 से 6:00 बजे तक किया जाना श्रेष्ठ एवं शुभ फल प्रदायक रहेगा।

◆इस प्रकार अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:38 से लेकर 12:26 तक चौघड़िया सहित कलश स्थापना के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त होगा।

नवरात्रि में क्या बन रहे हैं संयोग

◆उत्तराभाद्रपद नक्षत्र सूर्योदय से रात में 4:40 बजे तक व्याप्त रहेगी तदुपरांत रेवती नक्षत्र आरंभ हो जाएगी ।

◆चंद्रमा मीन राशि में सम्पूर्ण दिन रात संचरण करेगा । फलत: पंचक लगा रहेगा । जो कि शुभ कार्यों के लिए शुभ कारक होता है।

◆शुक्ल योग रात में 1:57 बजे तक व्याप्त रहेगा। उसमे बाद ब्रह्म योग आरम्भ हो जाएगा। शुक्ल योग को शुभ कारक योग माना गया है।

इस वासंतिक अर्थात चैत्र नवरात्र 2026 में माता का पृथ्वी पर आगमन डोला अर्थात पालकी पर
नवरात्र की शुरुआत गुरुवार से हो रही है अतः माता का आगमन डोला अर्थात पालकी की सवारी पर होगा। जो कि अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्र के लिए तनाव, अशांति अराजकता, कष्ट तथा भयंकर रोग का संकेत देता है। आम जनमानस के सुख, सम्पन्नता, प्रगति तथा शांति में कमी तथा कष्ट में वृद्धि कारक होता है।

माता का गमन गज अर्थात हाथी पर होगा
इस प्रकार इस नवरात्र में माता का गमन यानी प्रस्थान शुक्रवार को होने के कारण हाथी पर होगा । गज अर्थात हाथी पर माता के गमन से अच्छी बारिश तथा सुख समृद्धि में वृद्धि की स्थिति उत्पन्न करने वाली होती है । माता का गमन कष्टो को दूर करने वाला होगा।

Anuradha Pandey

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शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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