Chaitra Navratri 2026: मार्च में चैत्र नवरात्रि कब से शुरू हैं? नोट कर लें सही डेट और घटस्थापना का समय

Feb 21, 2026 12:03 pm ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान
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चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इसी पर्व के साथ हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है, इसलिए यह समय केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी बेहद अहम होता है। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा की जाती है।

Chaitra Navratri 2026: मार्च में चैत्र नवरात्रि कब से शुरू हैं? नोट कर लें सही डेट और घटस्थापना का समय

Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इसी पर्व के साथ हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है, इसलिए यह समय केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी बेहद अहम होता है। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। हर दिन मां के एक विशेष रूप की आराधना का अपना अलग महत्व होता है। श्रद्धालु व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और घर में धार्मिक वातावरण बनाए रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि इन नौ दिनों में मां दुर्गा अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं। जो लोग सच्चे मन से माता की आराधना करते हैं, उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और मन को भी सुकून मिलता है।

चैत्र नवरात्रि 2026 कब से हैं?- दृक पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च 2026, गुरुवार को शुरू होगी। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत मानी जाएगी।प्रतिपदा तिथि 19 मार्च 2026 को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी और 20 मार्च 2026 को सुबह 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। चूंकि तिथि में कोई क्षय या वृद्धि नहीं हो रही है, इसलिए इस बार पूरे नौ दिनों तक विधिपूर्वक नवरात्रि के व्रत और पूजा की जाएगी।

घटस्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त- नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के साथ पूजा की शुरुआत होती है। इस साल भक्तों को घटस्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त मिल रहे हैं।

पहला और सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 6 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। अगर किसी कारणवश सुबह पूजा न कर पाएं, तो दोपहर में अभिजीत मुहूर्त का भी लाभ लिया जा सकता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। ध्यान रखें कि 19 मार्च को राहु काल दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। इस दौरान किसी भी शुभ काम या पूजा की शुरुआत करने से बचना चाहिए।

इस बार बन रहे हैं खास शुभ योग- चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। इसके साथ ही शुक्ल योग और ब्रह्म योग का संयोग भी इस नवरात्रि को और अधिक फलदायी बना रहा है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इन योगों में की गई पूजा और व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में पहले दिन की पूजा का विशेष महत्व रहेगा।

चैत्र नवरात्रि 2026 का पूरा कैलेंडर

पहले दिन 19 मार्च को मां शैलपुत्री की पूजा और घटस्थापना होगी।

दूसरे दिन 20 मार्च को मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाएगी।

तीसरे दिन 21 मार्च को मां चंद्रघंटा की पूजा होगी।

चौथे दिन 22 मार्च को मां कूष्मांडा की पूजा का विधान है।

पांचवें दिन 23 मार्च को मां स्कंदमाता की पूजा की जाएगी।

छठे दिन 24 मार्च को मां कात्यायनी की आराधना होगी।

सातवें दिन 25 मार्च को मां कालरात्रि की पूजा के साथ महा सप्तमी मनाई जाएगी।

आठवें दिन 26 मार्च को मां महागौरी की पूजा होगी और कई जगह दुर्गा अष्टमी व कन्या पूजन किया जाएगा।

नौवें दिन 27 मार्च को मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ राम नवमी मनाई जाएगी और व्रत का पारण किया जाएगा।

राम नवमी और कन्या पूजन का महत्व

इस साल 27 मार्च को राम नवमी मनाई जाएगी। यह दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। कई श्रद्धालु अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन करते हैं। अपनी परंपरा और मान्यता के अनुसार लोग अष्टमी या नवमी किसी भी दिन कन्याओं को भोजन कराकर व्रत पूर्ण करते हैं।

नवरात्रि में रखें इन बातों का ध्यान- नवरात्रि के दौरान सात्त्विक जीवनशैली अपनाना शुभ माना जाता है। इस समय प्याज, लहसुन और मांसाहार से दूरी रखने की सलाह दी जाती है। पूजा के समय ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है। श्रद्धा और नियम के साथ किए गए व्रत और पूजा से मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi

योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


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योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
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