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Chaitra Navratri 2026: नोट कर लें चैत्र नवरात्रि की डेट, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, ऐसे करें कलश स्थापना

Chaitra Navratri 2026: नोट कर लें चैत्र नवरात्रि की डेट, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, ऐसे करें कलश स्थापना

संक्षेप:

होली के बाद चैत्र नवरात्रि आती है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की नौ दिन पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करते हैं। जानें इस साल चैत्र नवरात्रि कब है और साथ ही जानें कलश स्थापना करने की सबसे आसान विधि…

Feb 10, 2026 09:52 am ISTGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। वहीं चैत्र महीने में पड़ने वाली नवरात्रि की शुरुआत शुक्ल पक्ष की पहली तारीख के साथ होती है। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव को मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधान के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इन नौ दिनों में लोग मां दुर्गा के इन अगल-अलग रुपों की उपासना करते हैं और व्रत रखते हैं। माना जाता है कि इस दौरान की गई पूजा-पाठ से मां दुर्गा शक्ति, शांति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। चैत्र नवरात्रि को हिंदू नववर्ष के शुरुआत के रूप में देखते हैं। मान्यता है कि इस दौरान अगर सच्चे मन से पूजा-अर्चना की जाए तो मां दुर्गा अपने भक्तों के सारे कष्ट हर लेती हैं। जानते हैं कि साल 2026 की चैत्र नवरात्रि कब पड़ने वाली है। साथ ही जानेंगे पूजा का शुभ मुहूर्त और कलश स्थापना की आसान सी विधि को।

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कब है चैत्र नवरात्रि

इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से होने वाली है। इसका समापन 9वें दिन यानी 27 मार्च को होगा। ऐसा कई बार संयोग बनता है कि नवरात्र घटते या बढ़ते हैं लेकिन इस बार पूरे के पूरे नौ दिन नवरात्रि रहेगी। चैत्र नवरात्रि के दौरान कलश स्थापना विशेष रूप से होती है। इसे कई लोग घट स्थापना भी कहते हैं। बता दें कि कलश स्थापना 19 तारीख को सुबह शुभ मुहूर्त में की जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त 6 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इस शुभ मुहूर्त के बीच ही कलश स्थापना से जुड़ी सारी चीजें कर लें। बात की जाए अभिजीत मुहूर्त की तो ये दोपहर में 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 12 बजकर 53 मिनट तक रहने वाला है।

ऐसे करें कलश स्थापना

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करने से पहले पूजा स्थल को गंगाजल छिड़कर शुद्ध कर लें। उस स्थान को भी शुद्ध करें यहां आपको कलश की स्थापना करनी है। अब मिट्टी के बर्तन में मिट्टी डालें। उसमें जवारे के बीज डाल दें। इसके बाद और मिट्टी डालें और फिर से बीज डाल लें। ध्यान रखें कि ये क्रिया आप तीन बार कर लें। इसके ऊपर थोड़ा जल छिड़क दें। अब बर्तन के ऊपरी हिस्से में मौली बांध दें। इस पर तिलक करें। इसके बाद कलश में गंगाजल भरकर रख दें। इसमें दुर्वा, इत्र, सुपारी, अक्षत और सिक्का डाल दें। अब इस पर अशोक के पांच पत्ते लगा दें और मिट्टी के कटोरी से ढक दें। अब एक नारियल को लाल चुनरी से लपेटकर ऊपर से रक्षासूत्र लगा दें। जौ वाले मिट्टी के पात्र को सबसे नीचे रखें और इस पर कलश रख दें। कलश के ऊपरी हिस्से में नारियल को रख दें। इस तरह से आप चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना कर सकते हैं। स्थापना के बाद अपनी पूजा शुरू कर दें।

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

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गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।


परिचय और अनुभव

गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पिछले 8 महीनों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।


करियर

गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।


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गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।


एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच

गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।


व्यक्तिगत रुचियां

काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।


विशेषज्ञता

वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई, डेली और वीकली राशिफल

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