Chaitra Navratri 2026 :इस बार चैत्र नवरात्र पर खरमास और पंचक की छाया, क्या शुभ कार्य होंगे? कलश स्थापना का क्या मुहूर्त
chaitra Navratri 2026 kharmas: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से इस बार चैत्र नवरात्रि शुरू हो रहे हैं। इन नवरात्रि को वासंतिक नवरात्र भी कहा जाता है। नवरात्र 19 मार्च से शुरू होंगे और 27 मार्च को भगवान राम के जन्मोत्सव रामनवी के तौर पर समाप्त होंगे।

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से इस बार चैत्र नवरात्रि शुरू हो रहे हैं। इन नवरात्रि को वासंतिक नवरात्र भी कहा जाता है। नवरात्र 19 मार्च से शुरू होंगे और 27 मार्च को भगवान राम के जन्मोत्सव रामनवी के तौर पर समाप्त होंगे। चैत्र नवरात्र को इसलिए भी खास माना जाता है क्योंकि इसी दिन से हिंदू नववर्ष का भी आरंभ माना जाता है। पुराणों के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही सृष्टि की रचना हुई थी। इसलिए नवरात्र में लोग नया कार्य जैसे ग्रह प्रवेश , कंछेदन, विवाह पक्का करना आदि रस्में आदि किए जाते हैं। लेकिन इस बार ऐसा करना मुश्किल लग रहा है। ज्योतिषियों ने इन नवरात्र में शुभ कार्य ना करने की सलाह दी है। ज्योतिषियों की मानें तो इन नवरात्र में शुभ कार्य करने से बचें। आइए जानते हैं, इन नवरात्र में क्यों नहीं कर पाएंगे शुभ कार्य
नवरात्र से पहले सूर्य की मीन संक्रांति और पंचक नहीं होंगे शुभ कार्य
चैत्र नवरात्र के समय खरमास की स्थिति होती है अर्थात सूर्य का गोचर देवगुरु बृहस्पति की राशि मीन में होने के कारण खरमास होता है। खरमास में शुभ नहीं किए जाते है, लेकिन नवरात्र में शुभ कार्य किे जाते हैं, ऐसे में ज्योतिर्विद पंडित दिवाकर त्रिपाठी ने बताया कि खरमास के समय में शुभ कार्यों को वर्जित माना गया है। हालांकि कुछ लोग इस समय शुभ कार्य करते हैं, लेकिन खरमास में इनसे बचना चाहिए। इसी कारण से विवाह मुंडन गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त का अभाव हो जाता है। यद्यपि कि नवरात्र को शुभ मानते हुए कुछ लोग नए कार्य का आरंभ कर देते हैं परंतु विवाह मुंडन गृह प्रवेश जैसे कार्यों को करने से बचना चाहिए क्योंकि परिणाम में नकारात्मकता आ सकती है। इसके साथ ही पंचांग के अनुसार 16 मार्च को शाम 6 बजकर 14 मिनट से पंचक भी शुरू हो रहे हैं। पंचक 20 मार्च को खत्म होंगे। इसलिए इस दौरान चैत्र नवरात्रि की शुरुआत भी 19 मार्च को पंचक में होगीष पंचक में भी शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है।
कलश स्थापना के लिए क्या है शुभ मुहूर्त
ज्योतिषीय गणना के अनुसार 19 मार्च को अमावस्या तिथि सुबह 6:40 बजे तक रहेगी, ऐसे में नवरात्र के लिए भी प्रतिपदा 19 को ही मानी जाएगी, क्योंकि सुबह 6.40 मिनट से चैत्र शुक्ल प्रतिपदा प्रारंभ होगी। इसी के साथ नवरात्र की लोग घरों में कलश स्थापना करेंगे। स्थाना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:41 बजे से सूर्यास्त से पहले तक रहेगा। इस बार मां दुर्गा का आगमन डोली से व विदाई हाथी पर होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हाथी पर देवी की विदाई शुभ और समृद्धि देने वाला माना जाता है। इसलिए नवरात्र शुभ कहे जा रहे हैं।
चैत्र नवरात्र की तिथियां
- प्रथम दिन (प्रतिपदा तिथि) :-19 मार्च दिन गुरुवार प्रतिपदा तिथि को माता शैलपुत्री की आराधना के साथ साथ मुखनिर्मालिका गौरी का पूजन अर्चन किया जाएगा।
- दूसरा दिन (द्वितीया तिथि) : 20 मार्च दिन शुक्रवार द्वितीया तिथि को ब्रह्मचारिणी माता की आराधना के साथ ज्येष्ठा गौरी का दर्शन पूजन किया जाएगा?
- तीसरा दिन (तृतीया तिथि) : 21 मार्च दिन शनिवार तृतीया तिथि को माता चंद्रघंटा की आराधना एवं सौभाग्य गौरी का पूजन दर्शन किया जाएगा ।
- चौथा दिन (चतुर्थी तिथि): 22 मार्च दिन रविवार चतुर्थी तिथि को कुष्मांडा देवी, श्रृंगार गौरी का पूजन किया जाएगा।
- पांचवा दिन (पंचमी तिथि) : 23 मार्च दिन सोमवार पंचमी तिथि को स्कंद माता की आराधना एवं विशालाक्षी गौरी माता की यात्रा के साथ दर्शन पूजन अर्चन किया जाएगा।
- छठवां दिन (षष्ठी तिथि) : 24 मार्च दिन मंगलवार षष्ठी तिथि को कात्यायनी माता की आराधना एवं ललिता गौरी माता का पूजन अर्चन किया जाएगा ।
- सातवां दिन (सप्तमी तिथि) : 25 मार्च दिन बुधवार सप्तमी तिथि को कालरात्रि माता की आराधना एवं भवानी गौरी की यात्रा के साथ पूजन अर्चन किया जाएगा ।
- आठवां दिन( अष्टमी तिथि) : 26 मार्च दिन गुरुवार अष्टमी तिथि को महागौरी देवी की आराधना पूजा किया जाएगा तथा मंगला गौरी माता का दर्शन किया जाएगा इसी दिन महानिशा का भी पूजा किया जाएगा। अष्टमी तिथि को कन्या पूजन करने वाले लोग आज ही कन्या पूजन करेंगे।
- नवां दिन (नवमी तिथि) : 27 मार्च दिन शुक्रवार नवमी तिथि को महानवमी का व्रत किया जाएगा । श्री रामनवमी का भी व्रत इसी दिन किया जाएगा । इस दिन माता सिद्धिदात्री की विधि विधान से पूजा की जाती है। साथ ही महालक्ष्मी गौरी का दर्शन भी किया जाता है । ---ज्योतिर्विद डॉ पंडित दिवाकर त्रिपाठी
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