Chaitra Amavasya 2026: चैत्र माह की अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या क्यों कहते हैं? कैसे पड़ा ये नाम

Mar 16, 2026 12:28 pm ISTNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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Chaitra Amavasya 2026: चैत्र अमावस्या 2026 को भूतड़ी अमावस्या क्यों कहते हैं? जानिए इस नाम का रहस्य और पौराणिक मान्यता। 18 मार्च को पितृ तर्पण, स्नान-दान और पितृ दोष निवारण के उपाय पढ़ें।

Chaitra Amavasya 2026: चैत्र माह की अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या क्यों कहते हैं? कैसे पड़ा ये नाम

हिंदू धर्म में हर अमावस्या का विशेष महत्व है, लेकिन चैत्र मास की कृष्ण पक्ष अमावस्या को पितरों की शांति और आशीर्वाद से जोड़ा जाता है। इस दिन तर्पण, दान और पितृ पूजन से पितृ दोष दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। इस अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या भी कहा जाता है। साल 2026 में चैत्र अमावस्या 18 मार्च, दिन - बुधवार को सुबह 8:25 बजे से शुरू होकर 19 मार्च, दिन - गुरुवार को सुबह 6:52 बजे तक रहेगी। अमावस्या का तर्पण और श्राद्ध 18 मार्च को ही किया जाएगा। आइए जानते हैं इस अमावस्या का महत्व और भूतड़ी अमावस्या नाम पड़ने का कारण।

चैत्र अमावस्या 2026 की तिथि और महत्व

पंचांग के अनुसार, चैत्र कृष्ण अमावस्या 18 मार्च 2026 को प्रारंभ होगी और 19 मार्च तक रहेगी। इस दिन पितरों का स्मरण, स्नान, तर्पण और दान करने से पूर्वज संतुष्ट होते हैं। मान्यता है कि पितरों की कृपा से पितृ दोष, ग्रह बाधाएं और पारिवारिक क्लेश दूर होते हैं। यह दिन नए साल (विक्रम संवत) के आरंभ के निकट होने से भी महत्वपूर्ण है।

भूतड़ी अमावस्या नाम क्यों पड़ा?

चैत्र अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इस दिन अमावस्या की रात्रि में सूक्ष्म और अदृश्य शक्तियों का प्रभाव अधिक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन पितृ लोक के द्वार खुलते हैं, जिससे पूर्वज धरती पर आकर अपने वंशजों से जुड़ते हैं। साथ ही, पितरों के साथ कुछ अदृश्य शक्तियां (भूत-प्रेत आदि) भी सक्रिय हो जाती हैं। इस कारण इसे भूतड़ी (भूतों वाली) अमावस्या कहने की परंपरा पड़ी। हालांकि, मुख्य उद्देश्य पितरों का तर्पण और शांति प्रदान करना है।

पितरों के लिए तर्पण और स्नान का महत्व

इस दिन सुबह स्नान करते समय पानी में काले तिल डालना शुभ माना जाता है। अगर संभव हो, तो गंगा स्नान या गंगाजल से स्नान करें। तर्पण में पितरों को तिल, जल, कुश और काले तिल से तर्पण करें। मान्यता है कि इससे अतृप्त पूर्वज संतुष्ट होते हैं और उनके आशीर्वाद से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। तर्पण के बाद दान-पुण्य करें।

नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के उपाय

भूतड़ी अमावस्या पर नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ सकता है। इससे बचने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ, महामृत्युंजय मंत्र जाप या हनुमान जी की पूजा करें। घर में गुग्गल या लोबान की धूप जलाएं। काले वस्त्र पहनने से बचें और सात्विक भोजन ग्रहण करें। ये उपाय मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखते हैं।

दान का विशेष महत्व और लाभ

चैत्र अमावस्या पर जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र, जूते-चप्पल या काले तिल का दान करना अत्यंत पुण्यकारी है। मान्यता है कि पितरों के नाम से किया गया दान पितृ दोष और ग्रह दोष को कम करता है। इससे धन-धान्य की वृद्धि होती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। दान सादगी से और श्रद्धापूर्वक करें।

चैत्र अमावस्या या भूतड़ी अमावस्या पितरों को याद करने और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर है। इस दिन तर्पण, दान और पूजा से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

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