नजर लगने पर दिखते हैं ये संकेत, जानें कैसे उतारें बुरी नजर; अपनाएं ये आसान उपाय

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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बुरी नजर को लेकर भारतीय समाज में कई पारंपरिक मान्यताएं हैं, हालांकि इनके प्रभाव का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। नजर लगने के संकेतों में बेचैनी, चिड़चिड़ापन, उदासी और काम में मन न लगना जैसी बातें मानी जाती हैं। नजर उतारने के लिए कई पारंपरिक उपाय किए जाते हैं।

Buri Nazar
Buri Nazar

नजर लगने की बात आपने घर-परिवार में अक्सर सुनी होगी। किसी बच्चे के अचानक रोने से लेकर किसी के अच्छे-भले काम में बार-बार रुकावट आने तक, कई चीजों को लोग नज़र लगने से जोड़कर देखते हैं। भारतीय समाज में बुरी नजर को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन आज भी बहुत से लोग इससे बचने और नजर उतारने के पारंपरिक उपाय करते हैं।

नजर लगने के क्या संकेत माने जाते हैं

मान्यता है कि नज़र लगने पर व्यक्ति का व्यवहार अचानक बदल सकता है। बिना किसी खास वजह के बेचैनी रहना, चिड़चिड़ापन बढ़ना, मन उदास रहना या काम में मन न लगना जैसे संकेतों को कुछ लोग बुरी नजर से जोड़ते हैं। बच्चों के मामले में भी ऐसी कई मान्यताएं हैं। बच्चा अचानक रोने लगे, ठीक से खाना न खाए या बिना वजह परेशान रहे तो कई घरों में इसे नज़र लगने से जोड़कर देखा जाता है। इसी तरह घर में अचानक तनाव बढ़ना या बनते काम में लगातार अड़चन आना भी कुछ लोगों के अनुसार नज़र का असर हो सकता है।

नजर कैसे उतारते हैं

नजर उतारने के लिए अलग-अलग जगहों पर अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं। आमतौर पर नमक, राई और सूखी लाल मिर्च का इस्तेमाल नजर उतारने के लिए किया जाता है। मान्यता के अनुसार इन चीजों को व्यक्ति के ऊपर से वारकर बाद में घर से बाहर कर दिया जाता है। कई परिवारों में नींबू-मिर्च का इस्तेमाल भी बुरी नजर से बचाव के लिए किया जाता है। वहीं बच्चों की नज़र उतारने के लिए नमक या राई को सिर के ऊपर से वारने की परंपरा कुछ घरों में आज भी है।

नजर उतारने का एक और प्रचलित तरीका

कुछ लोग कपूर जलाकर भी नज़र उतारने की मान्यता रखते हैं। इसके लिए कपूर जलाकर व्यक्ति के आसपास थोड़ी देर घुमाया जाता है। इसके बाद कपूर को सुरक्षित तरीके से जला दिया जाता है। मान्यता है कि इससे नकारात्मकता दूर होती है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

नजर लगने और नजर उतारने से जुड़ी बातें धार्मिक और लोक मान्यताओं का हिस्सा हैं। इनके प्रभाव को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। अगर किसी व्यक्ति को लगातार कमजोरी, बेचैनी या कोई शारीरिक परेशानी हो रही है तो उसे केवल नजर लगने से जोड़ने के बजाय सही कारण जानना जरूरी है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहता है।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi

योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि


योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।

एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य


योगेश के लिए ज्योतिष केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं है। वह इसे आत्मचिंतन और सही फैसलों में मदद करने वाले एक मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। इसी सोच के साथ वह राशिफल और अन्य ज्योतिषीय विषयों को संतुलित, व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को डराना नहीं, बल्कि जानकारी के जरिए उन्हें सोचने और समझने की दिशा देना है।


व्यक्तिगत रुचियां


काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।


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