
कल बुध प्रदोष व्रत पर 2 घंटे 44 मिनट का शिव पूजा मुहूर्त, जानें उपाय, विधि व नियम
Budha Pradosh Time, Pradosh Vrat 2025: दिसंबर का आखिरी प्रदोष व्रत पौष कृष्ण त्रयोदशी के दिन पड़ेगा। मान्यता है बुध प्रदोष का व्रत रखने और प्रदोष काल में भोलेनाथ की उपासना करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
Budha Pradosh Time, Pradosh Vrat 2025: 17 दिसंबर को है दिसंबर का आखिरी प्रदोष का व्रत। इस दिन प्रदोष काल में पूजा-अर्चना करने से भोले बाबा की असीम कृपा प्राप्त होती है। दिसंबर का आखिरी प्रदोष व्रत पौष मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन पड़ेगा। बुधवार को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। मान्यता है कि बुध प्रदोष का व्रत रखने और प्रदोष काल में भोलेनाथ की उपासना करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है और कई परेशानियों का निवारण भी होता है। इसलिए आइए जानते हैं दिसंबर के आखिरी प्रदोष व्रत की पूजा-विधि, उपाय, मंत्र, नियम और शुभ मुहूर्त-
कब से शुरू है प्रदोष व्रत?
इस साल दिसंबर का आखिरी प्रदोष व्रत 17 तारीख को रखा जाएगा। 16 दिसंबर को रात 11:57 मिनट पर त्रयोदशी तिथि आरंभ हो जाएगी और 18 दिसंबर को 02:32 ए एम पर यह तिथि समाप्त होगी।
कल बुध प्रदोष व्रत पर 2 घंटे 44 मिनट का शिव पूजा मुहूर्त, जानें उपाय, विधि व नियम
प्रदोष पूजा मुहूर्त - 05:27 पी एम से 08:11 पी एम
- ब्रह्म मुहूर्त- 05:18 ए एम से 06:13 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- कोई नहीं
- विजय मुहूर्त- 02:01 पी एम से 02:42 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 05:24 पी एम से 05:52 पी एम
- अमृत काल- 07:17 ए एम से 09:05 ए एम
- निशिता मुहूर्त- 11:50 पी एम से 12:45 ए एम, दिसम्बर 18
- सर्वार्थ सिद्धि योग- 05:11 पी एम से 07:08 ए एम, दिसम्बर 18
- अमृत सिद्धि योग- 05:11 पी एम से 07:08 ए एम, दिसम्बर 18
- लाभ- उन्नति 07:08 ए एम से 08:25 ए एम
- अमृत- सर्वोत्तम 08:25 ए एम से 09:42 ए एम
- शुभ- उत्तम 11:00 ए एम से 12:17 पी एम
- चर- सामान्य 02:52 पी एम से 04:10 पी एम
- लाभ- उन्नति 04:10 पी एम से 05:27 पी एम
- शुभ- उत्तम 07:10 पी एम से 08:52 पी एम
- अमृत- सर्वोत्तम 08:52 पी एम से 10:35 पी एम
बुध प्रदोष व्रत के नियम
- ब्रह्मा मुहूर्त में उठें
- स्नान कर सफेद रंग के वस्त्र पहनें
- मंत्र जाप करें
- प्रदोष व्रत में फलाहार का सेवन करें
- व्रत में नमक, लाल मिर्च और अन्न का सेवन न करें
- उत्तर-पूर्व की दिशा में मुख करके प्रभु की पूजा करें
उपाय- शिव चालीसा का पाठ 11 बार करें।
प्रदोष व्रत पूजा-विधि
बुधवार के दिन प्रदोष का व्रत रखने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें। इसके बाद संभव हो तो अपने घर के पास किसी शिव मंदिर में जाएं। सबसे पहले शिवलिंग का गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद शहद, दही, घी, दूध और गन्ने का रस समेत पंचामृत से भोले बाबा का अभिषेक करें। इसके बाद प्रभु पर सफेद चंदन, सफेद फूल, भांग, धतूरा और सफेद चावल चढ़ाएं। फिर भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान कार्तिकेय और नंदी महाराज को प्रसाद, कुमकुम और माला अर्पित करें। इसके बाद प्रभु की आरती उतारें। साथ ही ॐ नम: शिवाय या श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र का जप करें। अंत में भगवान शिव को घर की बनी सात्विक खीर का भोग भी लगा सकते हैं।
मंत्र: श्री शिवाय नमस्तुभ्यं, ॐ नम: शिवाय
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





