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अपने जीवन में नयापन लाएं, कल की नहीं, आज की करें चिंता

अपने जीवन में नयापन लाएं, कल की नहीं, आज की करें चिंता

संक्षेप:

इस नए वर्ष में कुछ नए गुण, नई सोच, नई विधा, नया चिंतन और कुछ अच्छे कर्म आप अपने जीवन में ले आएं। किसी नादान की तरह नहीं जिएं। जिएंं तो एक जाग्रत व्यक्ति की तरह जिएं। जब हम जाग्रत होकर जिएंगे, तो बाहर-अंदर सब कुछ नया होगा।

Jan 07, 2026 07:45 pm ISTShrishti Chaubey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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उपनिषद् में कहा गया है कि वास्तव में समय नहीं बीतता, हम बीत जाते हैं। हम इस नए वर्ष में नए गुण, नई सोच, नई विधा, नया चिंतन और अच्छे कर्म अपने जीवन में ले आएं। किसी नादान की तरह नहीं जिएं। जिएंं तो एक जाग्रत व्यक्ति की तरह जिएं। जब हम जाग्रत होकर जिएंगे, तो बाहर-अंदर सब कुछ नया होगा। आइए हम जाग्रत जीवन जीने का संकल्प लें और अपने जीवन में नयापन लाएं।

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मैं आपको कुछ संकल्प करने को कहूंगी, तो उसको आप आसानी से तोड़ सकते हो। जब आप खुद संकल्प करोगे कि मैं यह करूंगा, तो आप उसे खुशी से कर लोगे। आपका अहंकार और अपने प्रति प्यार आपको उस संकल्प को पूरा करने के लिए मजबूर करेगा।

अपनी आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत का यही सही समय है। शुरुआत इस चिंतन से करें कि अब तक आपने कितनी साधना की है? मन के कितने दोष दूर किए हैं? मन का कितना अज्ञान दूर किया है? बीते समय में क्या किया? पिछला साल तो यही सोचते निकल गया कि साधना आज शुरू करेंगे, कल शुरू करेंगे।

मन को अच्छी बातों से जोड़ें

नए साल में संकल्प करने की परंपरा है। बहुत-से लोग बहुत प्रकार के संकल्प करते हैं, जैसे- वजन कम करेंगे, मीठा नहीं खाएंगे, झूठ नहीं बोलेंगे। ऐसे संकल्प करना भी अच्छी बात है, क्योंकि उससे भी आपके मन की शक्ति बढ़ जाती है और मन की कमजोरी दूर हो जाती है। बहुत-से लोग संकल्प तो करते हैं, परंतु उसे पूरा नहीं कर पाते हैं, क्योंकि मन बेईमान हो जाता है। जरूरी है कि हम अपने मन पर नियंत्रण करें। उसके गुलाम नहीं बने। यह कठिन जरूर है, लेकिन असंभव नहीं है। इसके लिए जरूरी है ईमानदारीपूर्वक निरंतर प्रयास करने की।

जैसे पानी के लिए नीचे गिरना आसान और सहज होता है, परंतु अगर उसे ऊपर उठाना हो, तो मोटरपंप की जरूरत पड़ती है। ऐसे ही हमारे मन के लिए नीचे गिरना आसान और सहज है। मन को ऊंचा उठाना बहुत मुश्किल है। मन के लिए अच्छी बातों से जुड़ना बहुत मुश्किल है, उनको छोड़ देना सहज है।

कल की नहीं, आज की करें चिंता

मन की आदतें ऐसी होती हैं कि उन्हीं आदतों में मन को सुविधा महसूस होने लगती है। हमारा मन कुछ आदतों को पाल लेता है और उन्हीं में खुश रहता है। अगर आप अपनी दिनचर्या में साधना को बढ़ाने का संकल्प करते हैं, तो उसको बिना किसी अटकाव के सालभर चलाते रहना बहुत जरूरी है। भूतकाल बीत चुका है, परंतु वर्तमान आपके हाथ में है, इसलिए आनेवाले कल में क्या होगा, यह आपके आज पर निर्भर करता है। अगर आप अपने आज को साधनापूर्ण, शांतिपूर्ण और सुंदर बना लोगे, तो निश्चित रूप से आपका कल भी वैसा ही होगा। आनेवाले कल की चिंता आज नहीं करनी चाहिए, लेकिन आज की चिंता अवश्य करनी चाहिए। समस्या यह है कि लोग आनेवाले कल की चिंता तो बहुत करते हैं, पर आज की जरा भी नहीं करते।

नई सोच, नया चिंतन

मैं आपको कुछ संकल्प करने को कहूंगी, तो उसको आप आसानी से तोड़ सकते हो। जब आप खुद संकल्प करोगे कि मैं यह करूंगा, तो आप उसे खुशी से कर लोगे। आपका अहंकार और अपने प्रति प्यार आपको उस संकल्प को पूरा करने के लिए मजबूर करेगा, इसलिए यह विचार अवश्य करना चाहिए कि हम अपने जीवन की नैया को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं। नहीं तो सच बात यह है कि समय भागा जा रहा है। उपनिषद् में कहा है कि वास्तव में समय नहीं बीतता, हम बीत जाते हैं। साल नहीं बीता, हम बीत गए हैं।

जाग्रत मन से जिएं

इस नए वर्ष में कुछ नए गुण, नई सोच, नई विधा, नया चिंतन और कुछ अच्छे कर्म आप अपने जीवन में ले आएं। किसी नादान की तरह मत जिएं। जिएंं तो एक जाग्रत व्यक्ति की तरह होशपूर्वक जिएं। जाग्रत व्यक्ति की तरह जीने के लिए आपको जाग्रत व्यक्ति के साथ होना पड़ेगा। जाग्रत व्यक्ति के साथ होने का मतलब है कि वे जो ज्ञान दे रहे हैं, उस ज्ञान के साथ रहना।

सत्संग के साथ, विचार के साथ, चिंतन के साथ जिएं। हमारे विचार ऐसे उत्तम होने चाहिए कि हमारे हाथ से कभी कुछ गलत हो ही नहीं। हमारी जीभ कुछ गलत बोले ही नहीं, हमारी आंख कुछ गलत देखे ही नहीं, हमारे कान कुछ गलत सुनें ही नहीं।

इंद्रिय कामनाओं से बचें

याद रखना इस बात को कि जो कुछ आप अपने अंदर डालोगे, वही आपसे बाहर आएगा। वही देखें और सुनें, जिससे मन में प्रेम, करुणा, दया इत्यादि भावनाएं निर्मित हों। वही सुनें, जिससे साधना, ज्ञान, वैराग्य, भक्ति बढ़ती जाए। जिनसे मन में क्रोध, लोभ, कामना, दुविधा बढ़े, ऐसी चीजों से अपनी इंद्रियों को बचाएं। इंद्रिय जनित ये तात्कालिक सुख पहले तो इंसान को लुभाते हैं, फिर भरमाते हैं और फिर खूब भटकाते हैं। अंत में यही तात्कालिक सुख उसके समस्त दुखों का कारण बनते हैं।

अगर आप भक्ति और ज्ञान की राह पर चलना चाहते हैं, तो आपको यह बात समझनी हीहोगी कि आप बेहोशी में जीवन को नहीं जी सकते। समझदारी, सूझ-बूझ और होशपूर्वक जीवन जीने से आप अपने मन को अशांत होने से बचा सकते हैं।

मन शांत, सात्विक और शुद्ध रहेगा, तो फिर प्रभु उस मन में बड़ा सुंदर आसन जमाकर बैठ जाएंगे, इसलिए स्वयं को नया करना जरूरी है।

Shrishti Chaubey

लेखक के बारे में

Shrishti Chaubey
लाइव हिन्दुस्तान में बतौर कॉन्टेंट प्रोड्यूसर काम कर रही सृष्टि चौबे को पत्रकारिता में 2 साल से ज्यादा का अनुभव है। सृष्टि को एस्ट्रोलॉजी से जुड़े विषयों पर लिखने की अच्छी समझ है। इसके अलावा वे एंटरटेनमेंट और हेल्थ बीट पर भी काम कर चुकी हैं। सृष्टि ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, हस्तरेखा, फेंगशुई और वास्तु पर अच्छी जानकारी रखती हैं। खबर लिखने के साथ-साथ इन्हें वीडियो कॉन्टेंट और रिपोर्टिंग में भी काफी रुचि है। सृष्टि ने जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। अपने कॉलेज के दिनों में इन्होंने डाटा स्टोरी भी लिखी है। साथ ही फैक्ट चेकिंग की अच्छी समझ रखती हैं। और पढ़ें
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