Hindi Newsधर्म न्यूज़Braj ki 84 kos yatra par kyon jate hai jane importance
आखिर लोग ब्रज की 84 कोस की यात्रा पर क्यों जाते हैं, क्या है ये

आखिर लोग ब्रज की 84 कोस की यात्रा पर क्यों जाते हैं, क्या है ये

संक्षेप:

ब्रजभूमि, वही पवित्र भूमि जहां भगवान कृष्ण का जन्म हुआ और उन्होंने बचपन बिताया। यहां उन्होंने अपनी दिव्य लीलाएं- जैसे रासलीला, बाल-लीला कीं। यहां की 84 कोस धार्मिक यात्रा काफी प्रसिद्ध है। यह प्राचीन यात्राओं में से एक मानी जाती है।

Dec 18, 2025 05:59 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

ब्रजभूमि, वही पवित्र भूमि जहां भगवान कृष्ण का जन्म हुआ और उन्होंने बचपन बिताया। यहां उन्होंने अपनी दिव्य लीलाएं- जैसे रासलीला, बाल-लीला कीं। यहां की 84 कोस धार्मिक यात्रा काफी प्रसिद्ध है। यह प्राचीन यात्राओं में से एक मानी जाती है। ऐसे में आज हम जानेंगे कि ब्रज की 84 कोस यात्रा क्या है और लोग इस यात्रा पर क्यों जाते हैं।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

ब्रज 84 कोस यात्रा ब्रजभूमि के सम्पूर्ण क्षेत्र की परिक्रमा है। इस क्षेत्र में भक्त मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना, नंदगांव, गोकुल, राधाकुंड, यमुना तट और अनेक लीलास्थलों का दर्शन करते हैं। यह यात्रा कृष्ण चरित, राधा रास और ब्रज लीलाओं से जुड़े सभी पवित्र स्थलों की परिक्रमा है। 84 कोस की यात्रा 252 किलोमीटर लंबी परिक्रमा है। इस यात्रा में 200 से अधिक पवित्र स्थल शामिल हैं, जिसके अंतर्गत मंदिर, कुंड, वन, पर्वत आदि आते हैं।

यात्रा से लाभ

  1. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक 84 कोस की यात्रा करने से साधक के पापों का नाश होता है।

2. साथ ही साधक की सभी मनोकामनाओं पूरी होती है।

3. इसके अलावा जीवन में शांति, सौभाग्य और भक्ति का संचार करती है।

4. मान्यता है कि यह यात्रा एक महायज्ञ के समान मानी जाती है।

कब और कैसे करें यात्रा
अब सवाल आता है कि यह यात्रा कैसे और कब की जाती है। इसका जवाब है कि 84 कोस की यात्रा पूरे साल में की जाती है। पर इस यात्रा के लिए सबसे शुभ समय कार्तिक माह यानि अक्तूबर से नवंबर को माना जाता है। इसके अलावा वैशाख मास, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और हरिद्वार कुंभ-स्नान के आसपास भी कई लोग यात्रा करते हैं।

84 कोस की यात्रा दो प्रकार से की जाती है। कुछ लोग पैदल यात्रा करते हैं, जो सबसे पारंपरिक और पुण्यकारी मानी जाती है। इसमें लगभग 40–60 दिन लगते हैं। वहीं, दूसरा तरीका बस या कार से है। इसमें यात्रा 3 से 7 दिनों में पूरी की जा सकती है।

क्यों की जाती है यह यात्रा
84 कोस की यात्रा को लेकर कई किवदंतियां प्रचलित हैं। वराह पुराण के मुताबिक धरती पर करीब 66 अरब तीर्थ हैं, लेकिन जब चातुर्मास आता है, तो इन सभी का वास ब्रज में होता है। यही कारण है कि चातुर्मास में ही 84 कोस की परिक्रमा की जाती है।

दूसरी कथा

अन्य कथा के मुताबिक एक बार यशोदा माता और नंद बाबा ने इच्छा प्रकट की और कहा कि वो चारधाम की यात्रा पर जाना चाहते हैं। यशोदा माता और नंद बाबा की ओर ये इच्छा प्रकट किए जाने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने सभी तीर्थों को ब्रज में ही बुला लिया, ताकि वह उनके दर्शन कर सकें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

ये भी पढ़ें:Sakat Chauth 2026: कब है सकट चौथ, क्यों मनाते हैं यह पर्व
ये भी पढ़ें:नए साल की शुरुआत में बन रहा लक्ष्मी से जुड़ा यह योग, इन राशियों की चांदी
Dheeraj Pal

लेखक के बारे में

Dheeraj Pal
डिजिटल जर्नलिजम में करीब 6 साल का अनुभव। एजुकेशन, स्पोर्ट्स, टेक-ऑटो और धर्म बीट पर मजबूत पकड़ है। यूट्यूब कंटेंट प्रोड्यूसर व रिपोर्टिंग का भी अनुभव। हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। और पढ़ें
जानें धर्म न्यूज़ ,Choti Diwali Wishes , Rashifal, Panchang , Numerology से जुडी खबरें हिंदी में हिंदुस्तान पर| हिंदू कैलेंडर से जानें शुभ तिथियां और बनाएं हर दिन को खास!