Braj Ki Holi 2026: वृंदावन में बांके बिहारी जी को लगा रंग और गुलाल, होली पर क्या-क्या भोग लगेगा

Navaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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रंगभरी एकादशी पर वृंदावन में ठाकुर जी को रंग और गुलाल लगाया गया। मंदिर का आंगन अबीर-गुलाल से रंगा नजर आया। भक्तों ने सुबह-सुबह प्रसादी गुलाल बरसाया और ठाकुर जी के साथ होली की शुरुआत की। आइए जानते हैं वृंदावन में बांके बिहारी जी की होली का पूरा नजारा…

Braj Ki Holi 2026: वृंदावन में बांके बिहारी जी को लगा रंग और गुलाल, होली पर क्या-क्या भोग लगेगा

वृंदावन में होली का उत्साह इन दिनों चरम पर है। बांके बिहारी जी के मंदिर में रंगभरी एकादशी पर ठाकुर जी को रंग और गुलाल लगाया गया। मंदिर का आंगन अबीर-गुलाल से रंगा नजर आया। भक्तों ने सुबह-सुबह प्रसादी गुलाल बरसाया और ठाकुर जी के साथ होली की शुरुआत की। फूलों की पंखुड़ियां, जलेबी और लड्डू लुटाए गए। यह सब कुछ ब्रज की होली की खास परंपरा का हिस्सा है। आइए जानते हैं वृंदावन में बांके बिहारी जी की होली का पूरा नजारा और होली पर ठाकुर जी को क्या-क्या भोग लगेगा।

वृंदावन में बांके बिहारी जी को रंग-गुलाल लगाने की शुरुआत

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में रंगभरी एकादशी पर पुजारियों ने सुबह ठाकुर जी को रंग और अबीर लगाया। मंदिर का पूरा प्रांगण गुलाल से सराबोर हो गया। भक्तों ने प्रसादी गुलाल बरसाया और ठाकुर जी के जयकारे लगाए। फूलों की पंखुड़ियां और लड्डू-जलेबी लुटाई गई। भक्त अबीर से रंगे हुए ठाकुर जी के दर्शन कर खुशी से झूम उठे। गलियों में ढोल-नगाड़ों की थाप और 'राधे-राधे' के जयकारे गूंज रहे हैं। यह नजारा ब्रज की होली की भक्ति और उल्लास का जीता-जागता प्रमाण है।

बांके बिहारी जी को लगने वाला विशेष भोग

होली के दौरान बांके बिहारी जी को विशेष भोग तैयार किया जाता है। आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी के अनुसार, ठाकुर जी को काबुली मेवा, कश्मीरी केसर, कन्नौजिया इत्र, कर्नाटकी चंदन और हाथरस से लाए प्राकृतिक अबीर-गुलाल का उपयोग किया जाता है। भोग में मुख्य रूप से चाट, जलेबी और पकवान शामिल होते हैं। चाट में दहीबड़ा, दही पकौड़ी, सोंठ बड़ा, सोंठ पकौड़ी, आटा-सूजी की टिकिया, पानी पूरी, समोसा, पकोड़े, गुजिया, पापड़ी, खाजा, ठोर और लठोर प्रमुख हैं। इसके अलावा काजू, बादाम, पिस्ता, अखरोट, पोस्त, खरबूजा के बीज, किसमिस, मुनक्का, गुलकंद और दूध-मलाई युक्त ठंडाई भी ठाकुर जी को अर्पित की जाती है।

होली पर ठाकुर जी को लगने वाले व्यंजन और मिठाइयां

होली के भोग में ठाकुर जी को मैदा और आलू से बनी स्वादिष्ट जलेबियां, गुजिया और मलपुआ विशेष रूप से चढ़ाए जाएंगे। ये व्यंजन ब्रज की परंपरा के अनुसार तैयार किए जाते हैं। ठाकुर जी को मिठाई के साथ ठंडाई भी अर्पित की जाती है। यह भोग प्रेम और भक्ति का प्रतीक है। भक्तों का मानना है कि ठाकुर जी को चढ़ाया गया भोग प्रसाद के रूप में मिलता है और उससे घर में सुख-शांति बनी रहती है। होली के दौरान ठाकुर जी को रंग-गुलाल के साथ यह भोग लगाने से भक्तों को विशेष कृपा प्राप्त होती है।

बांके बिहारी जी के दर्शन और भक्तों का उत्साह

बांके बिहारी मंदिर में होली के दौरान भक्तों की भारी भीड़ रहती है। ठाकुर जी को रंग लगाने के बाद भक्त अबीर से सराबोर होकर दर्शन करते हैं। गलियों में भक्त राधे-राधे बोलते हुए गुलाल उड़ाते हैं। कई भक्त लड्डू गोपाल को गोद में लेकर चलते हैं। महिलाएं भी ठाकुर जी के साथ होली खेलती नजर आती हैं। ढोल-नगाड़ों पर झूमते भक्त 'आज ब्रज में होली रे रसिया' गाते हैं। वृंदावन की पंचकोसी परिक्रमा भी इन दिनों भक्तों की भीड़ से गुलजार रहती है। यह उत्साह काशी से लेकर ब्रज तक फैलता है।

रंगभरी एकादशी पर बांके बिहारी जी को लगाया गया रंग

ब्रज की होली उत्सव के दौरान रंगभरी एकादशी पर बांके बिहारी जी को रंग लगाया जाता है। इस दिन ठाकुर जी को विशेष शृंगार और भोग भी अर्पित करते है। भक्तों का मानना है कि रंगभरी एकादशी से होली का रस शुरू होता है और यह उत्सव फाल्गुन पूर्णिमा तक चलता है। वृंदावन में ठाकुर जी के दर्शन से भक्तों को प्रेम और भक्ति का आशीर्वाद मिलता है। यह परंपरा ब्रज की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है।

बांके बिहारी जी की होली ब्रज की सबसे अनोखी और भक्तिमय होली है। रंग, गुलाल, फूल और भोग से सजा यह उत्सव भक्तों के मन को रस में डुबो देता है।

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नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


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डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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