रत्न शास्त्र: नीलम के साथ भूलकर भी ना पहनें ये रत्न, किस्मत चमकाने की जगह बना देगा कंगाल! इन 4 गलतियों से बचें

Garima Singh लाइव हिन्दुस्तान
share

रत्न शास्त्र के हिसाब से नीलम पहनते वक्त कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए। अगर इस रत्न से जुड़ी गलतियां कर दी तो ये गलत असर भी डाल सकता है और इस वजह से कंगाली का रास्ता भी खुल सकता है। ऐसे में नीलम को धारण करने से पहले कुछ चीजों को जान लेना जरूरी है।

रत्न शास्त्र: नीलम के साथ भूलकर भी ना पहनें ये रत्न, किस्मत चमकाने की जगह बना देगा कंगाल! इन 4 गलतियों से बचें

रत्न शास्त्र की दुनिया में नीलम को सबसे ज्यादा असरदार रत्न माना जाता है। माना जाता है कि अगर ये रत्न किसी व्यक्ति को सूट कर जाए तो उसकी किस्मत चमक सकती है। वहीं अगर इसे गलत तरीके से पहन लिया जाए तो नुकसान भी दोगुना ज्यादा ही होगा। कई बार लोग सही जानकारी के बिना ही इस रत्न को धारण कर लेते हैं। ऐसी स्थिति में फिर आर्थिक स्थिति बिगड़ती है और जिंदगी में तनाव बढ़ता है। ऐसे में जरूरी है कि नीलम पहनने से पहले कुछ खास बातों का ध्यान रखा जाए ताकि इसका फायदा मिले ना कि इससे पहनने से सारे काम ही रुक जाएं। आज जानेंगे उन 4 गलतियों के बारे में जो अक्सर लोग करते हैं और इससे बचने की जरूर है।

नीलम के साथ भूलकर भी ना पहनें ये रत्न, किस्मत चमकाने की जगह बना देगा कंगाल-

ज्योतिषी की सलाह बिना ना पहनें नीलम

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नीलम का संबंध शनि ग्रह से जुड़ा हुआ है। शनि का असर क्या होता है ये तो हर कोई जानता है। ऐसे में नीलम को पहनने से पहले किसी जानकार ज्योतिषी की सलाह जरूर लेनी चाहिए। दरअसल नीलम हर किसी को सूट नहीं करता है। अक्सर लोग दूसरों को देखकर या फिर फैशन के नाम पर नीलम पहन लेते हैं जोकि बिल्कुल भी सही नहीं है। ऐसा करने से आप खुद ही परेशानियों को बुलावा दे देंगे। अगर कुंडली अनुसार नीलम आपको सूट नहीं करता तो इसे पहनने से असर उलटा भी हो सकता है। ऐसे में जल्दबाजी ना करके हमेशा जानकार की सलाह लेकर ही इसे धारण करना चाहिए।

गलत उंगली या धातु में ना पहनें नीलम

नीलम को पहनते वक्त अक्सर लोग छोटी-छोटी गलतियां कर देते हैं। रत्नशास्त्र के हिसाब से इसे सही धातु में ही बनवाना चाहिए। साथ ही अगर इसे गलत उंगली में पहन लिया जाए तो नीलम गलत असर डाल सकती है। इसे चांदी या फिर पंचधातु में ही बनवाना बेहतर माना जाता है। नियम के हिसाब से नीलम को दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली में ही पहनना चाहिए। इतना ध्यान रखें कि सही तरीके से अगर नीलम को पहना जाए तभी ये अपना असर सही से दिखा पाती है।

इन रत्नों के साथ ना पहनें नीलम

रत्न शास्त्र के हिसाब से नीलम को बहुत तेज असर वाला रत्न माना जाता है। ऐसे में इसके साथ हम कौन सा दूसरा रत्न पहन रहे हैं इसका जानना भी जरूरी है। दरअसल कुछ रत्न ऐसे होते हैं जो साथ में मिलकर सही एनर्जी नहीं बनाते हैं। शास्त्र के हिसाब से नीलम के साथ कभी भी माणिक, मोती और मूंगा गलती से भी नहीं पहनना चाहिए। ये सारे रत्न नीलम के साथ सही नहीं जाते हैं। गलत कॉम्बिनेशन के साथ पहने हुए रत्न हमेशा गलत असर डालते हैं। ऐसे में फायदे की जगह बस नुकसान ही होगा।

सही दिन धारण करें नीलम

नीलम धारण करने के कुछ नियम हैं, जिन्हें सही से अपनाना जरूरी है। सही तरीके से धारण किया गया नीलम जिंदगी बदल सकता है। रत्न शास्त्र के अनुसार इसे हमेशा शनिवार के दिन ही पहनना शुभ माना जाता है। आम तौर पर लोग इस बात का ध्यान नहीं रखते हैं और इसे किसी भी दिन धारण कर लेते हैं जोकि सही तरीका नहीं है। शनिवार के दिन गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध करने के बाद ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का 108 बार जाप करके ही नीलम को पहनना चाहिए।

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए रत्न शास्त्र विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न शास्त्र
फेंगशुई
हस्तरेखा शास्त्र

और पढ़ें
जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!