रत्न शास्त्र: नीलम सिर्फ इन 4 राशियों के लिए होता है सूटेबल, जिंदगी से खत्म होती हैं ये दिक्कतें
रत्न शास्त्र की दुनिया में नीलम को काफी असरदार माना जाता है। हालांकि ये सिर्फ कुछ राशियों को ही सूट करता है। ऐसे में जानते हैं इसके बारे में-

रत्न शास्त्र हर एक रत्न का संबंध किसी ना किसी ग्रह से बताया गया है। मान्यता है कि कुंडली और राशि अनुसार सही रत्न पहनने से जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। बात की जाए नीलम की तो इसे ब्लू सफायर के नाम से भी जाना जाता है। इसका संबंध शनि ग्रह से है और दिखने में चमकीले नीले रंग का होता है। बता दें कि शनि मेहनत करवाता है। साथ ही इस ग्रह के जरिए व्यक्ति के अंदर धैर्य करने की क्षमता विकसित हो जाती है। शास्त्र के हिसाब से नीलम धारण करते ही लोग अपने काम में फोकस कर पाते हैं और ऐसे में तरक्की के दरवाजे खुल जाते हैं। हालांकि ये रत्न हर किसी को सूट नहीं करता है। तो आइए जानते हैं कि ये किन राशियों को सूट करता है और उनकी जिंदगी कैसे बदलता है?
इन 4 राशियों को पहनना चाहिए नीलम
वृषभ राशि
रत्न शास्त्र के अनुसार नीलम वृषभ राशि के लिए काफी सूटेबल बताया जाता है। इसकी मदद से वृषभ राशि के लोग अपने काम में स्टेबिलिटी महसूस कर सकते हैं। लोगों का मानना है कि नीलम पहनने से वृषभ राशि वालों के अंदर धैर्य आता है। साथ ही व्यक्ति जल्दबाजी में फैसला लेने से बच जाता है। ऐसे में करियर में आगे बढ़ने के मौके भी खूबप मिलते हैं। इन वजहों से ही वृषभ राशि वालों को नीलम जरूर पहनना चाहिए।
तुला राशि
तुला राशि वालों को नीलम काफी सूट करता है। रत्न और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नीलम की मदद से तुला राशि वालों की सोच में क्लैरिटी आती है। नीलम धारण करने के बाद तुला राशि के व्यक्ति सही समय पर सही फैसला लेकर जिंदगी को सही दिशा दे सकते हैं। इस रत्न की मदद से चीजों को संभालना तुला राशि वालों के लिए आसान हो जाता है।
कन्या राशि
कन्या राशि वालों को भी नीलम पहनने की सलाह दी जाती है। कन्या राशि वाले काफी मेहनती होते हैं। अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए इस राशि के लोग खूब मेहनत करते हैं। नीलम धारण करने से कन्या राशि वालों के काम में निरंतरता बनी रहती है। ऐसे में धीरे-धीरे इन लोगों को सक्सेज मिल ही जाती है। नीलम की मदद से कन्या राशि वाले धैर्य से फैसले ले पाते हैं।
मिथुन राशि
मिथुन राशि वालों के लिए नीलम किसी मिरेकल से कम नहीं है। दरअसल कई बार ऐसा होता है कि मिथुन राशि के लोग एक ही समय पर कई चीजें सोचने लगते हैं। ऐसी स्थिति में कन्फ्यूजन जरूर बढ़ता है। रत्न शास्त्र के अनुसार नीलम धारण करने से मिथुन राशि के जातकों में स्थिरता आती है। ऐसे में किसी भी काम में फोकस लगा पाना आसान होता है। साथ ही ऐसे में कोई भी फैसला आसानी से लिया जा सकता है।
नीलम धारण करने से दूर होती है ये दिक्कतें
रत्न शास्त्र के हिसाब से नीलम धारण करने से काम में बार-बार आने वाली रुकावटें कम हो जाती हैं। साथ ही इससे मन भी स्टेबल होता है। वहीं नीलम की एनर्जी ऐसी होती है कि इससे फोकस भी बेहतर किया जा सकता है। ऐसे में धीरे-धीरे मेहनत का फल मिलने लगता है। हालांकि नीलम हमेशा किसी जानकर ज्योतिष को दिखाकर ही धारण करना चाहिए।
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए रत्नशास्त्र विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो:
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
वास्तु शास्त्र
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