Bhaum Pradosh Vrat Katha: यहां पढ़ें भौम प्रदोष व्रत की कथा
Bhaum Pradosh Vrat Katha kahani: प्रदोष व्रत में व्रत कथा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत की कथा पढ़े या सुने बिना व्रत अधूरा माना जाता है। अगर आप भी प्रदोष व्रत रखते हैं, तो यहां पढ़ें भौम प्रदोष व्रत कथा।

Bhaum Pradosh Vrat Ki Katha: हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। आज 25 अगस्त 2026, मंगलवार को भौम प्रदोष व्रत का संयोग बना है। त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को समर्पित है। मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित है। ऐसे में भौम प्रदोष व्रत भगवान शिव के साथ हनुमान जी की कृपा पाने के लिए उत्तम माना गया है। मान्यता है कि जब प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़े तो भगवान शिव और माता पार्वती के साथ हनुमान जी का विधि-विधान से पूजन करना चाहिए। इस व्रत के पुण्य प्रभाव से जातक को सुख-शांति और खुशहाली मिलने के साथ मंगल ग्रह के अशुभ प्रभावों से छुटकारा भी मिलता है। प्रदोष व्रत में पूजन के साथ व्रत कथा का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि व्रत कथा को पढ़ने या सुनने के बाद ही व्रत के संपूर्ण फल की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं भौम प्रदोष व्रत की कथा।
भौम प्रदोष व्रत की कथा:
अत्यंत प्राचीन काल की घटना है। एक नगर में एक बुढ़िया रहती थी। उसका एक मंगलिया नाम का बेटा था। बूढ़ी औरत को हनुमान जी पर अटूट विश्वास था। इसलिए वह प्रत्येक मंगलवार को विधि-विधान के साथ व्रत करती और हनुमान जी का भोग लगाती थी। मंगलवार के दिन वह ना ही घर लीपती थी और न ही मिट्टी खोदती थी।
वृद्धा की हनुमान जी ने ली परीक्षा
इस तरह से व्रत करते हुए उसे कई वर्ष बीत गए तो हनुमान जी ने विचार किया कि चलो आ इस वृद्धा के भक्ति की परीक्षा करें। वे साधु का रूप धारण करके उसके द्वार पर आए और पुकारा- है कोई हनुमान का भक्त जो हमारी इच्छा को पूरा कर सके। वृद्धा ने यह पुकार सुनी तो भागकर बाहर आई और कहा कि महाराज क्या आज्ञा है? साधु रूप में हनुमान जी बोले- ‘मैं बहुत भूखा हूं, भोजन करुंगा। तू थोड़ी सी जमीन लीप दे।’ वृद्धा बहुत दुविधा में पड़ गई और अंत में हाथ जोड़कर प्रार्थना की- ‘हे महाराज, लीपने और मिट्टी खोदने के अलावा जो काम कहें वह मैं करने को तैयार हूं।’
साधु ने तीन बार परीक्षा करने के बाद कहा- ‘तू अपने बेटे को बुला मैं उसे ओंधा लिटाकर उसकी पीठ पर आग जलाकर भोजन बनाऊंगा।’ वृद्धा ने सुना तो उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई। मगर वह वचन हार चुकी थी। उसने मंगलिया को पुकार कर साधु महाराज के हवाले कर दिया। लेकिन साधु रूप में आए हनुमान जी माने वाले नहीं थे। उन्होंने वृद्धा के हाथों से ही मंगलिया को ओंधा लिटाकर उसकी पीठ पर आग जलवाई।
हनुमान जी ने वृद्धा को दिए दर्शन
आग जलाकर दुखी मन से वृद्धा अपने घर में घुस गई। जब भोजन तैयार हो गया तब साधु ने वृद्धा को बुलाकर कहा कि वह मंगलिया को पुकारे ताकि वह भी आकर भोग लगा सके। वृद्धा की आंख में आंसू आ गए और बोली उसका नाम लेकर आप मेरे दिल को नहीं दुखाएं। लेकिन साधु महाराज नहीं माने उन्होंने वृद्धा को मंगलिया को आवाज लगाने के लिए फिर से कहा। वृद्धा ने अपने बेटे को पुकारा और पुकारते ही उसका बेटा हंसता खेलता बाहर से घर में दौड़ा आया। मंगलिया को जीता जागता देखकर वृद्धा चकित रह गई। वह साधु महाराज के चरणों में गिर गई। साधु महाराज से उसे असली रूप में दर्शन दिए। हनुमान जी के दर्शन प्राप्त करके वृद्धा के समस्त दुख दूर हो गए और जीवन सफल हो गया।


