भौम प्रदोष पर शिवलिंग का अभिषेक करते समय ना करें ये 3 गलतियां, जानिए किस पात्र से करें अभिषेक
Bhaum Pradosh Vrat: क्या आप भी शिवलिंग पर तांबे के लोटे से दूध चढ़ाते हैं? जानिए भौम प्रदोष के दिन अभिषेक में भूलकर भी न की जाने वाली 3 बड़ी गलतियां और सही पूजा विधि।

प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष को भौम प्रदोष कहा जाता है। इस बार 8 सितंबर 2026 को यानी आज भौम प्रदोष मनाया जा रहा है। इस दिन प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक करने की विशेष परंपरा है। हालांकि, शिव जी की पूजा करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी माना गया है।
अभिषेक के लिए सही पात्र
शिवलिंग का अभिषेक करते समय पात्र का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आमतौर पर जलाभिषेक के लिए तांबे के पात्र का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन दूध के लिए इस पात्र को इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पीतल, चांदी या स्टील के पात्र से दूध चढ़ाया जा सकता है। दूध जब तांबे के संपर्क में आता है, तो उसे विष के समान बना देता है। ऐसे में तांबे के पात्र का इस्तेमाल केवल जल चढ़ाने के लिए करना चाहिए।
शिवलिंग पर ये चीजें ना चढ़ाएं
शिव पूजा में हर सामग्री का अपना अलग महत्व माना गया है। मान्यता के अनुसार, शिवलिंग पर सिंदूर और कुमकुम अर्पित नहीं करना चाहिए। इसी तरह तुलसी दल, केतकी के फूल और नारियल पानी भी शिव पूजा में हैं। पूजा करते समय बेलपत्र, चंदन, भस्म और जल जैसी सामग्रियों का इस्तेमाल कर शिव जी की कृपा प्राप्त करें।
शंख से अभिषेक करने से बचें
शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए शंख का गलती से भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके पीछे धार्मिक कथा और मान्यता जुड़ी हुई है। इसलिए अगर आप घर पर या शिवालय में भौम प्रदोष की पूजा कर रहे हैं, तो सामान्य पात्र से जल की पतली धार में अभिषेक करना बेहतर रहेगा।
जलाभिषेक करते समय इन बातों का रखें ध्यान
शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय बहुत तेज धार रखने के बजाय धीरे-धीरे जल अर्पित करने की परंपरा है। पूजा करते समय स्वच्छता और मन की एकाग्रता का भी ध्यान रखना चाहिए। भौम प्रदोष पर शिवजी का ध्यान करते हुए शांत मन से अभिषेक करें और 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें।
भौम प्रदोष व्रत के दिन शिवजी की कृपा पाने के लिए इन नियमों और सावधानियों का पालन करना अनिवार्य है। भक्ति भाव के साथ सही दिशा, सही पात्र और वर्जित वस्तुओं का त्याग करके पूजा की जाती है, तो महादेव अपने भक्त की हर मनोकामना पूरी करते हैं।


