Shiv ji ki kahani: भगवान शिव के तीसरे नेत्र की कैसे हुई उत्पत्ति? पौराणिक कथा से जानें रहस्य

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Lord shiva third eye story in hindi: इस समय सावन चल रहा है, जो कि भगवान शिव का प्रिय महीना है। इस पावन और शुभ अवसर पर आज हम बता रहे हैं भगवान शिव के तीसरे नेत्र के प्राकट्य के बारे में। जानें भगवान शिव को कैसे मिला था तीसरा नेत्र।

Bhagwan shiv ki teesri aankh ka rahasya
भगवान शिव को कैसे मिला था तीसरा नेत्र? पढ़ें कहानी

Bhagwan Shiv ko teesri aankh kaise mili: शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव की तीन आंखें हैं। तीसरी आंख शक्ति, प्रलय (संहार), दिव्य ज्ञान और सर्वोच्च चेतना का प्रतीक है। इसे 'त्रिनेत्र' या 'ज्ञान चक्षु' कहा जाता है। शिव जी की दाहिनी आंख सूर्य और बाईं आंख में चंद्रमा का वास है। भगवान शंकर की तीसरी आंख विनाश और सृजन दोनों का द्वार मानी जाती है। कहा जाता है कि जब धर्म के विरुद्ध कोई काम होता है, तब उनका यह नेत्र खुलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव का तीसरा नेत्र कैसे प्रकट हुआ? पढ़ें यहां पौराणिक कथाएं।

भगवान शिव के तीसरे नेत्र की उत्पत्ति से जुड़ी पौराणिक कथा:

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव की पीछे से जाकर उनकी दोनों आंखों पर अपने हाथ रख दिए। जैसे ही शिव जी की आंखें बंद हुईं, पूरी सृ्ष्टि घोर अंधकार में डूब गई। अंधकार से ग्रस्त ब्रह्मांड में हाहाकार मच गया। मनुष्य, पशु-पक्षी सभी परेशान हो गए। उस समय भगवान शिव ने अपनी शक्ति से माथे पर एक नेत्र प्रकट किया, जिससे दिव्य प्रकाश निकला और सृष्टि फिर से प्रकाशमय हो उठी।

बाद में जब माता पार्वती ने भगवान शिव से तीसरी आंख के बारे में प्रश्न किया तो भगवान शंकर ने बताया कि उनकी आंखें चंद्रमा और सूर्य के समान हैं। अगर वह उस समय अपनी तीसरी आंख प्रकट नहीं करते, तो पूरी सृष्टि का विनाश हो जाता।

कामदेव से जुड़ी है एक कथा:

एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, माता सती की मृत्यु के बाद भगवान शिव गहरे शोक और समाधि में चले गए। वह दुनियादारी की सभी चीजों से विरक्ति हो गए। दुनिया के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए भगवान शिव का विवाह करना जरूरी था। तब समस्त देवी-देवताओं के अनुरोध पर उन्हें समाधि से जगाने के लिए कामदेव ने एक पुष्प बाण चलाया, जिससे शिवजी के मन में इच्छाएं जाग्रत हो सकें और वे अपनी समाधि से बाहर आएं। इससे क्रोधित होकर भगवान शिव ने अपना तीसरा नेत्र खोला, जिससे निकली अग्नि से कामदेव भस्म हो गए।

अग्नि का प्रतीक है भगवान शिव की तीसरी आंख:

भगवान शिव की तीसरी आंख अग्नि का प्रतीक है। यह क्रोध का नहीं बल्कि अहंकार, वासना, अज्ञान को नष्ट करने वाली दिव्य चेतना का प्रतीक है। भगवान शिव का ज्ञान चक्षु संसार के मोह-माया से परे सत्य, असत्य, छल, काम, अहंकार और माया को देखने में सक्षम है। कहा जाता है कि यह उन तत्वों को नष्ट करती है जो सृष्टि के संचालन या संतुलन में बाधा बनते हैं। कहते हैं कि शिव जी की तीसरी आंख का प्रकाश इतना तेज है कि पूरी सृष्टि भस्म हो सकती है। शिव जी की तीसरी आंख शक्ति का भी प्रतीक मानी जाती है। भगवान शिव अपनी तीसरी आंख हमेशा बंद रखते हैं, जो यह सिखाता है कि अपार शक्ति होने पर उसमें विवेक और संयम होना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Saumya Tiwari

लेखक के बारे में

Saumya Tiwari

संक्षिप्त विवरण

सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा हैं और इस संस्थान के साथ करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जुड़ी हैं। इन्हें डिजिटल पत्रकारिता में करीब 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां वह ग्रह राशि परिवर्तन, टैरो, वैदिक ज्योतिष, फेंगशुई, अंकराशि, रत्न शास्त्र और व्रत-त्योहार आदि से जुड़ी खबरें लिखती हैं।


विस्तृत बायो


परिचय और अनुभव

सौम्या तिवारी की ग्रह राशि परिवर्तन, व्रत-त्योहार, सामुद्रिक शास्त्र, अंकज्योतिष, वास्तु शास्त्र एवं फेंगशुई, कथा-कहानी जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ है। उन्हें ज्योतिष एवं धार्मिक विषयों में करीब 6 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर डिप्टी कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं और धर्म व ज्योतिष (एस्ट्रोलॉजी) सेक्शन का हिस्सा हैं।


इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।


इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।


व्यक्तिगत रुचियां

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।


विशेषज्ञता

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