भक्त, उतने ही भक्ति के रूप

Mar 04, 2026 02:18 pm ISTAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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मानस में भक्त के चार प्रकार बताए गए हैं- ज्ञानी, जिज्ञासु, अर्थार्थी एवं आर्त। चार प्रकार के भक्तों की बात कह देना बहुत सरल है। भक्ति में वास्तविकता-अवास्तविकता का प्रश्न पहले नहीं उठाया जाता। जब तैरना सीख जाएंगे,

भक्त, उतने ही भक्ति के रूप

मानस में भक्त के चार प्रकार बताए गए हैं- ज्ञानी, जिज्ञासु, अर्थार्थी एवं आर्त। चार प्रकार के भक्तों की बात कह देना बहुत सरल है। भक्ति में वास्तविकता-अवास्तविकता का प्रश्न पहले नहीं उठाया जाता। जब तैरना सीख जाएंगे, तभी नदी में उतरेंगे, ऐसा नहीं कहा जा सकता।इसका तो श्रीगणेश ही व्यक्ति की अपनी मान्यता से होता है। संसार सत्य है या असत्य? विषय को चाहना उचित है या अनुचित? प्रारंभिक स्थिति में इन विवादों की कोई आवश्यकता नहीं। यहां तो सीधा आमंत्रण है।

गवान का सुख पाना, उसमें एक हो जाना

तुम संकट से त्राण पाना चाहते हो! ये सब प्रभु से ही संभव है। ब्रह्म-सुख पाना चाहते हो, तो आओ, प्रारंभ कर दो प्रभु के चरणों में भक्ति। अर्थ और अभिलाषाओं की पूर्ति चाहते हो! रहस्य जानना चाहते हो! सब सर्वदा प्रभु द्वारा साध्य होगा।भय और लोभ की सहज वृत्ति से भक्ति का श्रीगणेश होता है। भगवान की जिज्ञासा भक्ति का मध्यभाग है। भगवान का सुख पाना, उसमें एक हो जाना, भक्ति की चरम परिणति है। भय से संत्रस्त आर्त हैं। लोभ से प्रेरित अर्थार्थी हैं। जानने की इच्छा वाला जिज्ञासु है। जान पाने वाला ज्ञानी है। मानस में-‘ग्यानी प्रभुहि बिसेषि पिआरा’ कहकर गोस्वामीजी ने पुष्ट कर दिया है।

एकता का एक केंद्र है-‘राम से संबंध।’

मानस में भक्तों की ओर देखें, तो साधारण से लेकर असाधारण चरित्र वाले अनेक पात्र हमारे सामने आते हैं। दशरथ, गीध, वाल्मीकि, शबरी, कोल, भील, वानर, निशाचर आदि सब वहां (भक्ति में) एक पंक्ति में खड़े हुए दिखाई देंगे। ऐसी उदारता, जो कि अन्यत्र असंभव है। पात्रों में स्वभाव, आचार, विचार, आकांक्षा आदि किसी में भी साम्य नहीं है। बस, एकता का एक केंद्र है-‘राम से संबंध।’

मानस में भक्ति की भी अनेक प्रसंगों में व्याख्या है

उसका विभाजन भी अनेक रूपों में किया गया है। भक्ति के नव भेद हैं। इस नवधा भक्ति का विभाजन भी दो भिन्न-भिन्न प्रसंगों में पृथक-पृथक रूपों में किया गया है। शबरी से कथित नवधा भक्ति और लक्ष्मण को दिए गए उपदेश में भक्ति का वर्णन भिन्न रूपों में किया गया है। वाल्मीकि द्वारा राम-आवास के लिए बनाए गए स्थानों में भक्ति का विभाजन चौदह रूपों में किया गया। इस प्रकार बाह्य दृष्टि से देखें, तो बड़ी उलझन प्रतीत होती है, पर इसका निष्कर्ष एक ही है। वस्तुतः संसार में जितनी भांति की मनोवृत्ति वाले भक्त हैं, भक्ति के उतने ही भेद हो सकते हैं। अब वर्णन की सुविधा के लिए उसका विभाजन कुछ स्थिर रूपों में किया जा सकता है। उसे चार, नव, चौदह की सीमा में बांधकर जान लीजिए! एक भक्त है, जो भगवान की आराधना करता है, इस आराधना में उसका पूरा परिवार ‘साथी’ है।

भगवान मात्र को’ स्वीकार कर लिया जाए

भक्ति शास्त्र में यदि आर्त या अर्थार्थी को भक्त मान लिया गया, तो इसका तात्पर्य इन वस्तुओं को साध्य बना लेना नहीं है। भक्ति में मानसिक वृत्तियों के संकोचन की प्रणाली बड़ी अनोखी है। साधारण व्यक्ति के जीवन में विविध आकांक्षाएं हैं और उनकी पूर्ति के लिए अनेक आलंबन। अतएव वह अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए यत्र-तत्र भटकता रहता है। फिर भी जरूरी नहीं कि उसकी सभी इच्छाएं पूरी हों। भक्ति का प्रथम पग यही है कि इच्छाएं भले ही अनेक हों, पर उनके अनेक आलंबनाें के स्थान पर एक आलंबन ‘भगवान मात्र को’ स्वीकार कर लिया जाए। स्वार्थ-पूर्ति की दृष्टि से भी भक्ति मत में यही मार्ग श्रेष्ठ है।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

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शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।


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