मार्गशीर्ष अमावस्या पर तिल के तेल का दीपक जलाने से क्या-क्या लाभ होगा?

मार्गशीर्ष अमावस्या पर तिल के तेल का दीपक जलाने से क्या-क्या लाभ होगा?

संक्षेप:

Margashirsha Amavasya 2025: इस साल यानी 2025 में मार्गशीर्ष अमावस्या 20 नवंबर, दिन गुरुवार को पड़ रही है। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन तिल के तेल का दीया जलाने का विधान है। ऐसे में आज हम जानेंगे कि इस दिन तिल के तेल का दीपक क्यों जलाया जाता है और इससे क्या-क्या लाभ मिलते हैं?

Nov 13, 2025 12:26 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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हिंदू धर्म में मार्गशीर्ष अमावस्या का खास महत्व होता है। यह तिथि भगवान विष्णु की पूजा और पितरों के तर्पण के लिए सबसे शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इस तिथि पर भगवान विष्णु की कृपा से घर-परिवार में सौभाग्य और वैभव का आगमन होता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और विष्णु भगवान की आराधना करने का विधान है। इस साल मार्गशीर्ष अमावस्या 20 नवंबर, दिन गुरुवार को पड़ रही है। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन तिल के तेल का दीया जलाने का विधान है। ऐसे में आज हम जानेंगे कि इस दिन तिल के तेल का दीपक क्यों जलाया जाता है और इससे क्या-क्या लाभ मिलते हैं?

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महत्व
वैसे हर अमावस्या पर तिल के तेल का दीया जलाना शुभ माना जाता है, लेकिन मार्गशीर्ष अमावस्या पर तिल के तेल का दीया जलाने के विशेष लाभ मिलते हैं। मान्यतानुसार, तिल का संबंध पितरों से होता है। इसके अलावा, काले तिल का नाता भगवान शिव और शनिदेव से भी माना गया है। ऐसे में मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन तिल के तेल का दीया जलाने से पितृ शांत होते हैं।

लाभ
मार्गशीर्ष अमावस्या पर भगवान शिव के सामने तिल के तेल का दीपक जलाना पुण्य फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इससे भगवान शिव की कृपा मिलती है। साथ ही कैसी भी बुरी नजर हो वह उतर जाती है और नकारात्मक ऊर्जा भी घर और जीवन से हमेशा के लिए चली जाती है। इतना ही नहीं, मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन शनिदेव के निमित्त तिल के तेल का दीया जलाने से शनि दोष दूर होता है। साथ ही इससे शनि की साढ़े साती और ढैय्या के दुष्प्रभाव से छुटकारा मिल जाता है। कुंडली में शनि मजबूत होते हैं।

कहां और कितने दीये जलाएं
अब सवाल उठता है कि मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन तिल के तेल का दीपक कितना जलाना चाहिए और इसे कहां-कहां रखना शुभ होता है। ज्योतिषियों की मानें, तो इस विशेष अमावस्या पर तिल के तेल के 11 दीये जलाने चाहिए। 3 अलग-अलग दीये तो महादेव, शनिदेव और पितृ देव के होते हैं, इसके अलावा चौथा दीया घर के मुख्य द्वार पर जलाना चाहिए।

अन्य दीपक यहां जलाएं
पांचवें दीये की बात करें, तो इसे पीपल के पेड़ के नीचे जलाना शुभ होता है। क्योंकि पीपल में पितरों का वास माना जाता है। साथ ही इससे सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। छठा दीया घर की छत पर जलाना चाहिए क्योंकि छत का संबंध राहु ग्रह से माना गया है। अन्य दीये आप घर के अलग-अलग स्थानों पर जला सकते हैं।

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लेखक के बारे में

Dheeraj Pal
डिजिटल जर्नलिजम में करीब 6 साल का अनुभव। एजुकेशन, स्पोर्ट्स, टेक-ऑटो और धर्म बीट पर मजबूत पकड़ है। यूट्यूब कंटेंट प्रोड्यूसर व रिपोर्टिंग का भी अनुभव। हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। और पढ़ें
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