बेलपत्र की लकड़ी का चंदन लगाने से महादेव होते हैं प्रसन्न, जानिए विधि, महत्व और लाभ
हिंदू धर्म में बेलपत्र का विशेष महत्व होता है। इसे बिल्व पत्र भी कहा जाता है। बेलपत्र को भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक शिव पूजा इसके बिना अधूरी मानी जाती है। लेकिन आज हम जानेंगे कि बेलपत्र की लकड़ी का चंदन कैसे लगाएं और इसके फायदे क्या-क्या हैं?

हिंदू धर्म में बेलपत्र का विशेष महत्व होता है। इसे बिल्व पत्र भी कहा जाता है। बेलपत्र को भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक शिव पूजा इसके बिना अधूरी मानी जाती है। बेलपत्र के तीन पत्ते भगवान शिव के त्रिशूल और त्रिनेत्र का प्रतीक माने जाते हैं। इसकी धार्मिक महत्ता इतनी अधिक है कि इसे मोक्ष देने वाला भी कहा गया है। मान्यता है कि यदि किसी की अंतिम यात्रा बिल्व वृक्ष की छाया से होकर गुजरे, तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए लोग बेलपत्र चढ़ाते हैं। बेलपत्र ही नहीं बल्कि इसकी लकड़ी का भी खास महत्व होता है। लोग इससे जुड़े उपाय करते हैं। कहते हैं कि बेलपत्र की लकड़ी का चंदन लगाने से शिव जी प्रसन्न होते हैं। चलिए जानते हैं कि बेलपत्र की लकड़ी का चंदन कैसे लगाएं और इसके फायदे क्या-क्या है?
बेलपत्र का महत्व
शास्त्रों में बेलपत्र को पापों का नाश करने वाला बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करने से पापों का नाश होता है, मन को शांति मिलती है और कालसर्प दोष व ग्रहों से जुड़ी बाधाएं भी कम होती हैं। बेल वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु, शाखाओं में ऋषि-मुनि और पत्तियों में शिव का वास माना गया है। इसलिए बेलपत्र अर्पित करना त्रिदेवों की संयुक्त पूजा के समान फल देता है। यही वजह है कि लोग शिव पूजा के दौरान बेलपत्र से जुड़े कई उपाय करते हैं। इन्हीं में से एक उपाय है बेलपत्र की लकड़ी का चंदन लगाना।
बेलपत्र की लकड़ी का चंदन लगाने से लाभ
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक बेलपत्र की लकड़ी का चंदन लगाने से भी भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्त की सारी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। लेकिन अगर इसे सही तरीके से लगाया जाए तब इसका लाभ मिलता है। कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के मुताबिक यदि सूखी हुई बेलपत्र की लकड़ी का चंदन शिव को लगाकर अपने माथे पर लगाते हैं, तो दुनिया में किसी की सामर्थता नहीं है कि तुमको हरा दे। तुमको विजय की प्राप्ति होती है।
बेलपत्र की उत्पत्ति
बेलपत्र की उत्पत्ति को लेकर शिवपुराण में एक कथा का वर्णन है। कथा के मुताबिक एक बार देवी पार्वती कठोर तपस्या में लीन थीं, तब उस दौरान उनके शरीर से गिरी पसीने की कुछ बूंदों से ही बेल वृक्ष का जन्म हुआ। इसी कारण बेल वृक्ष को माता पार्वती का ही स्वरूप माना जाता है और इसमें उनके कई दिव्य रूपों का वास बताया गया है। मान्यता है कि बेल वृक्ष की जड़ों में माता गिरिजा, तने में माहेश्वरी, शाखाओं में दक्षिणायनी और पत्तियों में स्वयं देवी पार्वती का निवास होता है। इसके फल में मां कात्यायनी और फूलों में माता गौरी का स्वरूप माना जाता है।
शिवजी को क्यों है प्रिय
दरअसल, बेलपत्र में माता पार्वती का ही हिस्सा है, इसलिए इसे अत्यंत पवित्र माना गया और भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हुआ। बेलपत्र को शिव-पार्वती की संयुक्त ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसे भगवान शिव को अर्पित करना अत्यंत फलदायी माना गया है। कहा जाता है कि जो भक्त श्रद्धा से शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाता है, उस पर भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और उसकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
धन वृद्धि के लिए उपाय
सोमवार या प्रदोष तिथि के दिन 108 बेलपत्र लें और प्रत्येक बेलपत्र पर चंदन से “ॐ नमः शिवाय” लिखें। इसके बाद इन सभी बेलपत्रों को एक-एक करके भगवान शिव को अर्पित करें। पूजा के बाद इन्हीं में से सात बेलपत्र अलग निकालकर घर के धन स्थान, जैसे तिजोरी या अलमारी में रख दें। मान्यता है कि इस उपाय को करने से धन में वृद्धि होती है और घर में मां लक्ष्मी का वास बना रहता है।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव
धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
न्यूमरोलॉजी
रत्न विज्ञान


