Basoda 2026: कब है शीतला अष्टमी या बसोड़ा? जानिए इस दिन क्यों नहीं जलाते हैं चूल्हा

Mar 05, 2026 04:45 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
share

Basoda 2026: होली के 8 दिन बाद चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी मनाई जाती है। इस दिन से जुड़ी कई मान्यताएं प्रचलिए है। इनमें एक मान्यता है कि इस दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता है। चलिए जानते हैं कि इस बार शीतला अष्टमी या बसोड़ा कब है और इस दिन चूल्हा क्यों नहीं जलाया जाता है।

Basoda 2026: कब है शीतला अष्टमी या बसोड़ा? जानिए इस दिन क्यों नहीं जलाते हैं चूल्हा

हिंदू पंचांग के मुताबिक चैत्र माह में कई व्रत व त्योहार ऐसे हैं, जिनका खास महत्व होता है। इन्हीं में से एक है शीतला अष्टमी या बसोड़ा। यह पर्व हर साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन मां शीतला की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन व्रत रखने का भी विधान है। इस व्रत से जुड़ी कई मान्यताएं प्रचलिए है। इनमें एक मान्यता है कि इस दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता है। चलिए जानते हैं कि इस बार शीतला अष्टमी या बसोड़ा कब है और इस दिन चूल्हा क्यों नहीं जलाया जाता है।

कब है शीतला अष्टमी 2026
होली के 8 दिन बाद चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी मनाई जाती है। इस साल शीतला अष्टमी यानी बसोड़ा 11 मार्च को है। दृक पंचांग के अनुसार, चैत्र कृष्ण अष्टमी तिथि का आरंभ 11 मार्च को रात्रि 1 बजकर 54 से होगा और यह 12 मार्च को प्रात: 04:19 बजे तक रहेगी। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, शीतला अष्टमी या बासोड़ा का पर्व 11 मार्च दिन बुधवार को है।

रोगों से बचाने वाली देवी
माता शीलता को मां पार्वती का अवतार माना जाता है। इन्हें रोगों से बचाने वाली देवी माना गया है। सबसे खास बात है कि इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता बल्कि, एक दिन पहले बने खाने को खाया जाता है। इसी से देवी की पूजा भी की जाती है। शीतला माता की पूजा का स्किन इंफेक्शन या चेचक, खसरा और अन्य संक्रामक रोगों से बचाव के लिए खास महत्व बताया जाता है।

इस दिन नहीं जलाते हैं चूल्हा
शीतला अष्टमी को बसौड़ा या बसोड़ा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग अपने घरों में चूल्हा नहीं जलाते हैं। क्योंकि इस दिन शीतला माता की पूजा की जाती है और उनको बासी भोजन का भोग लगाते हैं। बासोड़ा का भोग एक दिन पहले यानि सप्तमी की रात में बनाया जाता है। फिर ठंडा यानि बासी भोग अगले दिन अष्टमी को शीतला माता को अर्पित करते हैं। इसलिए इस दिन चूल्हा नहीं जलता है। उनको जो भोग लगाते हैं, वहीं पूरा परिवार खाता है। मान्यता है कि इस दिन चूल्हा जलाने से मां शीतला नाराज हो जाती है।

शीतला अष्टमी पूजा-विधि
शीतला अष्टमी या बसोड़ा के दिन सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर नहा लें। फिर पूजा की थाली में दही, पुआ, रोटी, बाजरा, सप्तमी को बने मीठे चावल, नमक पारे और मठरी रखें। इसके अलावा दूसरे पात्र में आटे से बना दीपक, रोली, वस्त्र, अक्षत, हल्दी, मोली, होली वाली बड़कुले की माला, सिक्के और मेहंदी रखें। दोनों थालियों के साथ में ठंडे पानी का लोटा भी रख दें। अब शीतला माता की पूजा करें। माता को सभी चीज़े चढ़ाने के बाद खुद और घर से सभी सदस्यों को हल्दी का टीका लगाएं।

इन मंत्रों का करें जाप
ऊं शीतलायै नमः
ऊं श्रीं शीतलायै नमः
ऊं अष्टदल पत्रयुक्ता शीतला पतये नमः
ऊं शीतलां शान्तिदात्रीं शरणं भगवतीं हुम्।
ऊं सदा शीतलायै नमः

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Dheeraj Pal

लेखक के बारे में

Dheeraj Pal

संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव

धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
न्यूमरोलॉजी
रत्न विज्ञान

और पढ़ें
जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!