Basant Panchami: क्या सरस्वती पूजा के अगले दिन मूर्ति का विसर्जन करना सही है? जानिए नियम

Jan 23, 2026 10:33 am ISTNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
share

बसंत पंचमी के दिन घर-घर में मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र की स्थापना की जाती है और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। पूजा के बाद अगले दिन मूर्ति का विसर्जन करने की परंपरा बहुत प्रचलित है। आइए जानते हैं बसंत पंचमी पर मूर्ति स्थापना और विसर्जन के नियम।

Basant Panchami: क्या सरस्वती पूजा के अगले दिन मूर्ति का विसर्जन करना सही है? जानिए नियम

बसंत पंचमी को मां सरस्वती का अवतरण दिवस माना जाता है। इस दिन घर-घर में मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र की स्थापना की जाती है और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। पूजा के बाद अगले दिन (षष्ठी तिथि) मूर्ति का विसर्जन करने की परंपरा बहुत प्रचलित है। लेकिन कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या पूजा के अगले दिन ही मूर्ति का विसर्जन करना सही है? क्या इसे और दिनों तक घर में रखना बेहतर नहीं? शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार इसका जवाब है - हां, अगले दिन विसर्जन करना ही सबसे उचित और शास्त्रोक्त है। आइए विस्तार से जानते हैं बसंत पंचमी पर मूर्ति स्थापना और विसर्जन के नियम, समय और महत्व।

बसंत पंचमी पर मूर्ति स्थापना का महत्व

बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करने का बहुत विशेष महत्व है। यह दिन अबूझ मुहूर्त वाला माना जाता है, अर्थात इस दिन किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अलग से मुहूर्त नहीं देखना पड़ता। मां सरस्वती ज्ञान, बुद्धि, विद्या, वाणी और कला की देवी हैं। इस दिन उनकी मूर्ति स्थापित करने से घर में ज्ञान की प्राप्ति होती है, बच्चों की पढ़ाई में सफलता मिलती है और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मूर्ति स्थापना से पहले घर और पूजा स्थल को साफ करें, गंगाजल का छिड़काव करें और पीले या सफेद वस्त्र बिछाकर चौकी तैयार करें। मूर्ति को पूर्व या उत्तर दिशा में रखें, क्योंकि ये दिशाएं ज्ञान और बुद्धि की देवी के लिए शुभ मानी जाती हैं।

विसर्जन क्यों किया जाता है और अगले दिन का महत्व

हिंदू परंपरा में किसी भी बड़ी मूर्ति की स्थापना के बाद उसका विसर्जन करना अनिवार्य माना जाता है। बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करने के बाद अगले दिन (षष्ठी तिथि) विसर्जन करने की परंपरा है। ऐसा इसलिए क्योंकि पूजा का समय सीमित होता है और मां को लंबे समय तक घर में रखने से उनकी ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है। अगले दिन विसर्जन करने से मां की कृपा घर में बनी रहती है और साथ ही पूजा का विधिवत समापन होता है। पंचांग के अनुसार, बसंत पंचमी के अगले दिन सुबह सूर्योदय के बाद और षष्ठी तिथि के दौरान विसर्जन करना सबसे शुभ होता है। शाम को सूर्यास्त के बाद विसर्जन से बचना चाहिए।

विसर्जन की सही विधि और समय

विसर्जन की विधि बहुत सरल लेकिन श्रद्धापूर्ण होनी चाहिए। विसर्जन से पहले मां सरस्वती की अंतिम पूजा करें। उन्हें धूप, दीप, फूल और भोग अर्पित करें और अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें। पूजा के कलश को हल्का हिलाकर उसके जल का छिड़काव पूरे घर में करें। इससे घर में विद्या और सुख-शांति बनी रहती है। इसके बाद मूर्ति को साफ कपड़े में लपेटकर किसी पवित्र नदी, तालाब या जलाशय में प्रवाहित करें। अगर नदी पास ना हो, तो घर में ही बड़े बर्तन में जल भरकर विसर्जन कर सकते हैं। विसर्जन करते समय 'ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः' मंत्र का जाप करें और मां से विदाई की प्रार्थना करें।

विसर्जन के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें

विसर्जन करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें। सूर्यास्त के बाद विसर्जन ना करें, क्योंकि यह समय नकारात्मक ऊर्जा का होता है। मूर्ति को हमेशा सम्मानपूर्वक लपेटकर ले जाएं और जल में प्रवाहित करते समय पैरों से ना छुएं। आज के समय में पर्यावरण के प्रति जागरूकता जरूरी है, इसलिए मिट्टी की इको-फ्रेंडली मूर्तियों का उपयोग करें। विसर्जन के बाद घर में गंगाजल का छिड़काव करें और घी का दीपक जलाकर मां का आभार व्यक्त करें। अगर किसी कारणवश अगले दिन विसर्जन ना हो सके, तो बसंत पंचमी के दिन शाम से पहले ही विसर्जन कर सकते हैं।

बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की मूर्ति स्थापना और अगले दिन विसर्जन दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। सही समय और विधि से विसर्जन करने से मां की कृपा बनी रहती है और घर में विद्या, बुद्धि और सुख-शांति का वास होता है। छोटी-सी गलती से पूजा का फल कम हो सकता है, इसलिए नियमों का पालन जरूर करें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

लेखक के बारे में

Navaneet Rathaur

संक्षिप्त विवरण

नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


विस्तृत बायो परिचय और अनुभव

डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


विशेषज्ञता (Areas of Expertise)

अंक ज्योतिष
हस्तरेखा विज्ञान
वास्तु शास्त्र
वैदिक ज्योतिष

और पढ़ें
जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!