Hindi Newsधर्म न्यूज़Baikunth Chaturdashi 2025: Date, Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Significance and Remedies
बैकुंठ चतुर्दशी कब है? नोट कर लें सही डेट, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और उपाय

बैकुंठ चतुर्दशी कब है? नोट कर लें सही डेट, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और उपाय

संक्षेप:

बैकुंठ चतुर्दशी हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मनाई जाती है। इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। बैकुंठ चतुर्दशी को बैकुंठ चौदस भी कहा जाता है। इस दिन काशी यानी वाराणसी में खास रौनक रहती है।

Nov 02, 2025 04:35 pm ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान
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Baikunth Chaturdashi 2025: बैकुंठ चतुर्दशी हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मनाई जाती है। इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। बैकुंठ चतुर्दशी को बैकुंठ चौदस भी कहा जाता है। इस दिन काशी यानी वाराणसी में खास रौनक रहती है। यहां बाबा विश्वनाथ का पंचोपचार विधि से पूजन और भव्य महाआरती की जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा निशीथकाल यानी मध्यरात्रि में की जाती है, जबकि भगवान शिव की पूजा अरुणोदयकाल में यानी सूर्योदय से पहले के समय में की जाती है।भक्त काशी के मणिकर्णिका घाट पर प्रातःकाल स्नान करते हैं, जिसे मणिकर्णिका स्नान कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह स्नान आत्मा को शुद्ध करता है। इस पावन दिन भगवान शिव को तुलसीदल अर्पित करते हैं और भगवान विष्णु को बेलपत्र चढ़ाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और भगवान शिव भगवान विष्णु की।

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बैकुंठ चतुर्दशी 2025 की तारीख और शुभ मुहूर्त

तिथि: 4 नवंबर 2025, मंगलवार

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 4 नवंबर, सुबह 2:05 बजे

चतुर्दशी तिथि समाप्त: 4 नवंबर, रात 10:36 बजे

निशीथकाल पूजा मुहूर्त: रात 11:39 से 12:31 (5 नवंबर)

पूजा-सामग्री की लिस्ट-

स्वच्छ कपड़े

गंडा या कमल के फूल

तुलसी पत्ता, बेलपत्र

घी का दीया, पेड़ का धूप-बत्ती

शुद्ध जल, गंगाजल (यदि संभव हो)

पंचमृत् (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) – यदि संभव हो

खीर या मिठाई, फल-प्रसाद

अक्षत (चावल+हल्दी)

शंख, घंटी, दीपक

पूजा-विधि

सुबह जल्दी उठें, स्वच्छ स्नान करें और शुद्ध कपड़े पहनें।

मंदिर या पूजा की जगह को साफ-सुथरा करें, यदि संभव हो तो गंगाजल या शुद्ध जल छिड़कें।

पूजा-मंडप में भगवान विष्णु एवं भगवान शिव की मूर्ति/चित्र रखें या उनकी प्रतिमा को ध्यान में रखें।

उचित मुहूर्त (विशेषकर निशीथकाल) का ध्यान रखें — विष्णु जी की पूजा मध्यरात्रि (निशीथ) में और शिवजी की आराधना सूर्योदय के समय (अरुणोदय) में करना शुभ माना गया है।

पूजा की आरंभ-प्रक्रिया में व्रत का संकल्प लें और हाथ जोड़कर दोनों देवताओं से भक्तिपूर्वक प्रार्थना करें।

पहले विष्णु जी की पूजा करें- जलाभिषेक करें, फिर फूल-फलों, कमल या गंदा के पुष्प अर्पित करें, दीपक जलाएं, तुलसी-पत्र व अन्य उपादान अर्पित करें।

इसके बाद शिवजी की पूजा करें- शुद्ध जल, पंचमृत्, बेलपत्र अर्पित करें, धूप-दीप करें।

दोनों देवताओं को इस प्रकार पूजा करें कि जैसे वे एक-दूसरे की पूजा कर रहे हों — उदाहरणस्वरूप, विष्णु जी शिवजी को बेलपत्र अर्पित करते हैं, शिवजी विष्णु जी को तुलसी अर्पित करते हैं।

अंत में आरती करने के बाद भोग प्रसाद चढ़ाएं। देवता का आशीर्वाद लें और जरूरतमंद को दान एवं भोजन कराना उत्तम माना जाता है।

बैकुंठ चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है

शिवपुराण के अनुसार, कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु भगवान शिव की पूजा करने काशी पहुंचे थे। उन्होंने एक हजार कमल के फूलों से शिवजी की आराधना की थी। विष्णु जी की भक्ति देखकर भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए। तभी से यह परंपरा शुरू हुई कि इस दिन शिव और विष्णु दोनों की पूजा की जाती है।

नर्मदेश्वर शिवलिंग की होती है पूजा- इस अवसर पर भक्त तुलसी दल से नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा करते हैं। नर्मदा नदी से प्राप्त शिवलिंग को नर्मदेश्वर कहा जाता है। मान्यता है कि जहां नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना होती है, वहां यम और काल का भय नहीं रहता। इस दिन इनका पूजन करने से सुख-समृद्धि बढ़ती है, मन में सकारात्मकता आती है और दांपत्य जीवन में प्रेम और शांति बनी रहती है।

बैकुंठ चतुर्दशी पर करें ये उपाय-

दीपदान करें-

इस दिन घर के बाहर दीप जलाने की विशेष परंपरा है। कई लोग इस मौके पर 365 बातियों का दीपक जलाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से पूरे वर्ष की पूजा का पुण्य एक साथ प्राप्त होता है। दीपदान करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और जीवन में शुभ फल बढ़ते हैं।

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Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi
योगेश जोशी हिंदुस्तान डिजिटल में सीनियर कंटेंट प्रड्यूसर हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के मेहला गांव के रहने वाले हैं। पिछले छह सालों से पत्रकरिता कर रहे हैं। एनआरएआई स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेश से जर्नलिज्म में स्नातक किया और उसके बाद 'अमर उजाला डिजिटल' से अपने करियर की शुरुआत की, जहां धर्म और अध्यात्म सेक्शन में काम किया।लाइव हिंदुस्तान में ज्योतिष और धर्म- अध्यात्म से जुड़ी हुई खबरें कवर करते हैं। पिछले तीन सालों से हिंदुस्तान डिजिटल में कार्यरत हैं। अध्यात्म के साथ ही प्रकृति में गहरी रुचि है जिस कारण भारत के विभिन्न मंदिरों का भ्रमण करते रहते हैं। और पढ़ें
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