Baglamukhi Jayanti 2026: ये हैं देश के 3 प्रसिद्ध बगलामुखी मंदिर, इन चीजों को चढ़ाने से प्रसन्न होती है माता

Apr 16, 2026 10:44 am ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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इस साल बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। देशभर में माता को समर्पित कई मंदिर हैं, जहां दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ रहती है। ऐसे में आज हम आपको देश के कुछ फेमस बगलामुखी माता के मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां आम आदमी से लेकर कई प्रमुख हस्तियां और राजनेता भी मत्था टेकने आते हैं।

Baglamukhi Jayanti 2026: ये हैं देश के 3 प्रसिद्ध बगलामुखी मंदिर, इन चीजों को चढ़ाने से प्रसन्न होती है माता

वैशाख माह में कई महत्वपूर्ण तीज त्योहार पड़ते हैं, जिनका खास महत्व होता है। इन्हीं में से एक बगलामुखी जयंती। बगलामुखी जयंती वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक दस महाविद्याओं में शामिल मां बगलामुखी को विशेष रूप से शक्तिशाली और प्रभावशाली देवी माना जाता है। मां बगलामुखी को 10 महाविद्याओं में आठवां स्थान मिला हुआ है। इस दिन माता बगलामुखी की पूजा अर्चना व व्रत किया जाता है। मान्यता है कि उनकी उपासना करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली बड़ी से बड़ी बाधाएं दूर हो सकती हैं। इस साल बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। देशभर में माता को समर्पित कई मंदिर हैं, जहां दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ रहती है। ऐसे में आज हम आपको देश के कुछ फेमस बगलामुखी माता के मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां आम आदमी से लेकर कई प्रमुख हस्तियां और राजनेता भी मत्था टेकने आते हैं।

देश के फेमस बगलामुखी मंदिर

1. बगलामुखी मंदिर नलखेड़ा

2. बगलामुखी माता दतिया

3. बगलामुखी मंदिर कांगड़ा हिमाचल प्रदेश

बगलामुखी मंदिर नलखेड़ा

तीन मुख वाली मां बगलामुखी का प्रसिद्ध मंदिर मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के नलखेड़ा में लखुंदर नदी के किनारे स्थित है। मान्यता है कि यह मंदिर महाभारत काल से जुड़ा हुआ है और पांडवों ने यहां युद्ध में विजय के लिए साधना की थी। पहले माता को “देहरा” नाम से जाना जाता था। यहां पूजा में हल्दी और पीले रंग की सामग्री का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता का प्राकट्य हल्दी रंग के जल से हुआ था, इसलिए इन्हें पीताम्बरा देवी भी कहा जाता है। मां बगलामुखी के कई स्वरूप माने जाते हैं और उनकी साधना विशेष रूप से रात्रि में करने से सिद्धि प्राप्त होती है। इनके भैरव भगवान महाकाल माने जाते हैं। इस मंदिर में माता बगलामुखी के अतिरिक्त माता लक्ष्मी, कृष्ण, हनुमान, भैरव और सरस्वती भी विराजमान हैं।

​बगलामुखी माता दतिया

मां बगलामुखी का एक और प्रसिद्ध मंदिर मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित है, जिसे पीताम्बरा पीठ के नाम से जाना जाता है। यह शक्तिपीठ शत्रु नाश और राजसत्ता की अधिष्ठात्री देवी मां पीतांबरा को समर्पित है। यहां भक्त मां की पूजा बगलामुखी स्वरूप में करते हैं। मंदिर परिसर में मां पीतांबरा के साथ खंडेश्वर महादेव और धूमावती देवी के भी दर्शन होते हैं। मान्यता है कि वर्ष 1935 में स्वामीजी महाराज ने दतिया के राजा के सहयोग से इस मंदिर का निर्माण कराया था। यहां मां बगलामुखी और धूमावती की प्रतिमाओं के साथ-साथ हनुमान जी, काल भैरव, परशुराम और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित हैं।

बगलामुखी मंदिर कांगड़ा हिमाचल प्रदेश

मां बगलामुखी का एक मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थिति है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने पर जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और विशेष रूप से कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में भी राहत मिलती है। यही कारण है कि आम लोगों के साथ-साथ कई नामी हस्तियां और नेता भी यहां माथा टेकने आते हैं। मंदिर परिसर के पास ही प्राचीन शिआवली में स्थापित शिवलिंग भी श्रद्धा का केंद्र है, जहां भक्त माता के दर्शन के बाद जलाभिषेक करते हैं।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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