Badrinath Temple Mystery: बदरीनाथ की वादियों में शंख बजाना क्यों है मना? ये है रहस्यमयी गुत्थी
आज बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुल गए हैं। इसी के साथ चारधाम यात्रा की शुरुआत हो चुकी है। क्या आप जानते हैं कि बदरीनाथ में कभी भी शंख नहीं बजाया जाता है? आइए जानते हैं कि इसके पीछे की खास वजह क्या है?

Badrinath Temple: बीते दिनों ही केदारनाथ मंदिर के कपाट खुल चुके हैं। आज सुबह बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुले हैं और इसी के साथ चारधाम यात्रा की शुरुआत हो चुकी है। अगर आप बदरीनाथ गए हैं या वहां जाने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपने ये बात जरूर सुनी होगी कि यहां शंख नहीं बजाया जाता। अब भला चारधाम यात्रा से जुड़े इतने बड़े मंदिर में शंख ना बजे तो इसके पीछे की वजह क्या हो सकती है? इसके पीछे छिपी कहानी और वजब को आज जानने की कोशिश करते हैं। साथ ही जानेंगे इस पौराणिक किस्से को जिसका नाता बदरीनाथ मंदिर के साथ जुड़ा हुआ है।
बदरीनाथ में क्यों नहीं बजाते हैं शंख?
बदरीनाथ मंदिर से जुड़ी एक खास मान्यता है जिसका जिक्र पुराणों में भी है। दरअसल इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है। यहां पर मां लक्ष्मी तपस्या कर रही थीं। उसी दौरान भगवान विष्णु ने यहां पर एक राक्षस का वध किया। परंपरा के हिसाब से हर जीत के बाद शंख बजाया जाता है लेकिन विष्णु जी ने उस दौरान शंख नहीं बजाया था। उन्होंने ऐसा इसलिए किया ताकि लक्ष्मी जी की तपस्या में किसी भी तरह की बाधा ना आए। ऐसे में तभी से ऐसी मान्यता बन गई कि यहां पर कभी भी शंख नहीं बजाया जाएगा।
शंख की आवाज से जुड़ा है पहाड़ों का मामला
बदरीनाथ में शंख ना बजाने के पीछे सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि विज्ञान से भी जुड़ी वजह है। दरअसल बदरीनाथ कोई आम जगह नहीं है बल्कि ये ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के बीच बसा हुआ है। सर्दियों में यहां हर तरफ बर्फ की मोटी परत जम जाती है। अब ऐसे स्थिति में अगर शंख बजाया जाए तो उसकी तेज आवाज पहाड़ों से टकराकर गूंज पैदा करती है। माना जाता है कि इस गूंज से हल्की कंपन बन सकती है और पहाड़ों पर जमी बर्फ वैसे ही काफी नाजुक होती है। ऐसे में उसमें दरार पड़ने या बर्फ के खिसकने का खतरा ज्यादा बढ़ सकता है। बस यही वजह है कि बदरीनाथ में शंख बजाने से परहेज किया जाता है।
बिना शंख के भी पूरी होती है पूजा
बदरीनाथ में भले ही शंख नहीं बजता लेकिन यहां होने वाली पूजा-पाठ में किसी भी तरह की कमी नहीं होती है। मंदिर में हर प्रहर की आरती विधि-विधान से होती है और मंत्रोच्चार के साथ पूरा माहौल भक्ति में डूबा रहता है। श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ बदरीनाथ के दर्शन करते हैं और यहां शांति उन्हें अलग ही सुकून देती है। यहां बिना शंख की आवाज के भी भक्ति को उतनी ही गहराई के साथ महसूस किया जा सकता है। अब ऐसे में अगर यहां शंख नहीं बजाया जाता तो इसके पीछे सिर्फ धार्मिक भावनाओं का सम्मान ही नहीं बल्कि प्रकृति का ख्याल भी रखने का सोचा जाता है।
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो:
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न शास्त्र
फेंगशुई
हस्तरेखा शास्त्र


