Astro Tips: लोहे की तिजोरी में सोने के गहने रखना चाहिए या नहीं?
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक हर धातु का संबंध किसी ना किसी ग्रह से होता है। लोहे का संबंध शनि देव से है और सोने का संबंध गुरु और सूर्य से माना गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि लोहे की तिजोरी में सोने का गहना रखना चाहिए या नहीं? चलिए इस बारे में जानते हैं।

अक्सर लोग घर में कीमती चीज जैसे सोना या गहनें या पैसों को तिजोरी या आलमारी में रखते हैं। कुछ लोग लोहे की आलमारी सोने के गहने रखते हैं। लेकिन ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक हर धातु का संबंध किसी ना किसी ग्रह से होता है। लोहे का संबंध शनि देव से है और सोने का संबंध गुरु और सूर्य से माना गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि लोहे की तिजोरी में सोने का गहना रखना चाहिए या नहीं? चलिए इस बारे में जानते हैं।
सोने और लोहे का संबंध
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक लोहे की तिजोरी में सोने के गहने रखना अशुभ माना जाता है। जैसा कि सोने का संबंध गुरु और सूर्य से है, जिन्हें सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक हैं। वहीं, लोहा मुख्य रूप से शनि देव की धातु है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि और सूर्य के बीच शत्रुता का भाव होता है। ऐसे में यदि आप सोने को लोहे के भीतर रखते हैं तो ग्रहों का यह टकराव आपकी संपत्ति में बरकत को रोकता है। ऐसा करने से घर में धन आने के रास्ते कम होने लगते हैं और संचित धन भी धीरे-धीरे खर्च होने लगता है।
नुकसान
इतना ही नहीं लोहा नकारात्मकता को जल्दी सोखती है जबकि सोना सकारात्मकता और तेज का प्रतीक है। ऐसे में लोहे के बक्से या तिजोरी में सोना बंद रखने से सोने की ऊर्जा दब जाती है। ज्योतिष के मुताबिक लोहे की तिजोरी में सोने रखने से मानसिक और आर्थिक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। अनावश्यक खर्चे बढ़ जाते हैं और निवेश में घाटा होने की संभावना रहती है।
रखने का सही तरीका
अगर आप सोने के गहने लोहे की तिजोरी में रख रहे हैं, तो सबसे बेहतर तरीका यह है कि आप सोने को सीधे लोहे के संपर्क में न रखें। सोने के गहनों को हमेशा एक लाल या पीले रंग के रेशमी कपड़े में लपेटकर रखें। इसके अलावा, आप सोने को लकड़ी के छोटे बक्से में रखकर उस बक्से को लोहे की तिजोरी के अंदर रख सकते हैं।
किस दिशा में रखें सोना
सोना रखने की सबसे उत्तम दिशा होती है उत्तर पूर्व दिशा। इस दिशा के बीच के स्थान को ईशान कोण दिशा माना जाता है और यह काफी पवित्र दिशा होती है, क्योंकि इस दिशा में बृहस्पति का वास होता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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