
पायल पहनते वक्त ना करें ये गलतियां, बन सकता है दुर्भाग्य का कारण!
Astro Tips: पायल केवल आभूषण नहीं होती है बल्कि सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी मानी जाती है। लेकिन ज्योतिष में इसे पहनने के कुछ नियम बताए गए हैं। मान्यता है कि यदि गलत तरीके से पायल पहना जाता है, तो जीवन में कई तरह के संकट झेलने पड़ते हैं।
महिलाओं के शृंगार में पायल का पहनना भी शामिल है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में शादीशुदा महिला का पायल पहनना बेहद शुभ होता है। पायल केवल आभूषण नहीं होती है बल्कि सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी मानी जाती है। लेकिन ज्योतिष में इसे पहनने के कुछ नियम बताए गए हैं। मान्यता है कि यदि गलत तरीके से पायल पहना जाता है, तो जीवन में कई तरह के संकट झेलने पड़ते हैं। वहीं, सही तरीके और सही समय पर पायल पहनने से न सिर्फ सौभाग्य बढ़ता है, बल्कि मानसिक शांति, वैवाहिक सुख और आर्थिक स्थिरता भी बनी रहती है। चलिए जानते हैं कि पायल पहनने का सही तरीका व नियम क्या है?
चांदी की पायल का महत्व
पायल पहनने की परंपरा बहुत पुरानी है। खासकर चांदी का पायल पहनना बेहद शुभ होता है। चांदी को चंद्रमा की धातु माना गया है, जो मन, भावनाओं और शांति से जुड़ा होता है। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी यह लाभदायी है। इससे शरीर में ठंडक बनी रहती है। चांदी एक ऐसा धातु है जो शरीर की गर्मी को संतुलित करता है। यह पैरों में सूजन, दर्द और थकान जैसी समस्याओं को भी कम करता है। इसके अलावा चांदी शरीर की नकारात्मक ऊर्जा को खींच लेती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
इन गलतियों से बचें
- लोहे, पीतल या किसी अन्य मेटल की पायल भूलकर भी नहीं पहननी चाहिए।
- आपको कभी भी टूटी हुई या खराब पायल नहीं पहननी चाहिए। ऐसी पायल आपके जीवन में दुर्भाग्य ला सकती है।
- शास्त्रों की मानें तो टूटी हुई पायल नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है और सौभाग्य में कमी ला सकती है।
- टूटी हुई पायल तुरंत बदल देनी चाहिए और उसके स्थान पर आपको दूसरी पायल पहन लेनी चाहिए।
- सोने की पायल भी नहीं पहननी चाहिए। इससे नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और माता लक्ष्मी का अपमान होता है।
- हमेशा शुद्ध चांदी की पायल पहनें, जिससे आपका चंद्रमा मजबूत रहे और मन शांत बना रहे।
एक पैर में ना पहनें
एक पैर में ही पायल पहनना शुभ नहीं माना जाता है। यह शरीर के संतुलन को बिगाड़ देता है। एक पैर में पायल पहनने से जीवन में नकारात्मकता आती है और पायल पहनने के पूर्ण फल नहीं मिलते हैं। ऐसे में दोनों पैर में पायल पहनने की सलाह दी जाती है।
पहनने की विधि
- पायल पहनने से पहले उसे गंगाजल से शुद्ध करें।
- फिर “ॐ सौभाग्य लक्ष्म्यै नमः” मंत्र का 11 बार जप करें।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

लेखक के बारे में
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धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
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शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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