हनुमान चालीसा पढ़ते वक्त कहीं आप भी नहीं करते ये गलतियां, जानिए 10 नियम

Jan 17, 2026 02:33 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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हनुमान चालीसा का पाठ यदि नियम से किया जाए, तो ही इसका फल प्राप्त होता है। वरना गलत तरीके से किए गए पाठ से बजरंगबली नाराज हो जाते हैं। जैसे कि गलत स्थान व गलत समय पर पाठ करना आदि। चलिए जानते हैं कि हनुमान चालीसा का पाठ करते समय किन गलतियों से बचना चाहिए।

हनुमान चालीसा पढ़ते वक्त कहीं आप भी नहीं करते ये गलतियां, जानिए 10 नियम

शनिवार और मंगलवार को लोग बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। कहते हैं कि हनुमान जी चिरंजीवी हैं। ऐसे में जो भक्त सच्ची श्रद्धा बजरंगबली को याद करता है उनकी पूजा करता है उनपर हनुमान जी की विशेष कृपा बरसती है, पलभर में संकट दूर हो जाते हैं। लेकिन हनुमान चालीसा का पाठ यदि नियम से किया जाए, तो ही इसका फल प्राप्त होता है। वरना गलत तरीके से किए गए पाठ से बजरंगबली नाराज हो जाते हैं। जैसे कि गलत स्थान व गलत समय पर पाठ करना आदि। चलिए जानते हैं कि हनुमान चालीसा का पाठ करते समय किन गलतियों से बचना चाहिए।

हनुमान चालीसा के दौरान ना करें ये गलतियां

- हनुमान चालीसा का पाठ करते समय किसी भी तरह की नकारात्मकता अपने दिल में नहीं लानी चाहिए।

-जो लोग निर्बलों को बिना बात के सताते हैं, उन पर कभी भी हनुमान जी की कृपा नहीं बरसती है।

- हनुमान चालीसा का पाठ करते समय साधक को किसी भी व्यक्ति से बातचीत नहीं करनी चाहिए।

- कुछ समय ऐसे भी हैं जब हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करना चाहिए। सूर्यास्त के तुरंत बाद पाठ करने से बचना चाहिए।

- गुस्से, चिड़चिड़े मन या मानसिक अशांति की अवस्था में भी पाठ नहीं करना चाहिए।

- बिना स्नान, अशुद्ध अवस्था, जल्दबाजी या दोपहर के समय किया गया पाठ भी फलदायी नहीं माना जाता।

हनुमान चालीसा पाठ के 10 जरूरी नियम

1. हनुमान चालीसा पाठ में साफ-सफाई और पवित्रता का खास ख्याल रखना चाहिए। ऐसे में जहां आप हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं या पूजा स्थल की साफ-सफाई अच्‍छे से कर लें।

2. हनुमान चालीसा का पाठ हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करें। इसके लिए सुबह और शाम का समय परफेक्ट रहता है।

3. हनुमान चालीसा के पाठ के दौरान उपयोग किए गए फूल लाल रंग के रखें।

4. हनुमान चालीसा के पाठ के पहले बजरंगबली के सामने दीपक जरूर जलानी करना चाहिए।

5. ध्यान रखें कि दीपक में जो बाती लगा रहे हैं, वह भी लाल सूत (धागे) की होनी चाहिए। आप दीपक में चमेली का तेल या शुद्ध घी का इस्तेमाल होनी चाहिए।

6. हनुमानजी चालीसा के पाठ के बाद उन्हें गुड़ और चने का प्रसाद जरूर ‍अर्पित करें।

7. आप केसरिया बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू, चूरमा, मालपुआ या मलाई मिश्री का भोग भी लगा सकते हैं।

8. हनुमान चालीसा पाठ के दौरान सिर्फ एक वस्त्र पहनकर ही चालीसा का पाठ करें या उनकी पूजा करें।

9. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक शनिवार या रविवार के दिन 100 बार हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।

10. अगर आप 100 बार नहीं कर सकते हैं, तो आप 11, 9, 5, 3 या 1 बार शनिवार, मंगलवार या फिर रोज कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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