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आंवला कैसे उत्पन्न हुआ और इसकी पूजा से क्या फल मिलता है, यहां जानें

आंवला कैसे उत्पन्न हुआ और इसकी पूजा से क्या फल मिलता है, यहां जानें

संक्षेप:

Amla Navami: कार्तिक मास में तुलसी और आंवले का पूजन का बहुत अधिक महत्व बताया गया है। आप कार्तिक शुक्ल की नवमी और शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को आंवले का पूजन कर सकते हैं। इन दोनों तिथि पर आंवला का पूजन फलदायी है।

Thu, 30 Oct 2025 01:10 PMAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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कार्तिक मास में तुलसी और आंवले का पूजन का बहुत अधिक महत्व बताया गया है। आप कार्तिक शुक्ल की नवमी और शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को आंवले का पूजन कर सकते हैं। इन दोनों तिथि पर आंवला का पूजन फलदायी है। आंवला सब पापों का नाश करने वाला है। इसके दर्शन से दोगुना ओर फल खाने से तीन गुना पुण्य होता है। इसलिए हमेशा आंवले का इस्तेमाल करना चाहिए। ये कैसे उत्पन्न हुआ और कार्तिक में इसकी पूजा से क्या फल मिलता है। यह आप यहां जान सकते हैं। पहले जान लें कि आंवला नवमी या वैकुंठ चतुर्दशी के दिन इसकी पूजा का महत्व है। इस दिन आंवले के पेड़ की छाया में जाएं और श्रीहरिका पूजन करें। उन्हें फल-फूल मिष्ठान चढ़ाएं, परिक्रमा करें और फिर आंवले की छाया में बैठकर कथा सुनें। इस दिन आवंले के पेड़ के नीचे बैठकर ब्राह्यणों को भोजन कराएं और दक्षिणा दें। ब्राह्मणों के सन्तुष्ट होने पर श्रीहरि भी प्रसन्न होते हैं।

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कैसे हुई थी आंवले की उत्पत्ति
कैसे हुई थी आंवले की उत्पत्ति, इसके पीछे एक कहानी है। कहा जाता है कि पूर्वकाल में जब सारा जगत जल में निमग्न हो गया, समस्त प्राणी नष्ट हो गये थे, कोहराम मच गया, सृष्टि के लिए उस समय देवाधिदेव ब्रह्माजी जप करने लगे थे। तभी उनकी आंखों से जल निकल आया। उनकी आंखों से जल की बूंदे पृथ्वी पर गिर पड़ी। उसी से आंवले का वृक्ष उत्पन्न हुआ। इस पेड़ की कई शाखाएं थीं और यह फलों से लदा हुआ था। सब वृक्षों में सबसे पहले आंवला ही प्रकट हुआथा, इसलिए आंवला सभी पापों को नष्ट करने वाला कहा गया है। ब्रह्माजी ने पहले आंवले को उत्पन्न किया। सृष्टि में सबसे अधिक विष्णु को प्रिय लगने वाला आंवले का वृक्ष था। उसे देखकर देवताओं को बड़ा आश्चर्य हुआ। तब से इसके नीचे भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इसलिए भगवान विष्णु को आंवला बहुत प्रिय है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey
अनुराधा पांडे लाइव हिन्दुस्तान में एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन लीड कर रही हैं। इन्हें पत्रकारिता जगत में करीब डेढ़ दशक का अनुभव है। ज्योतिष और धर्म-अध्यात्म से जुड़े विषयों पर पिछले 10 सालों से लिख रही हैं। इन्होंने हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा भारतीय जनसंचार संस्थान, दिल्ली और ग्रैजुएशन दिल्ली विश्वविद्यालय से किया है। लाइव हिन्दुस्तान में करियर का लंबा हिस्सा बीता और काम करते-करते 9 साल हो गए हैं। एस्ट्रोलॉजी और करियर से जुड़ी खबरों के अलावा हेल्थ पर लिखने शौक है। इससे पहले तीन साल तक आज तक वेबसाइट में एजुकेशन सेक्शन में भी काम किया है। और पढ़ें
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